राजनाथ सिंह ने उदयपुर में भाषण के दौरान दिल्ली रेड किला सUICIDE कार ब्लास्ट का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि ‘व्हाइट कॉलर टेररिज्म’ बढ़ रहा है, जहां डॉक्टर जैसे highly educated लोग भी आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को भी गढ़े, खासकर ऐसे समय में जब AI और मशीन लर्निंग चौथी औद्योगिक क्रांति को गति दे रहे हैं।
शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं: राजनाथ सिंह ने डॉक्टर आतंकियों का उदाहरण देकर क्यों कहा – ‘चरित्र और संस्कार जरूरी’
राजनाथ सिंह की दोहरी चेतावनी: डॉक्टरों वाला दिल्ली ब्लास्ट, ‘व्हाइट कॉलर टेररिज्म’ और AI के युग में शिक्षा की नई कसौटी
देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में उदयपुर में दिए गए एक भाषण में दो बेहद संवेदनशील मुद्दों को एक साथ जोड़ा – दिल्ली के रेड किला इलाके में हुआ सUICIDE कार बम हमला, जिसे डॉक्टरों ने अंजाम दिया, और तेजी से बढ़ रही “व्हाइट कॉलर टेररिज्म” की प्रवृत्ति। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अब आतंकवादी नेटवर्क में सिर्फ निचले आर्थिक तबके के नहीं, बल्कि highly educated प्रोफेशनल्स, जैसे डॉक्टर, भी शामिल हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने चौथी औद्योगिक क्रांति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के दौर में शिक्षा से “चरित्र, नैतिकता और मानवीयता” पर फोकस बढ़ाने की अपील की।
दिल्ली रेड किला ब्लास्ट: डॉक्टरों की आतंक में एंट्री
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के रेड किला के पास हुए SUICIDE कार बम ब्लास्ट का जिक्र किया। इस हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए थे। इस आतंकी हमले को डॉ उमर उन नबी नामक सUICIDE कार बॉम्बर ने अंजाम दिया। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जांच के दौरान इस मामले में और भी highly educated लोगों की संलिप्तता उजागर की।
NIA ने तीन और डॉक्टरों – डॉ मुज़म्मिल शकील गनई, डॉ अदील अहमद और डॉ शाहीन सईद – को भी इस ब्लास्ट में कथित शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया। यानी पूरा मॉड्यूल डॉक्टरों और पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स से जुड़ा हुआ सामने आया। राजनाथ सिंह ने इस उदाहरण को उद्धृत करते हुए कहा, “दिल्ली में बम ब्लास्ट किसने किया? डॉक्टरों ने…।” उनके इस सवाल के जरिए संदेश था कि अब आतंकवाद की तस्वीर पहले जैसी नहीं रही, जहां केवल कम पढ़े-लिखे या बेरोजगार युवा शामिल दिखते थे।
‘व्हाइट कॉलर टेररिज्म’ क्या है? राजनाथ का संकेत
अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने “white-collar terrorism” शब्द का इस्तेमाल किया। आम तौर पर “white-collar crime” उन आर्थिक या कॉर्पोरेट अपराधों के लिए कहा जाता है जो सूट-बूट पहने, ऑफिस में काम करने वाले लोग करते हैं। लेकिन “white-collar terrorism” का मतलब है – ऐसे आतंकवादी या अपराधी, जो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल जैसे highly educated और सम्मानजनक माने जाने वाले वर्ग से आते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज एक चिंताजनक ट्रेंड दिख रहा है, जिसमें “highly educated individuals act against society and the nation” यानी अत्यधिक शिक्षित लोग भी समाज और राष्ट्र के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने डॉक्टरों से जुड़े दिल्ली ब्लास्ट को इसी तरह के व्हाइट कॉलर टेररिज्म की मिसाल बताया। उनका संदेश साफ था – सिर्फ पढ़ाई और डिग्री काफी नहीं हैं, अगर शिक्षा व्यक्ति के भीतर नैतिक जिम्मेदारी और देश के प्रति प्रतिबद्धता नहीं भरती।
“सिर्फ ज्ञान नहीं, विनम्रता और चरित्र भी जरूरी” – शिक्षा पर कड़ा संदेश
राजनाथ सिंह ने उदयपुर के भूपाल नोबल यूनिवर्सिटी के 104वें स्थापना दिवस पर बोलते हुए शिक्षा की मौजूदा दिशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कोई भी शिक्षा प्रणाली जो केवल ज्ञान दे और विनम्रता, चरित्र और नैतिक मूल्य न दे, वह सफल नहीं मानी जा सकती।” उनके मुताबिक, आज उच्च शिक्षा प्राप्त लोग भी अपराधों में शामिल हो रहे हैं, इसलिए हमारे लिए यह आत्म-मंथन का विषय है कि हम कैसी शिक्षा दे रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रोफेशनल सक्सेस यानी अच्छी नौकरी, ऊंची सैलरी या पद नहीं होना चाहिए, बल्कि “good conduct, ethics, and a humane personality” यानी अच्छे आचरण, नैतिकता और मानवीय व्यक्तित्व का विकसित होना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसी शिक्षा ही समाज में सौहार्द और सामंजस्य ला सकती है।
चौथी औद्योगिक क्रांति, AI और नैतिकता का सवाल
रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि भारत इस समय “Fourth Industrial Revolution” का साक्षी है। उनका इशारा उन टेक्नोलॉजी बदलावों की ओर था जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और अन्य उन्नत तकनीकों की मदद से हमारी जिंदगी और काम करने के तरीके बदल रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम चौथी औद्योगिक क्रांति देख रहे हैं… आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और कई तकनीकें हमारी जिंदगी और काम करने के तरीके को बदल रही हैं।”
इस संदर्भ में राजनाथ सिंह का तर्क यह था कि जब टेक्नोलॉजी इतनी शक्तिशाली हो चुकी है कि वह सोसायटी, इकोनॉमी और सिक्योरिटी तीनों को एक साथ प्रभावित कर सकती है, तब शिक्षा के भीतर नैतिकता और वैल्यूज़ का होना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें गलत हाथों में या गलत विचारधारा वाले highly educated लोगों के हाथों में चली जाएं तो नुकसान बहुत गंभीर हो सकता है।
उदयपुर का मंच, राष्ट्रीय संदेश
राजनाथ सिंह ने यह बातें राजस्थान के उदयपुर में स्थित भूपाल नोबल यूनिवर्सिटी के 104वें फाउंडेशन डे कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने वहां छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थान केवल डिग्री बांटने वाले केंद्र न बनें, बल्कि “चरित्र निर्माण” के केंद्र बनें।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने प्रोफेशनल लक्ष्य तय करते समय समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी ध्यान में रखें। उनके मुताबिक, अगर कोई डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक उच्च ज्ञान तो रखता है, लेकिन उसके भीतर मानवीयता और नैतिकता नहीं है, तो उसका ज्ञान समाज के लिए नुकसानदायक भी बन सकता है।
व्हाइट कॉलर टेररिज्म से निपटने के लिए क्या जरूरी है?
राजनाथ सिंह के संदेश से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब आतंकवाद की नई परतों पर भी नजर रख रही हैं। सिर्फ सीमा पार से आने वाले आतंकियों या क्लासिकल मॉड्यूल पर फोकस नहीं, बल्कि उन “नेटवर्क्स” पर भी, जिनमें highly educated लोग, डिजिटल टूल्स और फाइनेंसियल सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है।
ऐसे परिदृश्य में जरूरी कदम कुछ इस तरह दिखते हैं:
– शिक्षा पाठ्यक्रम में एथिक्स, संविधान, मानवाधिकार और साइबर जिम्मेदारी जैसे विषयों को मजबूती से शामिल करना।
– प्रोफेशनल कोर्स (MBBS, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट) में “medical ethics”, “engineering ethics” और “professional conduct” को प्रैक्टिकल केस स्टडी के साथ पढ़ाना।
– सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कट्टरपंथीकरण (radicalisation) के प्रयासों के खिलाफ काउंटर-नैरेटिव और काउंसलिंग सिस्टम विकसित करना।
– समाज में यह संदेश फैलाना कि आतंकवादी या चरमपंथी सोच केवल कम पढ़े-लिखों की समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा से अलग हुई नैतिकता की भी समस्या है।
युवाओं के लिए संदेश: डिग्री + दिशा
इस पूरे भाषण की सबसे बड़ी बात यह थी कि राजनाथ सिंह ने सीधे-सीधे युवाओं और शिक्षा प्रणाली को संबोधित करते हुए कहा कि “This forces us to engage in self-reflection” – यानी यह स्थिति हमें आत्म-चिंतन के लिए मजबूर करती है। उन्होंने कहा, शिक्षा का मकसद सिर्फ प्रोफेशनल सक्सेस नहीं, बल्कि अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
उनका यह संदेश खास तौर पर AI और नई टेक्नोलॉजी के जमाने में पढ़ने–लिखने वाली नई पीढ़ी के लिए है, जो एक क्लिक में दुनिया की किसी भी जानकारी तक पहुंच सकती है, लेकिन उसी क्लिक से गलत विचारधाराओं और खतरनाक नेटवर्क्स के असर में भी आ सकती है। ऐसे समय में “values + knowledge” का संतुलन ही व्हाइट कॉलर टेररिज्म जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ सबसे मजबूत ढाल बन सकता है।
5 FAQs
- राजनाथ सिंह ने “व्हाइट कॉलर टेररिज्म” शब्द किस संदर्भ में प्रयोग किया?
उन्होंने दिल्ली के रेड किला इलाके में 10 नवंबर 2025 को हुए सUICIDE कार बम ब्लास्ट का उदाहरण देकर कहा कि अब अत्यधिक शिक्षित लोग, जैसे डॉक्टर, भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं, इसे ही उन्होंने “white-collar terrorism” कहा। - दिल्ली ब्लास्ट मामले में किस-किस पर आरोप है?
NIA ने सUICIDE कार बम हमले के मुख्य आरोपी डॉ उमर उन नबी के अलावा तीन और डॉक्टर – डॉ मुज़म्मिल शकील गनई, डॉ अदील अहमद और डॉ शाहीन सईद – को कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया है। - राजनाथ सिंह ने शिक्षा प्रणाली के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कोई भी शिक्षा प्रणाली जो केवल ज्ञान दे और विनम्रता, चरित्र और नैतिक मूल्य न दे, वह सफल नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य प्रोफेशनल सफलता के साथ-साथ अच्छे आचरण, नैतिकता और मानवीय व्यक्तित्व का निर्माण भी होना चाहिए। - चौथी औद्योगिक क्रांति और AI पर उनका मुख्य संदेश क्या था?
उन्होंने कहा कि देश चौथी औद्योगिक क्रांति का साक्षी है, जहां AI, मशीन लर्निंग और अन्य तकनीकें हमारी जिंदगी और काम के तरीके बदल रही हैं। ऐसे में टेक्नोलॉजी के साथ-साथ नैतिकता और मूल्यों पर आधारित शिक्षा बेहद जरूरी है। - यह भाषण कहाँ और किस अवसर पर दिया गया?
राजनाथ सिंह ने ये बातें राजस्थान के उदयपुर में भूपाल नोबल यूनिवर्सिटी के 104वें फाउंडेशन डे समारोह में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहीं।
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