केरल में इन्फ्लुएंसर शिम्जिता मुस्तफा ने बस में डीपक पर छेड़छाड़ का वीडियो डाला, 20 लाख व्यूज। दो दिन बाद डीपक ने सुसाइड किया। पुलिस ने अबेतमेंट केस दर्ज कर गिरफ्तार किया। मानवाधिकार आयोग ने जांच के आदेश दिए।
केरल बस छेड़छाड़ वीडियो कांड: इन्फ्लुएंसर शिम्जिता गिरफ्तार, डीपक की सुसाइड ने खोला सोशल मीडिया का काला खेल
केरल के कोझिकोड जिले में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सोशल मीडिया के खतरों को नंगा कर दिया। 35 साल की इन्फ्लुएंसर शिम्जिता मुस्तफा ने एक प्राइवेट बस में 42 साल के डीपक यू पर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल हो गया, 20 लाख से ज्यादा व्यूज आए। लोग डीपक को ट्रोल करने लगे। दो दिन बाद रविवार को डीपक के मां-बाप ने उन्हें फंदे पर लटका पाया। परिवार का कहना है कि बेटा बेकसूर था, अपमान सहन न हो सका। पुलिस ने शिम्जिता के खिलाफ सुसाइड अबेतमेंट का केस दर्ज किया और बुधवार को वडकारा से गिरफ्तार कर लिया।
वीडियो में शिम्जिता ने कहा, ‘कल बस में एक आदमी ने जानबूझकर मुझे छुआ। ये एक्सीडेंट नहीं, साफ छेड़छाड़ थी। सामने वाली महिला भी असहज थी इसलिए रिकॉर्डिंग शुरू की। कैमरा देखने के बाद भी उसने छुआ।’ डीपक टेक्सटाइल कंपनी का सेल्स एक्जीक्यूटिव था, गोविंदपुरम का रहने वाला। शनिवार उसका जन्मदिन था लेकिन खाने को नहीं छुआ। मां कन्यका ने कहा, ‘मेरा इकलौता बेटा बेकसूर था। कभी ऐसा आरोप नहीं लगा। अपमान बर्दाश्त न हुआ।’ सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से डिप्रेशन में चला गया।
डीपक के घरवालों ने मेडिकल कॉलेज थाने में शिकायत की। पुलिस ने IT एक्ट के तहत केस दर्ज किया। नॉन-बेलेबल वारंट जारी हुआ। शिम्जिता रिश्तेदार के घर छिपी थी। प्लेन क्लोथ्स पुलिस ने पकड़ा। कोयिलांडी अस्पताल में मेडिकल, फिर कुन्नामंगलम कोर्ट में पेश। 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी। BJP कार्यकर्ता जमा हो गए। केरल स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने नॉर्थ जोन DIG को हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा।
कांड की समयरेखा
सोशल मीडिया ट्रायल का खतरा
- वीडियो डिलीट कर नया डाला, फिर प्राइवेट।
- ट्रोलिंग से मानसिक तनाव।
- बिना जांच पब्लिक कोर्ट।
- झूठे इल्जाम जिंदगी बर्बाद।
कानून में अबेतमेंट IPC 306, 7 साल तक सजा।
परिवार का दर्द
मां बोलीं, ‘बेटा कभी गलत नहीं। बस सफर में भीड़ थी। वीडियो ने सब छीन लिया।’ भाई-बंधु सदमे में। कोझिकोड में चर्चा गरम। BJP ने कहा, फेम के चक्कर में जुल्म।
शिम्जिता का बैकग्राउंड
- वडकारा, मलप्पुरम की अरीकोड पंचायत की पूर्व मेंबर।
- इन्फ्लुएंसर, फॉलोअर्स पर निर्भर।
- फरार थी, लुकआउट नोटिस।
मेडिकल कॉलेज पुलिस जांच कर रही।
कानूनी पहलू
- अबेतमेंट टू सुसाइड: IPC 306।
- डिफेमेशन: IPC 499/500।
- साइबर क्राइम: IT एक्ट।
- ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट जरूरी।
सोशल मीडिया सेफ्टी टिप्स
- वीडियो डालने से पहले सोचें।
- पुलिस में शिकायत करें।
- नाम-पता न लें पब्लिकली।
- फेक्ट चेक जरूरी।
- साइबर सेल हेल्पलाइन।
पहले केस
- 2023: बेंगलुरु फेक CCTV कांड।
- 2024: UP इन्फ्लुएंसर झूठा केस।
- पैटर्न: वायरल=ट्रुथ मानना।
सोशल मीडिया जिम्मेदारी सिखाए।
क्या सबक?
- #MeToo के नाम पर बदला न लें।
- पुरुष भी विक्टिम हो सकते।
- ट्रायल कोर्ट बंद करें।
- कानून ही न्याय देगा।
डीपक को इंसाफ मिलना चाहिए।
सोसायटी में बहस
- महिलाओं की सेफ्टी जरूरी।
- लेकिन झूठे केस खतरा।
- सोशल मीडिया रेगुलेशन चाहिए।
- मेंटल हेल्थ सपोर्ट।
ये केस सोशल मीडिया की ताकत और खतरों को दिखाता। शिम्जिता निर्दोष साबित हो या दोषी, डीपक वापस न आएगा। सतर्क रहें।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- शिम्जिता ने क्या किया था?
बस में डीपक पर छेड़छाड़ का वीडियो डाला, वायरल हुआ। - डीपक ने क्यों सुसाइड किया?
ट्रोलिंग-अपमान से तनाव, परिवार का दावा बेकसूर। - शिम्जिता पर क्या केस?
सुसाइड अबेतमेंट IPC 306, 14 दिन कस्टडी। - ह्यूमन राइट्स ने क्या कहा?
DIG को हफ्ते में रिपोर्ट, जांच। - सोशल मीडिया पर क्या सीख?
बिना प्रूफ वीडियो न डालें, पुलिस जाएं।
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