रांची । कैंपस में जातीय भेदभाव के खिलाफ कानून बनाने और रोहित एक्ट की तर्ज पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की गाइडलाइंस को सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू करने की मांग को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) झारखंड ने शुक्रवार को रांची में विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अखिल भारतीय प्रतिवाद आयोजित किया गया। प्रतिवाद में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड धनंजय ने कहा कि आइसा UGC के उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026 का स्वागत करती है, लेकिन इसके साथ यह मांग भी करती है कि इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में रोहित एक्ट की तर्ज पर ठोस गाइडलाइंस लागू की जाएं और कैंपस में जातीय भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह कहकर रोक लगाना कि कैंपस में अब जातीय उत्पीड़न नहीं है, बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी की संस्थानिक हत्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी छात्रों का पढ़ाई छोड़ना और आत्महत्या करना गंभीर सामाजिक संकट है।
आइसा झारखंड की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में सभी मानदंड पूरे करने के बावजूद छात्रों को “एनएफएस (योग्य उम्मीदवार नहीं मिला)” बताकर बाहर किया जा रहा है, जिसका सीधा असर अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े समुदायों के छात्रों पर पड़ता है।
वहीं राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने कहा कि आज भी कैंपस में जातीय भेदभाव के साथ-साथ नस्लीय भेदभाव भी मौजूद है। उन्होंने हाल ही में एंजेल चकमा की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें चीनी नस्ल का समझकर पीट-पीटकर मार दिया गया। उन्होंने सभी समुदायों के न्यायप्रिय लोगों से सख्त कानून बनाने और जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
प्रदर्शन में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय, राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप, राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ के अलावा स्नेहा महतो, रितेश मिश्रा, विजय कुमार, संजना मेहता, जयजीत मुखर्जी, सुशील मुर्मू समेत झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत आइसा के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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