पीएम मोदी के लेख से चर्चित के. एम. मुंशी की ‘सोमनाथ: द श्राइन इटरनल’ – मंदिर के पौराणिक इतिहास, आक्रमणों, पुरातत्व और पुनर्निर्माण की पूरी कहानी। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के बीच क्यों पढ़ें यह किताब?
1000 साल पुराना राज: पीएम मोदी ने क्यों याद दिलाई मुंशी की ‘सोमनाथ: द श्राइन इटरनल’?
के. एम. मुंशी कौन थे और किताब क्यों लिखी?
के. एम. मुंशी गुजरात के एक प्रमुख राजनीतिक नेता, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें गुजरात का गौरव माना जाता है। वे भारतीय संविधान सभा के सदस्य रहे, बBombay राज्य के गृह मंत्री बने और भारतीय विद्या भवन के संस्थापक थे। मुंशीजी ने इतिहास, संस्कृति और उपन्यासों पर दर्जनों किताबें लिखीं, जिनमें गुजराती में ‘पाटण नी प्रभुता’, ‘जय सोमनाथ’, ‘गुजरात नो नाथ’, ‘भग्न पादुका’ और ‘कृष्णावतार’ (7 भाग) प्रमुख हैं।
‘सोमनाथ: द श्राइन इटरनल’ (Somanatha: The Shrine Eternal) मुंशीजी की 1951 में लिखी अंग्रेजी किताब है, जो भारतीय विद्या भवन की ‘बुक्स यूनिवर्सिटी’ सीरीज का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति के मूल्यों को आधुनिक ज्ञान से जोड़ना था। मुंशीजी ने इसे मंदिर के पुनर्निर्माण और ज्योतिर्लिंग प्रतिष्ठा के मौके पर मई 1951 में लिखा। उन्होंने खुद कहा कि विद्वान न होने के बावजूद, भक्त और इतिहास प्रेमी के रूप में इसे जल्दी पूरा किया, ताकि सोमनाथ का इतिहास लोगों तक पहुंचे।
किताब का उद्देश्य और संदेश
मुंशीजी के अनुसार, यह किताब उच्च शिक्षा और मूल्यों का प्रसार करती है। यह मानव गरिमा को बनाए रखने, नैतिक व्यवस्था स्थापित करने और व्यक्ति को दिव्य बनने में मदद करती है। सोमनाथ को ‘अनंत ज्योति’ कहकर भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा गया है। जैसे गंगा पहाड़ों से निकलकर समुद्र तक पवित्र रहती है, वैसे सोमनाथ संघर्षों के बावजूद अमर रहा। यह किताब केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारतीयों की अटूट आस्था का प्रतीक है।
पीएम मोदी के लेख में इसका जिक्र सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के संदर्भ में हुआ, जहां 1026 ई. में गजनवी के हमले के 1000 साल पूरे होने पर मंदिर की अमरता पर चर्चा हुई।
किताब की संरचना: चार मुख्य भाग
किताब चार भागों में बंटी है, जो सोमनाथ की पूरी यात्रा बयां करती है:
- भाग 1: पौराणिक कथाएं और इतिहास – सोमनाथ को सोम का स्वामी बताते हुए प्रभास क्षेत्र का महत्व, भगवान कृष्ण के अंतिम संस्कार स्थल का उल्लेख।
- भाग 2: ‘रोमांस इन स्टोन’ – पत्थरों में तराशी वास्तुकला का वर्णन।
- भाग 3: पुरातात्विक खुदाई के प्रमाण – बी.के. थापर की खुदाई से मिले प्राचीन मंदिरों के अवशेष, शिलालेख और मूर्तियां।
- भाग 4: मुस्लिम इतिहासकारों और शिलालेखों के विवरण।
किताब में स्केच, फोटो और नई संस्करणों में कैलाश महामेरु प्रसाद (155 फुट ऊंचा नया मंदिर) का विवरण भी है।
सोमनाथ के आक्रमणों का विवरण
मुंशीजी ने किताब में सोमनाथ पर हुए आक्रमणों का विस्तृत वर्णन किया – 1025 में महमूद गजनवी का हमला, जहां मंदिर लूटा गया; अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब काल के विध्वंस। इसे केवल भवन का नाश नहीं, बल्कि आघात बताया। फिर भी, फीनिक्स की तरह बार-बार पुनर्निर्मित।
आधुनिक पुनर्निर्माण की कहानी
किताब का बड़ा हिस्सा आधुनिक पुनरुद्धार पर है। 13 नवंबर 1947 को सरदार पटेल ने समुद्र की ओर देखते खंडहरों पर शपथ ली। मुंशीजी ने इसे भारत की गरिमा की बहाली कहा। 1950–51 में नया मंदिर चालुक्य शैली में बनाया गया, जिसका प्राण-प्रतिष्ठा तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया।
क्यों पढ़ें यह किताब?
यह किताब इतिहासकारों, छात्रों और सोमनाथ भक्तों के लिए अनमोल है। पुरातत्व, वास्तुकला, आस्था और संघर्ष की कहानी एक साथ। पीएम मोदी के जिक्र से सोशल मीडिया पर डाउनलोड और चर्चा बढ़ी। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के बीच इसे पढ़ना विशेष प्रासंगिक है।
सोमनाथ मंदिर: तथ्य और महत्व
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | प्रभास क्षेत्र, गुजरात (समुद्र तट) |
| ज्योतिर्लिंग | 12 में से पहला |
| प्रमुख आक्रमण | 1025 गजनवी, खिलजी, औरंगजेब |
| पुनर्निर्माण | 1951 (पटेल-मुंशी प्रयास) |
| ऊंचाई | कैलाश महामेरु प्रसाद 155 फुट |
मुंशीजी की अन्य प्रमुख रचनाएं
- गुजराती: पाटण नी प्रभुता, जय सोमनाथ, गुजरात नो नाथ
- कृष्णावतार: 7 भागों में महाभारत कालीन कथा
- इतिहास: गुजरात और भारत की संस्कृति पर
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व
यह पर्व सोमनाथ की अमरता का उत्सव है, जहां 1000 साल के संघर्ष के बावजूद आस्था की जीत दिखाई जाती है। पीएम मोदी ने लेख में मुंशीजी के योगदान को याद किया।
5 (FAQs)
- सवाल: पीएम मोदी ने किताब का जिक्र क्यों किया?
जवाब: सोमनाथ पर गजनवी के 1000 साल पुराने हमले के संदर्भ में, मुंशीजी की किताब का उल्लेख आस्था और पुनर्निर्माण की कहानी बताने के लिए। - सवाल: किताब कब और क्यों लिखी गई?
जवाब: 1951 में मंदिर पुनर्निर्माण और ज्योतिर्लिंग प्रतिष्ठा पर, भारतीय विद्या भवन की सीरीज में। - सवाल: किताब के मुख्य भाग कौन-कौन से हैं?
जवाब: पौराणिक इतिहास, वास्तुकला, पुरातत्व खुदाई, मुस्लिम इतिहासकारों के विवरण। - सवाल: सोमनाथ पर प्रमुख आक्रमण कब हुए?
जवाब: 1025 में महमूद गजनवी, फिर अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब काल में। - सवाल: पुनर्निर्माण कब हुआ?
जवाब: 1947 में पटेल की शपथ से शुरू, 1951 में राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रतिष्ठा।
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