हावड़ा-कामाख्या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सिर्फ वेज मेन्यू, नॉन-वेज नहीं। TMC बोली- बंगाली मछली-भात संस्कृति पर हमला। यात्रियों ने खाने की क्वालिटी पर शिकायत। बीजेपी ने ठहराया रेलवे पर। विवाद की पूरी कहानी।
पहली वंदे भारत स्लीपर में नॉन-वेज गायब: बंगाल-असम रूट पर खाने का बवाल क्यों?
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का वेज-ओनली मेन्यू: TMC-BJP भिड़े, यात्रियों ने खाने की क्वालिटी पर लगाई फरियाद
देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन हावड़ा-कामाख्या रूट पर शुरू हुई, लेकिन पहले ही सफर में खाने को लेकर बवाल मच गया। मेन्यू में सिर्फ शाकाहारी व्यंजन, नॉन-वेज का नामोनिशान नहीं। तृणमूल कांग्रेस ने इसे बंगाली संस्कृति पर हमला बताया, तो बीजेपी ने पलटवार किया। यात्रियों ने भी सोशल मीडिया पर खाने की खराब क्वालिटी और कम मात्रा की शिकायत की।
ट्रेन का पहला कमर्शियल रन शुक्रवार को हुआ। मेन्यू में बासंती पुलाव, चोला डाल, जोहराइस, माटी मोहर, संदेश, नारियल बर्फी, रसगुल्ला जैसे पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन। गुवाहाटी के मेफेयर स्प्रिंग वैली रिसॉर्ट ने आईआरसीटीसी संग मिलकर तैयार किया। लेकिन बंगाल-असम रूट पर मछली-मांस खाने वाले यात्रियों को ये पसंद नहीं आया। टीएमसी के कुणाल घोष बोले, ‘बंगाली मछली-भात पर जिंदा है। वेज-नॉनवेज दोनों होने चाहिए, यात्रियों को चुनाव का हक मिले।’
टीएमसी ने इसे शाकाहार थोपने की साजिश कहा। सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, ‘बंगाल-असम जोड़ने वाली ट्रेन पर नॉन-वेज क्यों नहीं? ये सांस्कृतिक पहचान पर हमला।’ यात्रियों ने बताया कि दूसरे वंदे भारत में ‘नो फूड’ ऑप्शन होता है, यहां नहीं। पैकेज लिया तो वही मिला जो मेन्यू में। बीजेपी के समिक भट्टाचार्य ने कहा, ‘नॉन-वेज चाहिए तो रेलवे से बोलें, बीजेपी का क्या लेना-देना? टीएमसी ने खुद मिड-डे मील से नॉन-वेज हटाया था।’
यात्रियों की शिकायतें सोशल मीडिया पर वायरल। एक ने उद्घाटन सफर का शानदार खाना दिखाया, फिर कमर्शियल रन का सादा। कामाख्या-हावड़ा 3एसी में सफर करने वाले ने लिखा, ‘खाना खराब। डाल नहीं मिली (कहा ट्रेन चलते ही गिर गई)। चावल ओवरकुक, पनीर गायब, सब्जी कच्ची बिना मसाले। रोटी सख्त। सिर्फ दही और मिठाई ठीक। मात्रा कम।’ दूसरे ने कहा, ‘डिनर मिला, चाय-नाश्ता नहीं।’
एक यूजर ने लिखा, ‘प्रीमियम ब्रांडिंग लेकिन बेसिक सर्विस जीरो। स्टाफ कन्फ्यूजन, कुछ को खाना नहीं मिला, बेडशीट खत्म।’ गुवाहाटी बेस किचन आईआरसीटीसी की खिचाई हुई। उद्घाटन में स्पेशल खाना, बाद में घटिया। ट्रेन नई लेकिन कैटरिंग पुरानी समस्या।
वंदे भारत स्लीपर का बैकग्राउंड। हावड़ा-कामाख्या 1000+ किमी। स्लीपर कोच में 4एसी, 3एसी, 3ई। प्रीमियम, तेज, आरामदायक। लेकिन खाना हमेशा विवाद में। पहले भी वेज-नॉनवेज, क्वालिटी पर बात हुई। रेल मंत्री ने वंदे भारत को देश का गौरव बताया। लेकिन ये विवाद ने पहली स्लीपर को कटघरे में ला खड़ा किया।
राजनीतिक रंग क्यों? बंगाल में 2026 चुनाव नजदीक। टीएमसी बीजेपी पर संस्कृति का मुद्दा बनाती। बीजेपी पलटवार। मिड-डे मील में अंडा हटाने का पुराना किस्सा। रेलवे चुप। आईआरसीटीसी ने अबतक स्टेटमेंट नहीं दिया। क्या नॉन-वेज जोड़ेगी?
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- वंदे भारत स्लीपर में नॉन-वेज क्यों नहीं?
मेन्यू रीजनल वेज पर फोकस। मेफेयर रिसॉर्ट ने बनाया। नो-फूड ऑप्शन भी नहीं। - TMC ने क्या कहा?
शाकाहार थोपना, बंगाली संस्कृति पर हमला। मछली-भात दो। - बीजेपी का जवाब?
रेलवे का मामला, हमसे नहीं। टीएमसी ने मिड-डे मील से नॉन-वेज हटाया। - यात्रियों की मुख्य शिकायत?
खराब क्वालिटी, कम मात्रा, डाल-पनीर गायब, रोटी सख्त। चाय नहीं मिली। - ट्रेन कब शुरू हुई?
पहला कमर्शियल रन शुक्रवार को हावड़ा-कामाख्या। स्लीपर देश की पहली।
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