Home देश मंत्रियों के वेतन पर 1102 करोड़ का खर्च? बजट 2026 में क्या–क्या छिपा है इस आंकड़े में?
देश

मंत्रियों के वेतन पर 1102 करोड़ का खर्च? बजट 2026 में क्या–क्या छिपा है इस आंकड़े में?

Share
Budget 2026 ministers salary allocation, PMO budget Rs 73 cr
Share

बजट 2026-27 में मंत्रियों, PMO, कैबिनेट सचिवालय और राज्य मेहमानों के मनोरंजन पर 1102 करोड़ आवंटित। पिछले साल से 24% बढ़ोतरी, VVIP फ्लाइट्स, पूर्व राज्यपालों की मदद और PMO खर्च का पूरा ब्रेकडाउन, तुलना, क्या ज़रूरी है या फिजूलखर्ची? सरल व्याख्या।

राज्य मेहमानों का मनोरंजन, पूर्व राज्यपालों की पेंशन – बजट में ये खर्च क्यों बढ़े?

बजट 2026-27: मंत्रियों के वेतन, VVIP फ्लाइट्स और राज्य मेहमानों पर 1102 करोड़ का खर्च – पूरा ब्रेकडाउन

हर साल जब बजट आता है, तो आम चर्चा होती है बड़े–बड़े सेक्टर्स पर – रेलवे, हाईवे, हेल्थ, एजुकेशन। लेकिन आज हम बात करेंगे एक ऐसे हिस्से की जो शायद कम हेडलाइन्स लेता है, लेकिन कुल मिलाकर एक बड़ा चंक्स है – मंत्रियों के वेतन, PMO, कैबिनेट सचिवालय और राज्य मेहमानों के मनोरंजन पर खर्च।

आत्मनिर्भर भारत बजट 2026-27 में इस पूरे हेड के तहत कुल 1102 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के रिवाइज़्ड एस्टीमेट 978.20 करोड़ से करीब 24% ज़्यादा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने रविवार को लोकसभा में पेश बजट में यह प्रावधान किया।

यह पैसा कहाँ–कहाँ जाता है? क्या ये ज़रूरी खर्च है या फिजूलखर्ची? पिछले साल से तुलना कैसी है? हम इसी को स्टेप बाय स्टेप, आसान भाषा में समझेंगे। साथ ही, इन खर्चों के पीछे की वजहें, नियम और आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है, वो भी।

काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स पर सबसे बड़ा हिस्सा – 620 करोड़

सबसे बड़ा चंक्स जाता है काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के खर्च पर – 620 करोड़ रुपये। यह आंकड़ा 2025-26 के बजट 483.54 करोड़ से काफ़ी ज़्यादा है।

इसमें क्या–क्या शामिल है?

  • कैबिनेट मिनिस्टर्स, स्टेट मिनिस्टर्स और पूर्व प्रधानमंत्रियों के वेतन।
  • सम्पचुअरी अलाउंस (खाने–पीने, छोटे खर्चों के लिए भत्ता) और दूसरे अलाउंस।
  • यात्रा खर्च – चाहे आधिकारिक टूर हो या संसद सेशन।
  • सबसे खास – VVIPs के लिए स्पेशल एक्स्ट्रा सेशन फ्लाइट ऑपरेशंस। यानी, जब संसद सेशन हो या बड़े इवेंट्स हों, तो मंत्रियों के लिए स्पेशल फ्लाइट्स का खर्च।

यह बढ़ोतरी क्यों? शायद मंत्रिमंडल का साइज़, यात्राओं की संख्या या महंगाई के हिसाब से। लेकिन विपक्ष अक्सर इसी पर सवाल उठाता है कि क्या इतने बड़े देश में मंत्रियों के खर्च पर इतना पैसा बर्बाद हो रहा है।

नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय – 256.19 करोड़

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खर्च पर 256.19 करोड़ आवंटित। यह 2025-26 के 279.74 करोड़ से थोड़ा कम है।

यह पैसा जाता है:

  • NSC सचिवालय के एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों पर।
  • स्पेस प्रोग्राम और सिक्योरिटी से जुड़े दूसरे एंगल्स पर।

देश की सुरक्षा के लिहाज़ से यह प्रावधान अहम माना जाता है। थोड़ी कटौती शायद एफिशिएंसी या रीअलोकेशन की वजह से।

प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइज़र ऑफिस – 65 करोड़

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के ऑफिस को 65 करोड़ मिले, जो पिछले साल के 61.32 करोड़ से थोड़ा ज़्यादा।

इसमें शामिल:

  • PSA ऑफिस के एडमिन खर्च।
  • नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के कामकाज।

विज्ञान और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए यह छोटा लेकिन ज़रूरी हिस्सा।

कैबिनेट सचिवालय – 80 करोड़

कैबिनेट सचिवालय को 80 करोड़, पिछले 78 करोड़ से मामूली बढ़ोतरी।

यह पैसा:

  • सचिवालय के रोज़मर्रा खर्चों पर।
  • नेशनल अथॉरिटी फॉर केमिकल वेपन्स कन्वेंशन (NACWC) के एडमिन पर।

NACWC रासायनिक हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय संधि को लागू करने का नोडल बॉडी है।

PMO – 73.52 करोड़

प्रधानमंत्री कार्यालय को 73.52 करोड़ आवंटित, जो 2025-26 के 68 करोड़ से ज़्यादा।

यह पूरी तरह एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों के लिए – स्टाफ़, ऑफिस, कम्युनिकेशन। PMO को लेकर हमेशा चर्चा रहती है कि यह कितना पावरफुल है और इसका बजट कितना प्रभावी यूज़ होता है।

राज्य मेहमानों का मनोरंजन – 5.76 करोड़

फॉरेन स्टेट गेस्ट्स के हॉस्पिटैलिटी और एंटरटेनमेंट पर 5.76 करोड़। यह पिछले साल के 6.20 करोड़ से थोड़ा कम।

इसमें:

  • राष्ट्रपति भवन पर VP और PM के नाम से आयोजित ऑफिशियल डिनर।
  • नेशनल डेज़ पर रिसेप्शन।
  • क्रेडेंशियल प्रेजेंटेशन सेरेमनी।

डिप्लोमेसी का अहम हिस्सा, लेकिन कभी–कभी ‘लक्ज़री’ के रूप में सवाल उठते हैं।

पूर्व राज्यपालों के लिए 1.53 करोड़

पूर्व राज्यपालों को सेक्रेटेरियट असिस्टेंस के लिए 1.53 करोड़, पिछले 1.40 करोड़ से बढ़ा।

यह छोटा लेकिन संवेदनशील हेड – रिटायर्ड गवर्नर्स को बेसिक सपोर्ट।

पिछले बजट से तुलना: क्यों 24% बढ़ा कुल खर्च?

कुल 1102 करोड़ पिछले रिवाइज़्ड 978.20 से 123.8 करोड़ ज़्यादा। मुख्य वजहें:

  • मंत्रियों के खर्च में 136.46 करोड़ की कूद (483 से 620)।
  • PMO में 5.52 करोड़ बढ़ा।
  • PSA और कैबिनेट सचिवालय में मामूली बढ़ोतरी।
  • NSC और हॉस्पिटैलिटी में थोड़ी कटौती।

यह बढ़ोतरी महंगाई, स्टाफ़ सैलरी रिवीजन या यात्राओं की संख्या से जुड़ी हो सकती है।

क्या ये खर्च ज़रूरी हैं या फिजूलखर्ची?

हर बजट हेड पर दो ओपिनियन होते हैं।

सपोर्टर्स कहते हैं:

  • ये हाई लेवल एडमिनिस्ट्रेशन का हिस्सा। बिना सही खर्च के गवर्नेंस रुक जाए।
  • VVIP फ्लाइट्स सिक्योरिटी के लिए ज़रूरी।
  • डिप्लोमेसी से देश की इमेज बनती है।

क्रिटिक्स का तर्क:

  • मंत्रियों की संख्या कम होनी चाहिए।
  • PMO का बजट ट्रांसपेरेंट हो।
  • हॉस्पिटैलिटी पर कैप लगे।

संसद में डिबेट्स में ये मुद्दे उठते रहते हैं।

इन खर्चों का आम आदमी से क्या लेना–देना?

सीधा असर कम लगता है, लेकिन:

  • ये कुल बजट का छोटा हिस्सा (कुल बजट 50 लाख करोड़+ में 1102 करोड़ 0.02%)।
  • लेकिन ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने से टैक्सपेयर्स का भरोसा बढ़ता।
  • अगर बचत हो, तो सोशल सेक्टर्स में जा सकता।

5 FAQs

प्रश्न 1: बजट 2026-27 में मंत्रियों के खर्च पर कितना आवंटित हुआ?
उत्तर: काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के लिए 620 करोड़ रुपये आवंटित, जिसमें वेतन, अलाउंस, यात्रा और VVIP स्पेशल फ्लाइट्स शामिल हैं। यह 2025-26 के 483.54 करोड़ से 136 करोड़ ज़्यादा है।

प्रश्न 2: PMO को बजट में कितना पैसा मिला?
उत्तर: प्रधानमंत्री कार्यालय को 73.52 करोड़ मिले एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों के लिए। यह पिछले साल के 68 करोड़ से 5.52 करोड़ ज़्यादा है।

प्रश्न 3: राज्य मेहमानों के मनोरंजन पर कितना खर्च?
उत्तर: 5.76 करोड़ आवंटित, जो 2025-26 के 6.20 करोड़ से थोड़ा कम। इसमें फॉरेन गेस्ट्स के हॉस्पिटैलिटी, रिसेप्शन और सेरेमनी शामिल।

प्रश्न 4: पूर्व राज्यपालों को क्या प्रावधान?
उत्तर: 1.53 करोड़ सेक्रेटेरियट असिस्टेंस के लिए, पिछले 1.40 करोड़ से बढ़ा।

प्रश्न 5: कुल 1102 करोड़ का सबसे बड़ा हिस्सा कहाँ?
उत्तर: काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स पर 620 करोड़ सबसे बड़ा। NSC पर 256.19, PSA पर 65, कैबिनेट सचिवालय 80, PMO 73.52।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

यूनियन बजट 2026 पर ममता का तीखा हमला: “बंगाल को एक पैसा भी नहीं, झूठ का पुलिंदा!”

ममता बनर्जी ने यूनियन बजट 2026-27 को ‘दिशाहीन, दृष्टिहीन, एंटी-पीपल’ बताया। बंगाल...

बजट 2026: विकास भारत का मजबूत आधार या सिर्फ घोषणाएं? PM मोदी ने बताई सच्चाई

बजट 2026: PM मोदी ने सराहा, बोले – विकास भारत 2047 का...

कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी खत्म – कितना सस्ता होगा इलाज? बजट 2026 का बड़ा एलान!

बजट 2026–27: 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ़, 7 रेयर...