दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरिम मेंटेनेंस स्टेज पर पत्नी को कमाने वाली या स्वावलंबी मानना गलत है। पति के बिना सबूत ‘नर्सरी टीचर’ दावे को खारिज कर फैमिली कोर्ट के ₹2500 को ₹3500 किया। पति की कम बताई आय पर मिनिमम वेजेस आधार लिया।
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अंतरिम मेंटेनेंस पर पत्नी को कमाने वाली मानना गलत, बिना सबूत पुरुष दावा न करे
इंटरिम मेंटेनेंस पर दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: “पत्नी को कमाने वाली मानना गलत, बिना सबूत दावा खारिज”
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि इंटरिम मेंटेनेंस देने के स्टेज पर पत्नी को स्वतः कमाने वाली या खुद को मेंटेन करने वाली मानना गलत है। पति के “बिना सबूत के खाली दावे” (mere bald assertion) को आधार न बनाया जाए। जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने फैमिली कोर्ट के ₹2500 मासिक अंतरिम मेंटेनेंस को ₹3500 बढ़ाया।
केस एक मुस्लिम दंपति का था, जो जून 2021 में शादी के बाद दहेज के नाम पर क्रूरता का शिकार हुई। पत्नी को 2022 में मायके से निकाल दिया गया। CrPC की धारा 125 के तहत मेंटेनेंस मांगा। पति ने दावा किया कि पत्नी नर्सरी टीचर है, लेकिन कोई दस्तावेजी सबूत नहीं दिया।
फैमिली कोर्ट का ऑर्डर और हाईकोर्ट की आलोचना
फैमिली कोर्ट ने मार्च 2024 में पत्नी को ₹2500 मासिक अंतरिम मेंटेनेंस दिया। पत्नी ने इसे कम बताते हुए हाईकोर्ट में अपील की। पति ने खुद की आय ₹10,000 बताई (NGO में टीचर/स्पेशल एजुकेटर), लेकिन बैंक स्टेटमेंट भी आंशिक थे।
हाईकोर्ट ने पति के दावों को खारिज करते हुए कहा:
– पत्नी 11वीं पास है, बिना प्रूफ के नर्सरी टीचर मानना गलत।
– इंटरिम स्टेज पर पत्नी को “earning or capable of maintaining herself” प्रेस्यूम न किया जाए।
– पति ग्रेजुएट है, UP में मिनिमम वेजेस ₹13,200। खुद बताई आय इससे कम, इसलिए मिनिमम वेजेस आधार लें।
मेंटेनेंस बढ़ाकर ₹3500
हाईकोर्ट ने पति की आय को मिनिमम वेजेस पर तय किया। पक्षकारों की स्थिति, पत्नी की कोई आय न होना देख ₹3500 मासिक अंतरिम मेंटेनेंस तय किया। 3 महीने में बकाया भी चुकाने का आदेश।
केस की पूरी टाइमलाइन और तथ्य
– शादी: जून 2021 (मुस्लिम रीति से)।
– क्रूरता: दहेज मांग पर मायके निकाला (2022)।
– पत्नी का दावा: पति प्राइवेट स्कूल टीचर (₹25,000), ट्यूशन (₹15,000), किराया (₹30,000)।
– पति का दावा: ₹10,000 (NGO), लेकिन सबूत अधूरे।
– फैमिली कोर्ट: ₹2500 (मार्च 2024)।
– हाईकोर्ट: ₹3500 (5 जनवरी 2026)।
| विवरण | फैमिली कोर्ट | हाईकोर्ट |
|---|---|---|
| पत्नी की आय धारणा | नर्सरी टीचर (बिना प्रूफ) | कोई प्रेसम्प्शन नहीं |
| पति की आय | ₹10,000 (दावा) | ₹13,200 (मिनिमम वेजेस) |
| मेंटेनेंस | ₹2500/माह | ₹3500/माह |
फैसले का महत्व: इंटरिम स्टेज पर नया पैमाना
जस्टिस शर्मा ने लिखा, “मात्र खाली दावा कि पत्नी कमाती है, बिना प्रूफ के, पति को इंटरिम स्टेज पर मदद नहीं कर सकता।” यह फैसला CrPC 125 के तहत:
– इंटरिम मेंटेनेंस का उद्देश्य: पत्नी/बच्चों को तत्काल राहत, पूर्ण ट्रायल से पहले।
– पति पर बोझ: आय का रीयलिस्टिक असेसमेंट (मिनिमम वेजेस अगर कम बताए)।
– पत्नी को फायदा: बिना सबूत के “स्वावलंबी” न ठहराया जाए।
पति–पत्नी के दावे: कौन सही?
पत्नी: पति की कुल आय ₹70,000+ (टीचर+ट्यूशन+किराया), ₹2500 अपर्याप्त।
पति: ₹10,000, पत्नी कमाती।
HC: पति ग्रेजुएट, UP मिनिमम वेजेस ₹13,200 मानें। बैंक स्टेटमेंट्स से क्रॉस-वेरिफाई न किया।
मिनिमम वेजेस कैसे तय?
UP में ग्रेजुएट/स्किल्ड वर्कर के लिए ₹13,200। HC ने कहा कि दावा इससे कम होने पर मिनिमम मानें। इससे कई मामलों में मेंटेनेंस बढ़ेगा।
भारतीय कानून में मेंटेनेंस: बेसिक्स
CrPC 125: पत्नी, बच्चे, माता-पिता को मेंटेनेंस।
– इंटरिम: तत्काल राहत।
– परमानेंट: ट्रायल के बाद।
– फैक्टर्स: आय, जीवनशैली, जरूरतें।
– सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस: 1/3 आय तक।
इस फैसले का असर: महिलाओं के लिए राहत
– इंटरिम स्टेज पर पति का “वह कमाती है” दावा कमजोर।
– कम पढ़े-लिखे महिलाओं को फायदा।
– मिनिमम वेजेस बेंचमार्क।
– ग्रामीण/शहरी मामलों में एकरूपता।
5 FAQs
- दिल्ली HC ने इंटरिम मेंटेनेंस पर क्या फैसला दिया?
इंटरिम स्टेज पर पत्नी को कमाने वाली मानना गलत; पति के बिना सबूत दावे को खारिज किया। - केस में मेंटेनेंस कितना बढ़ा?
फैमिली कोर्ट के ₹2500 से हाईकोर्ट ने ₹3500 मासिक किया। - पति की आय कैसे तय की गई?
ग्रेजुएट होने पर UP मिनिमम वेजेस ₹13,200 आधार लिया, दावा ₹10,000 से कम होने पर। - पत्नी के ‘नर्सरी टीचर’ दावे पर क्या कहा?
11वीं पास होने पर बिना प्रूफ के मानना गलत, प्रेसम्प्शन न किया जाए। - फैसले का असर क्या होगा?
इंटरिम मामलों में पत्नी को तत्काल राहत आसान, पति को आय साबित करनी पड़ेगी।
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