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“2014 में सोनिया मुझे CM बनाना चाहती थीं, राहुल ने रोक दिया” — हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा दावा

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Himanta Biswa Sarma Rahul Gandhi veto Sonia offer CM 2014
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असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया कि 2014 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं और शपथ की तारीख भी तय हो गई थी, लेकिन राहुल गांधी ने USA से कॉल कर फैसला “वीटो” कर दिया। सरमा के अनुसार तब 58 कांग्रेस विधायक उनके साथ थे, केवल 12 ने विरोध किया था।

“कांग्रेस CM बनता तो हमेशा का दाग होता” — हिमंता का हमला: राहुल ने सोनिया का ऑफर वीटो किया, फिर मैं BJP में आया

हिमंता बिस्वा सरमा का दावा: “2014 में सोनिया गांधी मुझे CM बनाना चाहती थीं, राहुल गांधी ने रोक दिया”

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को एक बार फिर कांग्रेस छोड़ने की अपनी पुरानी कहानी को सामने रखते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि 2014 में जब वे तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के खिलाफ बगावत की स्थिति में थे, तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की थी, लेकिन राहुल गांधी ने अमेरिका से फोन कर उस फैसले को “वीटो” कर दिया।

सरमा ने यह बयान एक राज्य कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में दिया। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस ने असंतोष शांत कराने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे को असम भेजा था। सरमा के मुताबिक, 58 कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री पद के लिए उनके समर्थन में थे, कुछ वरिष्ठ नेता न्यूट्रल थे और सिर्फ 12 विधायक ऐसे थे जिन्होंने कहा कि उन्हें CM नहीं बनना चाहिए और मौजूदा मुख्यमंत्री (तरुण गोगोई) ही बने रहें।

“शपथ की तारीख मैं तय कर रहा था”—अंबुबाची मेला वाला दावा

हिमंता का कहना है कि सोनिया गांधी ने उन्हें अपने निवास पर बुलाकर उनसे शपथ ग्रहण की तारीख तय करने को कहा था। सरमा ने दावा किया कि उन्होंने सोनिया गांधी से कहा था कि वे जून के अंत में होने वाले अंबुबाची मेले के अगले दिन शपथ ले लेंगे। लेकिन बाद में पार्टी के भीतर से यह जानकारी मिली कि राहुल गांधी, जो उस समय अमेरिका में थे, उन्होंने फोन किया और कांग्रेस ने अपना फैसला बदल दिया।

सरमा के मुताबिक, खड़गे पार्टी नेतृत्व को लगातार याद दिलाते रहे कि कांग्रेस के अधिकतर विधायक उनके साथ हैं। फिर भी, उनका आरोप है कि “न्याय नहीं मिला” और उनके साथ “अन्याय” हुआ।

“कांग्रेस का CM बनता तो दाग रहता”—सarma की राजनीतिक लाइन

इस पूरे प्रकरण पर हिमंता ने एक दिलचस्प राजनीतिक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि वे इसे अपने लिए “आशीर्वाद” मानते हैं कि उस समय वे कांग्रेस के मुख्यमंत्री नहीं बने, क्योंकि अगर वे कांग्रेस CM बन जाते तो “हमेशा के लिए एक दाग” उनके साथ रहता।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में रहते हुए वे “सनातनी” और “असमिया” हितों के लिए उस तरह काम नहीं कर पाते, जैसा वे आज कर रहे हैं। सरमा ने अपने भाजपा सफर को राहुल गांधी की कथित रोक से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें “सही रास्ता” मिला और वे “सनातन और असम” के लिए “निडर होकर” काम कर पाए।

कांग्रेस से BJP तक: हिमंता का राजनीतिक सफर (जैसा उन्होंने याद किया)

हिमंता ने बताया कि 2015 में वे अपने करीबी विधायकों के साथ BJP में शामिल हो गए। इसके बाद 2016 में BJP ने असम में कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म किया और सरकार बनाई। सरमा उस सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में गिने गए, जबकि मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल थे।

बाद में 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP के सत्ता में लौटने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद संभाला। अब BJP की नजर तीसरी बार लगातार सरकार बनाने पर है, और सरमा ने कहा कि विधानसभा चुनाव अप्रैल तक अपेक्षित हैं।

राजनीतिक मायने: कांग्रेस पर हमला और चुनावी संकेत

यह बयान ऐसे समय आया है जब असम में 2026 के चुनावी माहौल में सियासत तेज होती दिख रही है। हिमंता का यह दावा कांग्रेस नेतृत्व—खासकर राहुल गांधी—पर सीधे निशाना साधता है और यह संदेश देने की कोशिश करता है कि कांग्रेस ने “टैलेंट” को रोका, जबकि भाजपा ने उन्हें मंच दिया।

कांग्रेस की ओर से इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे की राजनीति में महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, सरमा का बयान असम की पुरानी अंदरूनी कांग्रेस राजनीति को फिर से बहस के केंद्र में ले आया है।

FAQs (5)

  1. हिमंता बिस्वा सरमा ने 2014 को लेकर क्या दावा किया?
    उन्होंने दावा किया कि 2014 में सोनिया गांधी उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं, लेकिन राहुल गांधी ने अमेरिका से फोन कर उस फैसले को “वीटो” कर दिया।
  2. सरमा के अनुसार 2014 में कितने कांग्रेस विधायक उनके समर्थन में थे?
    सरमा के मुताबिक, 58 कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री पद के लिए उनके साथ थे और 12 विधायकों ने उनका विरोध किया था।
  3. मल्लिकार्जुन खड़गे का इस प्रकरण में क्या रोल बताया गया?
    सरमा ने कहा कि कांग्रेस ने असंतोष शांत कराने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे को असम भेजा था और खड़गे नेतृत्व को उनके समर्थन की बात याद दिलाते रहे।
  4. अंबुबाची मेला का जिक्र क्यों आया?
    सरमा का दावा है कि सोनिया गांधी से मुलाकात में उन्होंने शपथ ग्रहण की तारीख अंबुबाची मेला के अगले दिन रखने की बात कही थी, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया।
  5. हिमंता कांग्रेस छोड़कर BJP कब गए और CM कब बने?
    सरमा के अनुसार वे 2015 में BJP में शामिल हुए, और 2021 में BJP के सत्ता में लौटने के बाद मुख्यमंत्री बने।

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