तेलंगाना के कामारेड्डी और हनामकोंडा में 7 दिनों में 500 सड़क कुत्तों को जहर देकर मार दिया। सरपंचों पर आरोप- चुनावी वादा पूरा करने को क्रूरता। पुलिस ने 15 पर केस, सुप्रीम कोर्ट सख्त। पूरी खबर।
तेलंगाना में 500 कुत्तों का कत्लेआम: पंचायत चुनावी वादा पूरा करने के नाम पर क्रूरता की हद!
तेलंगाना में सड़क कुत्तों का भयानक कत्लेआम: पंचायत चुनावी वादे के नाम पर 500 जानें ली गईं
तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों से दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। जनवरी के पहले दो हफ्तों में 500 से ज्यादा सड़क कुत्तों को जहर देकर या घातक इंजेक्शन देकर मार दिया गया। ये सबकुछ ग्राम पंचायत चुनावों में किए गए वादों को पूरा करने के नाम पर हुआ। कामारेड्डी और हनामकोंडा जिलों के गांवों में सरपंचों और उनके स्टाफ पर ये क्रूरता का आरोप है। पुलिस ने 15 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें 7 सरपंच शामिल हैं। वीडियो में कुत्तों को इंजेक्शन देकर गिरते देखा गया।
दरअसल, दिसंबर 2025 में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में कई उम्मीदवारों ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर ‘कुत्ता-बंदर समस्या’ हल करेंगे। ग्रामीणों को कुत्तों के काटने से परेशान देख कई जगह ‘डॉग-फ्री गांव’ का नारा दिया। जीत के बाद सरपंचों ने प्राइवेट ठेकेदारों को हायर किया। 6 जनवरी से शुरू होकर 13 जनवरी तक शयामपेट, अरपल्ली, भवानीपेट, पलवांचा, फरीदपेट जैसे गांवों में 500 कुत्ते मारे गए। लाशें गांव के बाहर दफन कीं, लेकिन पशु चिकित्सकों ने खुदवाकर पोस्टमॉर्टम किया।
कामारेड्डी जिले के पलवांचा मंडल में पांच सरपंचों पर सबसे ज्यादा आरोप। एनिमल एक्टिविस्ट अदुलपुरम गौतम ने 12 जनवरी को मचरेड्डी थाने में शिकायत की। उन्होंने कहा, दो-तीन दिनों में 200 कुत्ते मारे गए। भवानीपेट में लाशें पड़ी मिलीं। पुलिस ने बीएनएस की धारा 325 और प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट के तहत 6 पर केस किया- 5 सरपंच और 1 ठेकेदार। हनामकोंडा में 9 नामजद- 2 महिला सरपंच, उनके पति, ग्राम सचिव। वहां 300 कुत्ते मारे गए।
पोस्टमॉर्टम से विषाक्त पदार्थ की पुष्टि। फॉरेंसिक लैब में विसेरा सैंपल भेजे। वीडियो में साफ दिखा- कुत्ता इंजेक्शन लेते ही एक मिनट में गिर पड़ा। ग्रामीण खुश हैं कि समस्या कम हुई, लेकिन एनजीओ और एक्टिविस्ट सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को कहा- कुत्तों के काटने पर राज्यों को भारी मुआवजा देना चाहिए, फीडरों को जिम्मेदार ठहराएं। ABC रूल्स (एनिमल बर्थ कंट्रोल) 2023 का पालन न होने पर फटकार। किलिंग गैरकानूनी है, स्ट्रलाइजेशन-वैक्सीनेशन जरूरी।
सरपंचों का पक्ष क्या? एक सरपंच ने एनडीटीवी को बताया, ‘गांववाले परेशान थे। रोज काटने से बच्चे डरते। हमने वादा किया था।’ लेकिन कानून साफ है- सरकारी निर्देश बिना किलिंग प्रतिबंधित। तेलंगाना सरकार ने सभी डीएम को 2023 ABC रूल्स सख्ती से लागू करने का मेमो जारी किया। ठेकेदारों ने जहर वाली डाइट और इंजेक्शन इस्तेमाल किए। पुलिस नोटिस जारी, पूछताछ तेज।
सड़क कुत्तों की समस्या क्यों बढ़ी? भारत में 6 करोड़ स्ट्रे डॉग्स हैं। तेलंगाना में पिछले साल 20% बढ़ोतरी। ग्रामीण इलाकों में कचरा, खुले में शौच से आकर्षण। कुत्तों के काटने से रेबीज से सालाना 20 हजार मौतें। WHO कहता है- 70% वैक्सीनेशन से कंट्रोल। आयुष्मान भारत में फ्री वैक्सीन, लेकिन लागू नहीं। केरल, बेंगलुरु में सफल ABC प्रोग्राम।
कानूनी प्रावधान
- प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट 1960: जहर देना 3 महीने जेल या 50 रुपये जुर्माना।
- BNS धारा 325: जानवर मारना 2 साल तक सजा।
- ABC रूल्स 2023: सिर्फ स्ट्रलाइजेशन, रिलोकेशन नहीं।
- सुप्रीम कोर्ट: किलिंग नहीं, मैनेजमेंट।
प्रभावित गांव और संख्या
| जिला | गांव | कुत्ते मारे गए | आरोपी |
|---|---|---|---|
| हनामकोंडा | शयामपेट, अरपल्ली | 300 | 9 (2 महिला सरपंच सहित) |
| कामारेड्डी | भवानीपेट, पलवांचा, फरीदपेट, वाड़ी, बंदारमेश्वरपल्ली | 200 | 6 (5 सरपंच सहित) |
| कुल | – | 500+ | 15 |
घटनाक्रम समयरेखा
- दिसंबर 2025: ग्राम पंचायत चुनाव, ‘डॉग-फ्री’ वादे।
- 6 जनवरी 2026: हनामकोंडा में शुरू।
- 12 जनवरी: एक्टिविस्ट शिकायत।
- 13 जनवरी: पुलिस केस, सुप्रीम कोर्ट फटकार।
- अब: फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) ने तेलंगाना सरकार को नोटिस भेजा। PETA ने कंडेम्न किया। ग्रामीणों में दो गुट- एक कुत्तों के हक में, दूसरे खुश। विशेषज्ञ कहते हैं- समस्या स्ट्रलाइजेशन से हल। बैंगलोर में 80% कम हुए हमले। तेलंगाना में 1000 करोड़ का बजट है ABC के लिए, लेकिन खर्च 10%।
सरकारी कदम
- डीएम को सर्कुलर: ABC सेंटर्स खोलें।
- वैक्सीनेशन ड्राइव।
- NGO से साझेदारी।
लेकिन जागरूकता कम।
समाज पर असर
- बच्चों में डर कम, लेकिन क्रूरता सिखा।
- कानून का डर।
- मीडिया कवरेज से बहस।
कुत्तों के काटने से बचाव के टिप्स
- कचरा बंद करें।
- स्ट्रे को न खिलाएं।
- काटने पर PEP वैक्सीन लें।
- स्थानीय ABC रिपोर्ट करें।
आयुर्वेदिक नजरिए से कुत्ते दोस्त, लेकिन रेबीज घातक। हनुमान चालीसा पढ़ने वाले भक्तों में विश्वास। लेकिन कानून सर्वोपरि।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा- ‘इंस्टीट्यूशनल फेलियर’। तेलंगाना सरकार फंस गई। ग्रामीण वोटर खुश, एनिमल लवर्स गुस्से में। क्या ये सुधार लाएगा? ABC प्रोग्राम तेज करना होगा। निर्दोष जानों की हत्या से वादे पूरे नहीं होते।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- तेलंगाना में कितने सड़क कुत्ते मारे गए?
500 से ज्यादा, 7-10 दिनों में। हनामकोंडा में 300, कामारेड्डी में 200। - सरपंचों ने ऐसा क्यों किया?
ग्राम पंचायत चुनाव में ‘डॉग-फ्री गांव’ का वादा। ग्रामीणों की कुत्तों के काटने की शिकायत पर। - पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
15 पर FIR- 7 सरपंच, स्टाफ, ठेकेदार। BNS 325 और PCA एक्ट। नोटिस जारी। - सुप्रीम कोर्ट का स्टैंड क्या?
किलिंग गैरकानूनी। ABC रूल्स लागू करें। काटने पर मुआवजा, फीडर जिम्मेदार। - कुत्तों की समस्या कैसे हल करें?
स्ट्रलाइजेशन-वैक्सीनेशन। कचरा मैनेजमेंट। NGO हेल्प। किलिंग नहीं।
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