कॉमर्स मिनिस्टर पियूष गोयल बोले भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर दोनों देश अपने हित सुरक्षित रखते आगे बढ़ेंगे। नेगोशिएशन स्टेटस, टैरिफ वार, कृषि निर्यात, डिजिटल टैक्स, डिफेंस ट्रेड, पिछले समझौते और 2026 में डील की संभावना का पूरा विश्लेषण
भारत-US ट्रेड नेगोशिएशन: गोयल का बयान, टैरिफ वार, एग्री एक्सपोर्ट और आगे का रोडमैप
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: पियूष गोयल का बयान – दोनों देश हित सुरक्षित रख आगे बढ़ेंगे
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते हमेशा से चर्चा में रहे हैं क्योंकि दोनों ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से हैं। हाल ही में कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पियूष गोयल ने कहा कि दोनों देश अपने-अपने हितों की रक्षा करते हुए ट्रेड डील की दिशा में आगे बढ़ेंगे। ये बयान ऐसे समय आया जब दोनों देशों के बीच टैरिफ, कृषि निर्यात, डिजिटल टैक्स और डिफेंस जैसे मुद्दों पर नेगोशिएशन चल रही हैं। गोयल का ये स्टेटमेंट दिखाता है कि भारत किसी जल्दबाज़ी में डील नहीं करेगा बल्कि अपने किसानों, एमएसएम और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देगा। अमेरिका भी अपने मैन्युफैक्चरिंग और एग्री सेक्टर को बचाने पर अड़ा है। ये बयान 2026 में संभावित डील के लिए सकारात्मक सिग्नल है लेकिन सावधानी भरा भी। दोनों देशों के बीच बाइलेटरल ट्रेड 2025 में 190 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है।
पियूष गोयल का पूरा बयान और इसका मतलब
पियूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही अपने कोर इंटरेस्ट्स को सेफगार्ड करते हुए नेगोशिएशन आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने ज़ोर दिया कि ये एक म्यूचुअल बेनिफिट वाली प्रोसेस होगी जिसमें दोनों पक्ष जीतेंगे। गोयल ने पिछले समझौतों का ज़िक्र किया जैसे 2023 में मोदी-बाइडेन मीट के बाद इंटरिम ट्रेड पैक्ट और iCET इनिशिएटिव। ये बयान अमेरिकी चुनावों के बाद ट्रंप या हैरिस प्रशासन के साथ डील की उम्मीदों के बीच आया। भारत के लिए ये ज़रूरी है क्योंकि अमेरिका हमारा सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। 2025 में भारत ने अमेरिका को 80 बिलियन डॉलर का सामान भेजा जिसमें फार्मा, आईटी सर्विसेज, टेक्सटाइल और ज्वेलरी शामिल हैं। लेकिन अमेरिका का भारत के साथ 30 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट है जिसे वो कम करना चाहता है। गोयल का मैसेज साफ है – डील होगी लेकिन भारत झुक नहीं सकता।
पिछले नेगोशिएशन का बैकग्राउंड और चुनौतियाँ
भारत-अमेरिका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बात 2000 के दशक से चल रही है लेकिन 2019 से तेज़ हुई। मोदी सरकार ने 2023 में इंटरिम डील साइन की जिसमें टैरिफ कट्स और इन्वेस्टमेंट प्रमोशन शामिल था। लेकिन फुल FTA अभी लंबित है। मुख्य चुनौतियाँ ये हैं। पहला, अमेरिका भारत से दूध उत्पाद, चावल और गेहूँ के आयात पर रोक हटाने की मांग करता है लेकिन भारत किसानों को बचाने के लिए APMC और MSP सिस्टम का हवाला देता है। दूसरा, डिजिटल सर्विसेज टैक्स पर विवाद – अमेरिका कहता है ये गूगल मेटा जैसे उसके कंपनियों पर बोझ डालता है। तीसरा, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर दबाव। भारत जेनेरिक दवाओं के लिए कंपलसरी लाइसेंसिंग चाहता है। चौथा, डिफेंस और टेक्नोलॉजी ट्रेड में रिस्ट्रिक्शन्स। इन सबके बावजूद दोनों देश QUAD और इंडो-पैसिफिक में स्ट्रेटेजिक पार्टनर हैं। गोयल ने कहा दोनों इंटरेस्ट्स बैलेंस करेंगे।
कृषि निर्यात और किसानों के हित: भारत का स्टैंड
ट्रेड डील में सबसे संवेदनशील मुद्दा कृषि है। अमेरिका भारत से 5 बिलियन डॉलर के एग्री प्रोडक्ट्स चाहता है लेकिन भारत के 14 करोड़ किसानों का लाइवलीहुड खतरे में पड़ सकता है। गोयल ने साफ कहा कि भारत दूध मीट और अनाज पर संवेदनशील लिस्ट रखेगा। पिछले साल भारत ने अमेरिका को 1 बिलियन डॉलर के मसाले फल सब्जियाँ निर्यात किए। लेकिन अमेरिकी सब्सिडी वाले कॉर्न सोयाबीन का फ्लड आने का डर है। भारत ने WTO में अमेरिका के खिलाफ केस भी लड़ा। गोयल का बयान किसान संगठनों के लिए राहत है। सरकार एमएसपी गारंटी और फूड सिक्योरिटी को प्राथमिकता देगी। ये स्टैंड 2024 किसान आंदोलन की याद दिलाता है। ट्रेड डील में एग्री चैप्टर सावधानी से नेगोशिएट होगा।
डिजिटल टैक्स और टेक्नोलॉजी ट्रेड: विवाद के केंद्र में
डिजिटल इकोनॉमी दूसरा बड़ा मुद्दा है। भारत ने 2020 में डिजिटल सर्विसेज टैक्स लगाया जो गूगल अमेज़न जैसे अमेरिकी फर्म्स पर 2% है। अमेरिका ने WTO में चैलेंज किया। गोयल ने कहा ये इश्यू सुलझेगा लेकिन भारत का रेवेन्यू लॉस नहीं होगा। भारत डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल ला रहा है। iCET के तहत सेमीकंडक्टर AI और क्वांटम में कोऑपरेशन बढ़ा। 2025 में दोनों देशों ने 10 बिलियन डिफेंस ट्रेड टारगेट सेट किया। ड्रोन F-35 डील जैसी बातें आगे हैं। गोयल का बयान दिखाता है कि ट्रेड डील टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को बूस्ट देगी। लेकिन IPR पर भारत फ्लेक्सिबल नहीं होगा।
पिछले समझौते और 2026 की संभावनाएँ
2023 मोदी-बाइडेन मीट में इंटरिम डील हुई जिसमें 23 बिलियन का टैरिफ कट और इन्वेस्टमेंट प्रमोशन शामिल। भारत ने अमेरिका को 6000 करोड़ का स्टील टैरिफ छूट दी। 2025 तक ट्रेड 190 बिलियन पहुंचा। गोयल ने कहा फुल FTA 2026 में पॉसिबल अगर नेगोशिएटर्स तेज़ी दिखाएँ। अमेरिकी चुनाव रिजल्ट्स पर निर्भर। ट्रंप अगर आए तो टैरिफ वार तेज़ हो सकता। भारत का एक्सपोर्ट टारगेट 1 ट्रिलियन है जिसमें अमेरिका का बड़ा शेयर। गोयल का बयान आशावादी लेकिन सतर्क। डील से भारत को नौकरियाँ निवेश और एक्सपोर्ट बूस्ट मिलेगा।
ट्रेड डील से किसानों एमएसएम को फायदा कैसे
ट्रेड डील अगर सही तरीके से हुई तो भारत के टेक्सटाइल फार्मा आईटी सेक्टर को बड़ा मार्केट मिलेगा। अमेरिका में भारतीय जेनेरिक दवाएँ 40% शेयर रखती हैं। एमएसपी सुरक्षित रहने पर किसान फ्रूट एक्सपोर्ट बढ़ा सकेंगे। गोयल ने कहा डोमेस्टिक इंडस्ट्री प्रोटेक्टेड रहेगी। ये डील QUAD और इंडो-पैसिफिक स्ट्रेटेजी को इकोनॉमिक बैकिंग देगी। चुनौतियाँ रहेंगी लेकिन दोनों देश जीत सकते हैं।
अंत में गोयल का विज़न
पियूष गोयल ने नेगोशिएटर्स को निर्देश दिया कि हित सुरक्षित रखें। ये बयान भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत दिखाता है। ट्रेड डील सिर्फ़ व्यापार नहीं रणनीतिक पार्टनरशिप बनेगी। 2026 में ब्रेकथ्रू की उम्मीद।
5 FAQs
प्रश्न 1: पियूष गोयल ने भारत-US ट्रेड डील पर क्या कहा?
उत्तर: गोयल बोले दोनों देश अपने हित सुरक्षित रखते आगे बढ़ेंगे। ये म्यूचुअल बेनिफिट वाली प्रोसेस होगी। जल्दबाज़ी नहीं करेंगे।
प्रश्न 2: ट्रेड डील में कृषि पर भारत का स्टैंड क्या?
उत्तर: भारत दूध अनाज पर संवेदनशील लिस्ट रखेगा। किसानों MSP फूड सिक्योरिटी प्रोटेक्टेड रहेगी। अमेरिकी सब्सिडी प्रोडक्ट्स पर सावधानी।
प्रश्न 3: डिजिटल टैक्स विवाद कैसे सुलझेगा?
उत्तर: गोयल कहते हैं इश्यू सुलझेगा लेकिन भारत का रेवेन्यू लॉस नहीं। iCET से टेक कोऑप बढ़ेगा।
प्रश्न 4: 2026 में डील कब तक पॉसिबल?
उत्तर: नेगोशिएटर्स तेज़ी दिखाएँ तो 2026 में फुल FTA संभव। अमेरिकी चुनाव पर निर्भर।
प्रश्न 5: डील से भारत को क्या फायदा?
उत्तर: एक्सपोर्ट बूस्ट नौकरियाँ निवेश। फार्मा टेक्सटाइल आईटी को बड़ा मार्केट। डिफेंस टेक कोऑप।
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