विजय माल्या ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि इंग्लैंड के कोर्ट के आदेशों के कारण वह भारत लौटने का सटीक समय नहीं बता सकते। HC ने FEO एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से पहले उनकी शारीरिक उपस्थिति की शर्त रखी। 11 मार्च अगली सुनवाई।
“इंग्लैंड कोर्ट के आदेश से फंस गया”: विजय माल्या का भारत लौटने पर सफाई, सुप्रीम कोर्ट केस का हवाला
माल्या का बॉम्बे हाईकोर्ट को जवाब: “भारत लौटने का सटीक समय नहीं बता सकता”
बॉम्बे हाईकोर्ट में विजय माल्या ने अपनी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए भारत लौटने का कोई ठोस समयसीमा नहीं बताई।
उनके वकील अमित देसाई ने बुधवार को चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की बेंच को बताया कि इंग्लैंड के कोर्ट के आदेशों के कारण माल्या वहां से बाहर नहीं जा सकते, इसलिए “वर्तमान में भारत लौटने का सटीक समय बताना असंभव है।”
कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि FEO एक्ट की संवैधानिक वैधता और माल्या को FEO घोषित करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई तभी होगी जब वह भारत लौटेंगे।
माल्या की दो याचिकाएं बॉम्बे HC में लंबित
माल्या ने दो याचिकाएं दायर की हैं – एक तो ED के FEO घोषणा आदेश को चुनौती देने वाली और दूसरी 2018 के Fugitive Economic Offenders (FEO) एक्ट की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने वाली।
देसाई ने कहा कि अगर माल्या भारत लौट आए तो दोनों याचिकाएं “infructuous” यानी बेकार हो जाएंगी।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की शारीरिक उपस्थिति के बिना भी याचिकाएं सुनवाई योग्य हो सकती हैं।
कोर्ट का सख्त रुख: “भारत लौटो, नहीं तो सुनवाई नहीं”
चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या माल्या ने इंग्लैंड के कोर्ट के प्रतिबंधित आदेशों को चुनौती दी है या यह सिर्फ बहाना है।
कोर्ट ने पहले भी कहा था, “तुम्हें भारत लौटना होगा…अगर लौट नहीं सकते तो हम याचिका नहीं सुनेंगे।”
अब कोर्ट ने माल्या की ओर से दिए गए बयान को एफिडेविट के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि भारत सरकार जवाब दे सके। सुनवाई 11 मार्च को टाली गई।
भारत सरकार का तीखा हमला: “हमारा कानून मजबूत है”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सहयोगियों एसवी राजू, अनिल सिंह और धीरेंद्र सिंह के साथ कहा कि भारत का कानून व्यवस्था “robust and vibrant” है और नियमों से चलती है।
उन्होंने कहा कि माल्या को भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन आना होगा।
माल्या पर किंगफिशर एयरलाइंस के 9,000 करोड़ के डिफॉल्ट का आरोप है और वे 2016 से फरार हैं।
माल्या का केस: FEO एक्ट की वैधता पर सवाल
FEO एक्ट 2018 भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति ज़ब्त करने का प्रावधान देता है।
माल्या ने इसे असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी है।
कोर्ट ने उनकी उपस्थिति को याचिका की “maintainability” यानी सुनवाई योग्यता से जोड़ा है।
| याचिका का प्रकार | मुख्य मुद्दा | कोर्ट का रुख |
|---|---|---|
| FEO घोषणा को चुनौती | ED के आदेश के खिलाफ | भारत लौटना ज़रूरी |
| FEO एक्ट वैधता | 2018 कानून असंवैधानिक? | शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य |
माल्या का UK कनेक्शन: इंग्लैंड कोर्ट के आदेश
माल्या ब्रिटेन में हैं और वहां के कोर्ट ने उन्हें देश छोड़ने से रोका है।
भारत ने उनका प्रत्यर्पण मांगा था, लेकिन कुछ शर्तें बाकी हैं।
कोर्ट ने पूछा कि क्या माल्या ने इन आदेशों को चैलेंज किया।
5 FAQs
- विजय माल्या ने कोर्ट को क्या बताया?
माल्या ने कहा कि इंग्लैंड के कोर्ट के आदेशों के कारण वह भारत लौटने का सटीक समय नहीं बता सकते। - बॉम्बे HC ने क्या शर्त रखी?
FEO एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए माल्या की शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य। - भारत सरकार का स्टैंड क्या है?
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि भारत का कानून मजबूत है और माल्या को भारतीय न्याय के अधीन आना होगा। - माल्या की याचिकाएं क्या हैं?
एक FEO घोषणा को चुनौती, दूसरी FEO एक्ट 2018 की संवैधानिक वैधता पर। - अगली सुनवाई कब?
11 मार्च को, माल्या को एफिडेविट दाखिल करने का आदेश।
- Bombay HC CJ Shree Chandrashekhar Gautam Ankhad
- Fugitive Economic Offenders Act validity
- Kingfisher Airlines debt recovery
- Mallya petitions FEO declaration
- Mallya UK court orders England jurisdiction
- Solicitor General Tushar Mehta Mallya case
- Vijay Mallya Bombay High Court return to India
- Vijay Mallya FEO Act challenge
Leave a comment