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बजट 2026 में राज्यों को 1.4 लाख करोड़? क्या 41% डिवोल्यूशन से सही मायने में फायदा होगा?

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बजट 2026: केंद्र ने राज्यों को FY27 के लिए 1.4 लाख करोड़ दिए, 16वीं वित्त आयोग ने 41% डिवोल्यूशन रखा। ग्रामीण–शहरी बॉडी, डिज़ास्टर ग्रांट्स, नया नारियल प्रमोशन स्कीम, कैपेक्स 12.2 लाख करोड़, फिस्कल डेफिसिट 4.3%। राज्यों को फायदा, चुनौतियाँ, किसानों पर असर – सरल भाषा में पूरा विश्लेषण

नाराज़ राज्यों को खुश करेगा 1.4 लाख करोड़? बजट 2026 के डिवोल्यूशन का असली खेल

बजट 2026: राज्यों को 1.4 लाख करोड़, 41% डिवोल्यूशन – केंद्र–राज्य संबंधों में नया अध्याय?

1 फरवरी 2026 को संसद में पेश हुए केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ा ऐलान किया। केंद्र ने FY27 (अप्रैल 2026 से मार्च 2027) के लिए राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये का ग्रांट देने का वादा किया है। यह 16वीं वित्त आयोग की मुख्य सिफारिशें मानते हुए किया गया है, जिसमें राज्यों को केंद्रीय करों से 41% हिस्सा देने का फैसला बरकरार रखा गया।

सीतारमण ने कहा, “सरकार ने 16वीं वित्त आयोग की सिफारिशें स्वीकार की हैं। वर्टिकल डिवोल्यूशन 41% ही रहेगा। इसमें ग्रामीण और शहरी लोकल बॉडी ग्रांट्स, डिज़ास्टर मैनेजमेंट ग्रांट्स शामिल हैं।” यह 15वीं वित्त आयोग की तरह ही फ्रेमवर्क है, जिसमें राज्यों को सेंट्रल टैक्स से 41% हिस्सा मिलता रहा।

बजट के साथ नया कोकोनट प्रमोशन स्कीम भी लॉन्च किया गया। लेकिन सवाल ये है – क्या ये ऐलान राज्यों की लंबी लिस्ट वाली मांगों को पूरा करता है? आइए हर कोण से देखें।

16वीं वित्त आयोग की सिफारिशें और 41% डिवोल्यूशन का मतलब

वित्त आयोग हर पांच साल में गठित होता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे का फॉर्मूला तय करता है। 16वीं वित्त आयोग ने भी वर्टिकल डिवोल्यूशन (केंद्र से राज्यों को कुल डिविजिबल पूल का %) 41% ही रखा।

पिछली 15वीं वित्त आयोग ने भी यही 41% रखा था। लेकिन असलियत में राज्यों को मिलने वाला शेयर कई बार कम रहता है, क्योंकि केंद्र सेश, सरचार्ज बढ़ाता रहता है, जो डिविजिबल पूल में नहीं आते। उदाहरण के लिए, कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि रियल डिवोल्यूशन कभी–कभी 33% तक गिर जाता है।

FY27 के लिए 1.4 लाख करोड़ में शामिल हैं:

  • ग्रामीण लोकल बॉडी ग्रांट्स
  • शहरी लोकल बॉडी ग्रांट्स
  • डिज़ास्टर मैनेजमेंट फंड्स

दिसंबर 2025 में ही राजस्थान और झारखंड को 723 करोड़ दिए गए थे – राजस्थान को 303 करोड़ पहली किस्त। यह 24 जिला पंचायतों, 339 ब्लॉक पंचायतों और 3857 ग्राम पंचायतों को मिले।

राज्यों के लिए ये पैसे ग्रामीण विकास, आपदा प्रबंधन और लोकल गवर्नेंस के लिए क्रूसियल हैं। लेकिन कई राज्य – जैसे केरल, तमिलनाडु – कहते हैं कि 41% काफी नहीं, इसे 50% तक बढ़ाना चाहिए।

बजट 2026 के बड़े आंकड़े: कैपेक्स, फिस्कल डेफिसिट और ग्रोथ

सीतारमण ने नौवां बजट पेश किया, जो रिकॉर्ड है। मुख्य हाइलाइट्स:

  • कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) FY27 के लिए 12.2 लाख करोड़ – पिछले 11.2 लाख से 9% बढ़ोतरी।
  • फिस्कल डेफिसिट 4.3% GDP (FY26 का 4.4%)। डेब्ट-टू-GDP 55.6%, 2030 तक 50±1% टारगेट।
  • GDP ग्रोथ प्रोजेक्शन 6.8-7.2%।

ये आंकड़े फिस्कल प्रूडेंस दिखाते हैं – उधार कम, निवेश ज़्यादा। राज्यों को ग्रांट्स से लोकल डेवलपमेंट मिलेगा।

नया कोकोनट प्रमोशन स्कीम: किसानों के लिए गेम चेंजर?

बजट में हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर पर फोकस। कोकोनट प्रमोशन स्कीम मुख्य:

  • नॉन-प्रोडक्टिव ट्रीज़ को हाई-यील्ड वैरायटी से बदलना।
  • मेजर कोकोनट ग्रोअर्स स्टेट्स (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र) में प्रोडक्शन बढ़ाना।
  • हाई-डेंसिटी प्लांटिंग, नर्सरी सपोर्ट, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट। ₹37,500/हेक्टेयर फाइनेंशियल असिस्टेंस।

कोकोनट इंडिया में 3 करोड़ किसानों की आजीविका। भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर, लेकिन प्रोडक्टिविटी कम। स्कीम से एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी। साथ ही काजू, कोकोआ, सैंडलवुड के लिए डेडिकेटेड प्रोग्राम्स।

राज्यों को फायदा: कौन कितना मिलेगा?

डिवोल्यूशन फॉर्मूला पॉपुलेशन, इनकम डिस्टेंस, एरिया, टैक्स एफर्ट पर आधारित।

उदाहरण:

  • बड़े राज्य जैसे यूपी, महाराष्ट्र ज़्यादा पॉपुलेशन से बड़ा शेयर।
  • छोटे राज्य जैसे सिक्किम, मिजोरम पॉपुलेशन पर कम, लेकिन एरिया/डिज़ास्टर पर ज़्यादा।

पिछले सालों के राज्य बजट्स (2025-26): यूपी 8 लाख करोड़, महाराष्ट्र 7.5 लाख, गुजरात 3.6 लाख। केंद्र ग्रांट्स से ये बढ़ेंगे।

चुनौतियाँ: सेश–सरचार्ज का मुद्दा

राज्य कहते हैं कि कुल सेंट्रल टैक्स से उनका शेयर कम हो रहा, क्योंकि सेश (जैसे GST कंपेंसेशन सेश) डिविजिबल पूल में नहीं। 15वीं FC ने 41% रखा, लेकिन रियल शेयर 33% तक। 16वीं ने भी नहीं बदला।

कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं – 50% डिवोल्यूशन बेहतर। लेकिन सरकार का तर्क – फिस्कल डिसिप्लिन ज़रूरी।

किसानों, MSME, रोज़गार पर बजट का असर

  • कैपेक्स 12.2 लाख से इंफ्रा जॉब्स बढ़ेंगी।
  • हाई-वैल्यू क्रॉप्स से किसान इनकम।
  • MSME सपोर्ट, एम्प्लॉयमेंट लेड डेवलपमेंट।

महाराष्ट्र (पुणे) के लिए खास: लोकल बॉडी ग्रांट्स से पंचायतें सशक्त। नारियल स्कीम से कोकण किसान फायदा।

बजट का समग्र प्रभाव

यह बजट कंटिन्यूटी दिखाता है – फिस्कल प्रूडेंस, इंफ्रा पुश, एग्री फोकस। राज्यों को 1.4 लाख करोड़ से लोकल डेवलपमेंट मिलेगा। लेकिन सेश मुद्दा बरकरार। नौवें बजट में सीतारमण ने दिखाया कि सरकार विकास और अनुशासन दोनों पर कायम।


5 FAQs

प्रश्न 1: बजट 2026 में राज्यों को कितना पैसा मिलेगा?
उत्तर: FY27 के लिए केंद्र ने राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये के फाइनेंस कमीशन ग्रांट्स दिए हैं। इसमें ग्रामीण–शहरी लोकल बॉडी और डिज़ास्टर मैनेजमेंट ग्रांट्स शामिल हैं।

प्रश्न 2: 16वीं वित्त आयोग ने डिवोल्यूशन कितना रखा?
उत्तर: 41% वर्टिकल डिवोल्यूशन – यानी केंद्रीय करों के डिविजिबल पूल का 41% राज्यों को। यह 15वीं FC जैसा ही है।

प्रश्न 3: कोकोनट प्रमोशन स्कीम क्या है?
उत्तर: नॉन-प्रोडक्टिव ट्रीज़ को हाई-यील्ड वैरायटी से बदलना, प्रोडक्शन बढ़ाना। मेजर स्टेट्स (केरल आदि) में ₹37,500/हेक्टेयर मदद। एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी।

प्रश्न 4: बजट 2026 में फिस्कल डेफिसिट कितना?
उत्तर: FY27 के लिए 4.3% GDP। FY26 का 4.4%। कैपेक्स 12.2 लाख करोड़। डेब्ट-टू-GDP 55.6%।

प्रश्न 5: राज्यों को असली फायदा क्यों कम लगता है?
उत्तर: सेश–सरचार्ज डिविजिबल पूल में नहीं आते, इसलिए रियल शेयर 33% तक गिर जाता। राज्य 50% डिवोल्यूशन की मांग करते हैं।

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