Shakambhari Purnima 2026: तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त व महत्व। देवी शाकंभरी नव समापन, फल-सब्जी अर्पण से भोजन-सब्जी लाभ। भुखमरी नाश, प्रकृति भक्ति।
Shakambhari Purnima 2026: तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त, शाकंभरी नव व महत्वपूर्ण लाभ
दोस्तों, शाकंभरी पूर्णिमा, यानी पौष पूर्णिमा, हिंदू धर्म में प्रकृति व भोजन की देवी माँ शाकंभरी का जयंती दिन है। 2026 में ये पौष मास की पूर्णिमा पर (3 जनवरी के आसपास, सटीक पंचांग देखें) मनाया जाएगा। देवी भगवती का ये अवतार भयंकर अकाल के समय धरती पर फल-सब्जियों की वर्षा कर भुखमरी मिटाया। भक्त इन्हें भोजन, हरियाली व पोषण की देवी मानते हैं। स्कंद पुराण व देवी भागवत में वर्णित – पूजा से स्वास्थ्य, समृद्धि व अभाव दूर।
ये दिन शाकंभरी नव का समापन भी है, जो अष्टमी से शुरू हो पूर्णिमा पर खत्म। आयुर्वेद में सब्जी-फल पूजा को न्यूट्रिशन बैलेंस का प्रतीक बताया। चलिए विस्तार से जानें।
शाकंभरी पूर्णिमा 2026 की तिथि व मुहूर्त
पौष पूर्णिमा पर निर्भर। 2026 में:
- पूर्णिमा तिथि: 2 जनवरी शाम से 3 जनवरी दोपहर (पिछले संदर्भ से)।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:40-12:30।
- चंद्रोदय: शाम 5:28।
- पूजा: सूर्योदय से चंद्रोदय। नवرات्री समापन।
शाकंभरी देवी कौन? कथा सरल शब्दों में
दुर्गा सप्तशती में – दुराचारक दुर्गम ने तपस्या से देवताओं को हराया। भगवती शाकंभरी अवतरित, आँखों से सब्जियाँ उगाईं, भक्तों को भोजन दिया। नाम: शक (सब्जी) + भरी (धारण करने वाली)। संदेश: प्रकृति संरक्षण।
शाकंभरी नवرات्री 2026: अनोखी 8 दिन परंपरा
सामान्य नवرات्री प्रतिपदा से, ये अष्टमी से पूर्णिमा तक (7-9 दिन तिथि भेद से)।
पूजा विधि: घर पर स्टेप बाय स्टेप
- सुबह स्नान, स्वच्छ हरित वस्त्र।
- कलश स्थापना (पानी में सब्जी)।
- गणेश पूजा।
- शाकंभरी मूर्ति/चित्र स्थापित, फल-सब्जी (आलू, गाजर, पालक, सेब) अर्पित।
- मंत्र: “ॐ शाकंभरी देव्यै नमः” (108 जप)।
- आरती, भोग (सब्जी खीर)।
- दान: गरीबों को हरा भोजन।
क्षेत्रीय परंपराएँ
उत्तराखंड: विशेष मेला। बंगाल: सब्जी भोग।
आयुर्वेदिक लाभ
सब्जी पूजा न्यूट्रिशन जागरूकता। पालक आयरन, गाजर विटा। विंटर डिटॉक्स।
टेबल: दैनिक नवرات्री रंग व भोग
| दिन | रंग | भोग | लाभ |
|---|---|---|---|
| 1 (अष्टमी) | हरा | पालक पनीर | स्वास्थ्य |
| 2 | पीला | केला | समृद्धि |
| … | … | … | … |
| 8 (पूर्णिमा) | सफेद | खीर | शांति |
FAQs
1. शाकंभरी पूर्णिमा 2026 कब?
पौष पूर्णिमा पर, नवرات्री समापन।
2. पूजा में क्या अर्पित?
फल-सब्जियाँ, हरा भोजन।
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