राजस्थान सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में रोज़ सुबह 10 मिनट अखबार पढ़ना अनिवार्य किया। हिंदी-अंग्रेजी अखबारों से GK, वोकैबुलरी और करेंट अफेयर्स सीखेंगे बच्चे। रोज़ 5 नए शब्द सीखना होगा। UP के बाद राजस्थान की पहल।
राजस्थान सरकारी स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य: 10 मिनट रोज़ सुबह, शब्द भंडार बढ़ेगा!
राजस्थान सरकारी स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य: रोज़ 10 मिनट, 5 नए शब्द सीखो
राजस्थान सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में छात्रों के बीच पढ़ने की आदत, शब्द भंडार और सामान्य जागरूकता बढ़ाने के लिए रोज़ अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के 31 दिसंबर के आदेश के अनुसार, सुबह की प्रार्थना सभा में कम से कम 10 मिनट अखबार पढ़ना होगा। ये कदम छात्रों को करेंट अफेयर्स से जोड़ने, खबरों को समझने-विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखता है।
आदेश में कहा गया कि सीनियर सेकेंडरी स्कूलों और इंग्लिश मीडियम स्कूलों को कम से कम दो अखबार – एक हिंदी और एक अंग्रेजी – लेने होंगे। अपर प्राइमरी स्कूलों में कम से कम दो हिंदी अखबार उपलब्ध कराने होंगे। खर्च राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद, जयपुर वहन करेगा।
रोज़ की गतिविधियां: अखबार से क्या-क्या?
स्कूलों को निर्देश हैं कि रोज़ अखबार से 5 नए शब्द चुनें और छात्रों को उनके अर्थ समझाएं। सुबह की सभा में एक राष्ट्रीय स्तर का हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार ज़ोर से पढ़ा जाएगा। छात्रों को कक्षा-वार बांटकर एडिटोरियल, प्रमुख राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरें और खेल समाचारों पर चर्चा करनी होगी।
ये प्रोग्राम छात्रों के सामान्य ज्ञान, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद करेगा। अधिकारी मानते हैं कि इससे छात्रों की पढ़ने की आदत पड़ेगी, भाषा कौशल मजबूत होगा।
राजस्थान के सरकारी स्कूल: कितने प्रभावित?
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की संख्या 80,000 से ज्यादा है, जिसमें करोड़ों छात्र पढ़ते हैं। ये पहल ग्रामीण और शहरी स्कूलों में एक साथ लागू होगी। परिषद द्वारा अखबारों का खर्च वहन करने से वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
| स्कूल प्रकार | न्यूनतम अखबार | मुख्य फोकस |
|---|---|---|
| सीनियर सेकेंडरी / इंग्लिश मीडियम | 1 हिंदी + 1 अंग्रेजी | एडिटोरियल, इंटरनेशनल न्यूज़ |
| अपर प्राइमरी | 2 हिंदी | बेसिक न्यूज़, 5 शब्द |
UP के बाद राजस्थान: स्कूलों में न्यूज़ कल्चर
ये कदम उत्तर प्रदेश के एक हफ्ते पहले के आदेश से प्रेरित लगता है, जहां भी सरकारी स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य किया गया। दोनों राज्यों में फोकस छात्रों को डिजिटल युग में भी प्रिंट मीडिया से जोड़ना, फेक न्यूज़ से बचाना और क्रिटिकल थिंकिंग सिखाना है।
राजस्थान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि ये पहल “छात्रों को दुनिया से जोड़ेगी”। इससे बोर्ड एग्जाम के अलावा UPSC, SSC जैसी परीक्षाओं के लिए भी फायदा।
फायदे: पढ़ाई पर असर
- शब्द भंडार: रोज़ 5 शब्द से साल में 1,800 नए शब्द।
- GK: करेंट अफेयर्स से अपडेट रहना।
- क्रिटिकल थिंकिंग: एडिटोरियल डिस्कशन से विश्लेषण क्षमता।
- पढ़ने की आदत: 10 मिनट रोज़ से लाइफलॉन्ग स्किल।
अध्ययन बताते हैं कि ऐसी गतिविधियां छात्रों के भाषा स्कोर 15-20% सुधारती हैं।
चुनौतियां और सुझाव
ग्रामीण स्कूलों में अखबार पहुंच की समस्या हो सकती, लेकिन परिषद इसे संभालेगी। शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर डिस्कशन को प्रभावी बनाना जरूरी। डिजिटल न्यूज़ ऐप्स के साथ हाइब्रिड मॉडल भी सोचा जा सकता।
राजस्थान की ये पहल अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगी।
5 FAQs
- राजस्थान सरकारी स्कूलों में अखबार पढ़ना कब से अनिवार्य?
31 दिसंबर 2025 के आदेश से तुरंत लागू। सुबह प्रार्थना सभा में रोज़ 10 मिनट। - कौन से अखबार लेने होंगे?
सीनियर स्कूल: 1 हिंदी + 1 अंग्रेजी। अपर प्राइमरी: 2 हिंदी। खर्च शिक्षा परिषद वहन करेगी। - रोज़ क्या करना होगा?
5 नए शब्द चुनकर अर्थ समझाना, एडिटोरियल/खबरें पढ़ना-चर्चा करना। - इस पहल का उद्देश्य क्या?
पढ़ने की आदत, वोकैबुलरी, GK, करेंट अफेयर्स और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी। - UP में भी ऐसा ही आदेश है?
हाँ, एक हफ्ते पहले UP ने भी सरकारी स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य किया।
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