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नवंबर 2025 Masik Durga Ashtami देवी की उपासना, व्रत-पूजन और लाभ

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Masik Durga Ashtami puja.
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नवंबर 2025 की Masik Durga Ashtami की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, व्रत नियम और महत्त्व जानें। देवी कृपा पाने के लिए संपूर्ण मार्गदर्शन।

Masik Durga Ashtami: हर महीने आने वाला पवित्र दिन


मासिक दुर्गाष्टमी वह पावन तिथि है जो हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है। इस दिन भगवती के स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि जो भक्त इस दिन पूजा, व्रत और ध्यान करते हैं, उन्हें मानसिक शांति, संरक्षण और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है।

यह दिन साधक को आध्यात्मिक रूप से मजबूत करने वाला माना जाता है, और इसे वर्ष के सभी महीनों में समान महत्त्व के साथ मनाया जाता है।


नवंबर 2025 की मासिक दुर्गाष्टमी: तिथि और समय

  • तिथि: 28 नवंबर 2025
  • माह: मार्गशीर्ष
  • अष्टमी तिथि इस दिन सुबह से प्रभावी रहेगी और इसी अवधि में पूजा-व्रत करने का सबसे शुभ समय माना जाता है।
  • इस तिथि पर विशेष योग और पवित्र काल आने की संभावना रहती है, जो पूजा-पाठ के फल को और बढ़ा देता है।

भक्ति-परंपरा के अनुसार, श्रद्धा और सत्य भाव से किया गया पूजन किसी भी समय फलदायी माना गया है।


मासिक दुर्गाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व

मासिक दुर्गाष्टमी केवल एक व्रत या पर्व नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा की नकारात्मकता को शुद्ध करने का एक मार्ग है।

इस दिन देवी की उपासना करने से—

  • मन में स्थिरता आती है,
  • भय और चिंता कम होती है,
  • सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है,
  • घर-परिवार में सुख-शांति स्थापित होती है,
  • जीवन में अड़चनें धीरे-धीरे दूर होती हैं।

भक्त मानते हैं कि इस दिन की पूजा व्यक्ति को आत्मिक सुरक्षा और मानसिक सुदृढ़ता प्रदान करती है।


नवंबर 2025 की मासिक दुर्गाष्टमी: पूजा-विधि (घर पर कैसे करें)

1. स्नान और शुद्धि
सुबह स्नान करके स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें। पूजा-स्थल को अच्छे से साफ करें।

2. स्थापना
मां दुर्गा या शक्ति स्वरूप की तस्वीर/प्रतिमा को स्वच्छ स्थान पर लाल या पीले कपड़े पर स्थापित करें।
अगर आप चाहे, तो फूल, कलश, जल, चावल और दीपक जैसी सामग्री भी रख सकते हैं।

3. दीप-धूप और अर्पण
दीपक जलाकर धूप चलाएं। ताजे फूल, चावल, फल और साफ पानी अर्पित करें।
आप हल्दी, कुमकुम, अक्षत और लाल फूल भी अर्पित कर सकते हैं।

4. मंत्र-जप और स्तुति
भक्त इस दिन दुर्गा कवच, स्तुति या साधारण मंत्र का जाप करते हैं। जप संख्या आपकी श्रद्धा पर निर्भर है।

5. व्रत-पालन
मासिक दुर्गाष्टमी पर उपवास किया जाता है। कई लोग केवल फलाहार करते हैं, कुछ निर्जल या सादा जल-सेवन व्रत रखते हैं।
व्रत का उद्देश्य शरीर को नहीं, मन को अनुशासित करना होता है।

6. शाम की पूजा
शाम में पुनः दीपक जलाकर देवी को प्रसाद अर्पित किया जाता है। इस समय साधक शांत चित्त होकर प्रार्थना करते हैं।


व्रत के दौरान क्या करें — क्या न करें

क्या करें:

  • साफ-सफाई, संयम और शांत व्यवहार
  • पूजा, ध्यान, भजन-कीर्तन
  • दूसरों की सहायता, दया-भाव
  • सरल, पवित्र और सात्त्विक भोजन (यदि व्रत नहीं रख पा रहे हों)

क्या न करें:

  • झूठ, कठोरता, क्रोध
  • अत्यधिक तामसिक भोजन या नकारात्मक भाव
  • किसी प्रकार की हिंसा या कटुता
  • आसक्ति, आलस्य और दिखावा

Masik Durga Ashtamiव्रत के लाभ

1. मन की शांति
यह व्रत मानसिक स्थिरता देता है और मन को शांत करता है।

2. सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि
नियमित पूजा से नकारात्मकता दूर होती है।

3. आत्म-अनुशासन
व्रत शरीर और मन दोनों को नियंत्रित करने का माध्यम है।

4. आध्यात्मिक प्रगति
इस दिन ध्यान और भक्ति करने से साधक अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ा पाता है।

5. परिवार में सुख-शांति
पूजा का प्रभाव सिर्फ साधक पर नहीं, पूरे घर में सकारात्मकता फैलाता है।


नवंबर माह में मासिक दुर्गाष्टमी क्यों विशेष मानी जाती है?
मार्गशीर्ष माह को वैदिक धर्म में अत्यधिक पवित्र माना गया है। यह महीना साधना, पूजा, जप और मौन-ध्यान के लिए उपयुक्त है।
इस माह में अष्टमी का आना, भक्ति की ऊर्जा को और गहरा कर देता है।

इस समय की गई साधना और व्रत पूरे वर्ष के लिए शुभता प्रदान करने में सक्षम मानी जाती है।


FAQs

1. क्या Masik Durga Ashtami हर महीने एक ही दिन आती है?
नहीं, यह हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर आती है — तिथि में महीने-दर-महीने बदलाव होता है।

2. क्या इस दिन उपवास अनिवार्य है?
नहीं, लेकिन व्रत करने से मन और शरीर पर अधिक सकारात्मक प्रभाव माना गया है।

3. क्या घर पर सरल पूजा करने से भी फल मिलता है?
हाँ, मन की सच्ची श्रद्धा और पवित्रता सबसे महत्वपूर्ण है।

4. व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, दही, सूखे मेवे, सेंधा नमक वाला हल्का भोजन — अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार।

5. क्या पूजा सुबह ही करनी चाहिए?
सुबह सबसे शुभ मानी जाती है, मगर अष्टमी तिथि के दौरान किसी भी समय श्रद्धा से पूजा कर सकते हैं।

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