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हिमालय का सतर्क संकेत: तिब्बत में दो झटके, भूटान में तीसरा- क्या बड़ा भूकंप आने वाला?

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Tibet earthquake January 2026, Bhutan shallow quake
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रविवार को तिब्बत में 3.0 और भूटान में 2.8 तीव्रता के उथले भूकंप आए। हिमालयी क्षेत्र में सतर्कता बरतें। 10 किमी गहराई के झटके ज्यादा खतरनाक। आफ्टरशॉक संभव। वैज्ञानिक तथ्य और बचाव टिप्स।

उथले भूकंपों का सिलसिला: तिब्बत-भूटान में घंटों के अंतराल पर धसान, नुकसान से बचाव कैसे करें

तिब्बत-भूटान में उथले भूकंपों का सिलसिला: हिमालयी पट्टी में खतरे की घंटी, आफ्टरशॉक संभव

रविवार को हिमालयी क्षेत्र फिर एक्टिव हो गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार तिब्बत और भूटान में घंटों के अंतराल पर उथले भूकंप आए। तिब्बत में दो झटके- सुबह 4:23 बजे 3.7 तीव्रता का और दोपहर 2:17 बजे 3.0 तीव्रता का। दोनों 10 किमी गहराई पर। भूटान में 11:11 बजे 2.8 तीव्रता का भूकंप। अभी तक नुकसान या हादसे की कोई खबर नहीं। लेकिन वैज्ञानिकों ने आफ्टरशॉक की चेतावनी दी है।​​

उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक क्यों होते हैं? सिस्मिक वेव्स सतह तक कम दूरी तय करती हैं, इसलिए जमीन ज्यादा हिलती है। 10 किमी गहराई वाले झटके भवनों को नुकसान पहुंचा सकते। तिब्बत का पहला केंद्र 28.58 N, 87.29 E। दूसरा 28.38 N, 87.23 E। भूटान का 27.14 N, 89.02 E। ये हिमालयन फॉल्ट सिस्टम पर दबाव के संकेत। भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही, जिससे हिमालय बना और भूकंप आते रहते हैं।

भूटान भूकंप जोन IV और V में आता है, सबसे सक्रिय श्रेणी। एशियन डिजास्टर रिडक्शन सेंटर के अनुसार। जनवरी में ही भूटान को 3.8 तीव्रता का झटका मिला था। तिब्बत में भी लगातार गतिविधि। ये छोटे-मोटे भूकंप बड़े भूकंपों के पहले संकेत हो सकते। हिमालय दुनिया का सबसे भूकंप प्रभावित क्षेत्र। नेपाल, भारत, भूटान, तिब्बत सब जोखिम में।

हिमालयी भूकंपों का वैज्ञानिक कारण
भारतीय प्लेट सालाना 4-5 सेंटीमीटर की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़ रही। यूरेशियन प्लेट से टकराव। इससे म्यांमार, नेपाल, उत्तराखंड तक झटके। तिब्बत पठार ऊंचा हो रहा। एनसीएस लगातार मॉनिटर कर रहा। रिक्टर स्केल पर 3.0 हल्का माना जाता, लेकिन उथले होने से खतरा।

5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. तिब्बत-भूटान भूकंप की तीव्रता क्या थी?
    तिब्बत में 3.7 और 3.0। भूटान में 2.8। सभी 10 किमी उथली गहराई।
  2. उथले भूकंप खतरनाक क्यों?
    वेव्स सतह तक तेज पहुंचतीं। ज्यादा हिलाव। नुकसान संभव।
  3. आफ्टरशॉक कब तक?
    कुछ दिन। 3.0+ संभव। मॉनिटरिंग जारी।
  4. हिमालय में भूकंप क्यों ज्यादा?
    भारतीय प्लेट का टकराव। सालाना 4-5 सेमी पुश।
  5. बचाव कैसे करें?
    ड्रॉप कवर होल्ड। मजबूत जगह। अलर्ट सुनें। किट तैयार रखें।
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