त्रिपुरा के उना कोठी जिले के कुमरघाट में शिव मंदिर चंदा विवाद से सांप्रदायिक हिंसा भड़की। मस्जिद तोड़ी, घर-दुकानें जलाईं, 5-6 घायल। प्रशासन ने 163 BNSS लागू कर इंटरनेट 48 घंटे बंद किया, 9 गिरफ्तार।
त्रिपुरा दंगे: कुमरघाट में आगजनी, मस्जिद पर हमला, सेना-सीआरपीएफ ने संभाला, इंटरनेट 2 दिन ब्लैकआउट
त्रिपुरा के उना कोठी में मंदिर चंदा विवाद से भड़की सांप्रदायिक हिंसा: मस्जिद तोड़ी, घर जलाए
त्रिपुरा के उना कोठी जिले के कुमरघाट उपमंडल में शनिवार रात को एक छोटे से चंदा विवाद ने भयानक रूप ले लिया। स्थानीय शिव मंदिर या आगामी भैरब मेला के लिए दान इकट्ठा करने को लेकर दो समुदायों के बीच भिड़ंत हो गई, जिसमें 5-6 लोग घायल हुए और कई घरों-दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। सबसे दर्दनाक बात ये कि एक स्थानीय मस्जिद को भी नुकसान पहुंचाया गया।
घटना फतिकराय थाना क्षेत्र के सैदरपर गांव (या सायदारपारा-शिमुलतला इलाका) में दोपहर करीब 10 बजे शुरू हुई। कुछ युवकों ने लकड़ी से लदा एक ट्रक रोक लिया और ड्राइवर से मंदिर/मेले के नाम पर चंदा मांगा। ड्राइवर ने मालिक मसब्बिर अली से संपर्क किया, जिन्होंने कहा कि चंदा पहले ही दे चुके हैं। लेकिन युवकों ने जिद पकड़ ली और बहस हो गई। नतीजा ये हुआ कि मसब्बिर और ड्राइवर पर हमला बोल दिया गया।
जैसे ही खबर फैली, दूसरे समुदाय के लोग इकट्ठा हो गए और हालात बेकाबू हो गए। हिंसक भीड़ ने सड़कें ब्लॉक कर दीं, गाड़ियां तोड़ीं, मसब्बिर की लकड़ी की दुकान में आग लगा दी, जो पास के तीन घरों तक फैल गई। सूखी घास के ढेर भी जलाए गए। मस्जिद में घुसकर तोड़फोड़ की गई। पुलिस और प्रशासन ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई: कर्फ्यू, इंटरनेट बंद, भारी फोर्स
उना कोठी के डीएम तमल मजुमदार ने तुरंत कुमरघाट उपमंडल में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी, जो 5 या इससे अधिक लोगों के जमावड़े, रैली या सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाती है। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 48 घंटे के लिए बंद कर दी गईं, ताकि अफवाहें न फैलें और सोशल मीडिया पर भड़काऊ मैसेज न वायरल हों।
सुरक्षा के मोर्चे पर असम राइफल्स, सीआरपीएफ, बीएसएफ और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स की टुकड़ियां तैनात की गईं। फ्लैग मार्च निकाले गए, ड्रोन से संवेदनशील इलाकों पर निगरानी शुरू हो गई। डीएम और एसपी अविनाश राय ने घटनास्थल का दौरा किया। पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया और 8-9 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
डीएम तमल मजुमदार ने कहा, ‘स्थिति नियंत्रण में है। निषेधाज्ञा और इंटरनेट सस्पेंशन सावधानी के तौर पर हैं।’ एसपी अविनाश राय ने पुष्टि की कि भारी फोर्स तैनात है और हालात शांत हैं। फतिकराय के विधायक सुधांगशु दास ने भी इलाके का दौरा किया।
विवाद का ट्रिगर: मंदिर/मेला चंदा या आपराधिक घटना?
पुलिस के अनुसार, ये सब भैरब मेला या स्थानीय शिव मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने से शुरू हुआ। एक स्थानीय क्लब के सदस्यों ने ‘मोमिन’ ड्राइवर से पैसे मांगे, जिसे मना करने पर मामला बढ़ गया। कुछ रिपोर्टों में इसे ‘एक्सटॉर्शन’ या स्मगल्ड टिंबर से जोड़ा गया, लेकिन ज्यादातर स्रोत इसे मेला सब्सक्रिप्शन डिस्प्यूट बता रहे हैं।
विधायक सुधांगशु दास ने कहा कि कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ये शुद्ध आपराधिक घटना है। दोनों समुदायों से अपील की कि सतर्क रहें और साजिश का शिकार न हों।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस नेता ने की निंदा
उना कोठी के वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिरजित सिन्हा ने हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, ‘हमलावरों ने न सिर्फ लकड़ी की दुकान जलाई और मासूमों पर हमला किया, बल्कि मस्जिद में घुसकर भारी तोड़फोड़ भी की। दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।’ सिन्हा ने कम से कम 5-6 घायलों का जिक्र किया।
त्रिपुरा में सांप्रदायिक तनाव का बैकग्राउंड
त्रिपुरा आदिवासी-गैर आदिवासी संबंधों के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के सालों में धार्मिक आधार पर भी कुछ तनाव देखे गए हैं। उना कोठी सीमांत जिला है, जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं और अल्पसंख्यक समुदाय भी रहता है। मंदिर-मेला चंदा जैसे छोटे विवाद अक्सर बड़े होते हैं, खासकर जब आर्थिक या सामाजिक तनाव जुड़ जाए।
पिछले कुछ वर्षों में त्रिपुरा पुलिस ने सांप्रदायिक घटनाओं पर सख्ती बरती है। इंटरनेट सस्पेंशन और केंद्रीय फोर्स तैनाती आम रणनीति है। लेकिन ये घटनाएं स्थानीय शांति समितियों, डायलॉग और आर्थिक विकास से ही जड़ से खत्म होंगी।
हिंसा के नुकसान: आंकड़े और प्रभाव
घटना के आंकड़े:
| विवरण | संख्या/स्थिति |
|---|---|
| घायल | 5-6 (हल्के-मध्यम) |
| गिरफ्तार | 8-9 |
| आग की घटनाएं | 4+ दुकानें/घर |
| सुरक्षा बल | असम राइफल्स, सीआरपीएफ, बीएसएफ, TSR |
| प्रतिबंध | 163 BNSS, इंटरनेट 48 घंटे बंद |
इलाके में दहशत का माहौल है। व्यापार प्रभावित, बच्चे डरे हुए। लंबे समय तक भरोसा बहाल करना चुनौती।
आगे क्या होगा?
स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन निगरानी जारी रहेगी। पोस्ट-वायलेंस फेज में पीड़ितों को मुआवजा, शांति समितियां बनाना और कम्युनिटी मीटिंग्स जरूरी। चंदा इकट्ठा करने जैसे कामों में पारदर्शिता लानी पड़ेगी। त्रिपुरा सरकार ने दोनों समुदायों से अपील की है कि शांति बनाए रखें।
ऐसी घटनाएं समाज को आईना दिखाती हैं। छोटे विवाद को सांप्रदायिक न बनने दें। स्थानीय नेता, पुलिस और नागरिक मिलकर सुलझाएं।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- त्रिपुरा उना कोठी हिंसा कब और क्यों भड़की?
शनिवार रात कुमरघाट के सैदरपर में शिव मंदिर/भैरब मेला चंदा मांगने को लेकर ट्रक रोका गया। बहस बढ़ी, हमला हुआ, फिर आगजनी। - हिंसा में कितना नुकसान हुआ?
5-6 घायल, मसब्बिर अली की लकड़ी दुकान जली, 3+ घर, मस्जिद तोड़ी गई। सड़कें ब्लॉक, गाड़ियां क्षतिग्रस्त। - प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
163 BNSS के तहत कर्फ्यू, 48 घंटे इंटरनेट बंद, असम राइफल्स-सीआरपीएफ तैनात, फ्लैग मार्च, ड्रोन सर्विलांस। 8-9 गिरफ्तार। - क्या स्थिति अब नियंत्रण में है?
हां, डीएम तमल मजुमदार और एसपी अविनाश राय के अनुसार हालात शांत। भारी फोर्स तैनात, निगरानी जारी। - राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या आई?
कांग्रेस नेता बिरजित सिन्हा ने निंदा की, मस्जिद तोड़ने और आगजनी पर सख्त कार्रवाई की मांग। विधायक सुधांगशु दास ने साजिश का हवाला दिया।
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