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सोनागाची में SIR फॉर्म भरने की मुश्किल? EC 2-3 दिसंबर को लगाएगा खास कैंप!

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EC's Unique Initiative: SIR Camps in Red-Light Districts – The Inside Story
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कोलकाता के सोनागाची जैसे रेड लाइट एरिया में सेक्स वर्कर्स SIR फॉर्म भरने में परेशान। चुनाव आयोग 2-3 दिसंबर को स्पेशल कैंप लगाएगा। CEO खुद शामिल हो सकते हैं। 

सेक्स वर्कर्स को वोटर लिस्ट में जगह: कोलकाता रेड लाइट जिलों का चुनावी ड्रामा

चुनाव आयोग ने कोलकाता के रेड लाइट एरिया में एक ऐसा कदम उठाया है जो चर्चा में है। सोनागाची, सेठबागान, रामबागान जैसे इलाकों में सेक्स वर्कर्स को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के फॉर्म भरने में भारी दिक्कत हो रही थी। आयोग ने 2 और 3 दिसंबर को खास कैंप लगाने का फैसला किया। ये कैंप SIR के पहले फेज के खत्म होने से पहले होंगे। पहला फेज 4 दिसंबर को समाप्त होगा और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 9 दिसंबर को आएगी। ये पहल उन लोगों के लिए है जो समाज के हाशिए पर हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, SIR का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट करना है ताकि हर वयस्क को वोट का हक मिले।

सोनागाची और अन्य रेड लाइट एरिया की सच्चाई
कोलकाता का सोनागाची एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट है। यहां हजारों सेक्स वर्कर्स रहती हैं। ये लोग अक्सर सरकारी योजनाओं से दूर रह जाती हैं। SIR फॉर्म भरना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा। डर, कन्फ्यूजन और फॉर्म की जटिलता। कई तो इलाका छोड़कर चली गईं। अमरा पडताक, उषा मल्टीपर्पस कोऑपरेटिव और सोसाइटी ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट जैसी तीन संस्थाओं ने 21 नवंबर को चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को ईमेल किया। उन्होंने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की दिक्कतें बताईं। CEO मनोज अग्रवाल ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने स्पेशल हियरिंग की सुविधा का वादा किया। यहां तक कि खुद एक कैंप में शामिल होने का कहा।

CEO मनोज अग्रवाल की भूमिका
पश्चिम बंगाल के CEO मनोज अग्रवाल ने जिला चुनाव अधिकारी और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को आदेश दिए। 2-3 दिसंबर को रेड लाइट एरिया में स्टाफ भेजा जाए। सोनागाची, जोराबागान, किद्देपूर्व, कालीघाट, बोवबाजार जैसे इलाकों में मदद। संस्थाओं ने स्पेसिफिक असेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसी और पार्ट नंबर बताए। CEO ऑफिस ने कहा- अधिकारी स्पॉट पर समस्याएं सुलझाएंगे। महास्वेता मुखर्जी, अमरा पडताक की एडवोकेसी ऑफिसर ने कहा- कई वर्कर्स फॉर्म नहीं भर पाईं। हमने पूरे बंगाल में कैंप की मांग की। अधिकारियों ने स्टेट वाइड पर विचार करने को कहा। सताब्दी साहा, अमरा पडताक की सेक्रेटरी बोलीं- ये कैंप भरोसा बहाल करेंगे।

SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों जरूरी
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने का अभियान है। चुनाव आयोग हर साल ये चलाता है। खासकर उन इलाकों में जहां नाम छूट जाते। पहला फेज में फॉर्म भरना, फिर ड्राफ्ट लिस्ट। पश्चिम बंगाल में ये चल रहा। डेडलाइन नजदीक थी लेकिन रेड लाइट एरिया में दिक्कत। आयोग ने समय से पहले कैंप लगाए। ये लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण। चुनाव आयोग की रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2024 में 8 करोड़ नए वोटर जुड़े। महिलाओं और हाशिए के लोगों पर फोकस।

रेड लाइट एरिया में चुनौतियां (बुलेट पॉइंट्स में)

  • फॉर्म भरने की अक्षमता: पढ़ना-लिखना कम, जटिल फॉर्म।
  • डर और स्टिग्मा: पहचान छिपाने का भय, सरकारी अफसरों से हिचक।
  • इलाका छोड़ना: कन्फ्यूजन से कई भाग गईं।
  • संस्थाओं की भूमिका: अमरा पडताक जैसी NGOs ने आवाज उठाई।
  • सरकारी प्रतिक्रिया: CEO ने तुरंत कैंप का ऐलान।

कोलकाता के प्रमुख रेड लाइट एरिया और प्रभावित कॉन्स्टिट्यूएंसी (टेबल)

इलाकाअसेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसीअनुमानित आबादी प्रभावितकैंप तारीख
सोनागाचीश्यामपुर10,000+2-3 दिसंबर
सेठबागानचाटूलबाग5,000+2-3 दिसंबर
रामबागानजोराबागान4,000+2 दिसंबर
किद्देपूर्वकिद्देपूर्व3,000+3 दिसंबर
कालीघाटकशबाजार2,500+2-3 दिसंबर
बोवबाजारचाटूलबाग2,000+2 दिसंबर

(डेटा संस्था रिपोर्ट्स और चुनाव आयोग साइट से अनुमानित। आधिकारिक अपडेट चेक करें।)

संस्थाओं का योगदान
अमरा पडताक ने शनिवार को CEO ऑफिस जाकर डिटेल्ड लेटर दिया। महास्वेता मुखर्जी ने कहा- बंगाल भर में कैंप चाहिए। ये लोग वोटर बनने का हकदार। सताब्दी साहा ने बताया- भरोसा टूटा था, अब सुधार। सोसाइटी ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट और उषा कोऑपरेटिव ने शुरुआत में ईमेल किया। ये NGOs सालों से सेक्स वर्कर्स के हक के लिए लड़ रही। उनका प्रयास रंग लाया। चुनाव आयोग ने PTI को बताया- कैंप पहले फेज से पहले।

पश्चिम बंगाल में SIR का व्यापक चित्र
SIR का पहला फेज 4 दिसंबर तक। ड्राफ्ट 9 को। पूरे राज्य में लाखों फॉर्म आए। लेकिन हाशिए वाले इलाकों में कमी। कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के 144 वार्ड प्रभावित। रेड लाइट वाले खास। अगर कैंप सफल तो मॉडल बनेगा। अन्य राज्यों में कॉपी। चुनाव आयोग 2025 में 10 करोड़ वोटर ऐड करने का टारगेट। महिलाओं पर जोर।

इस पहल से क्या फायदा
सेक्स वर्कर्स को वोट मिलेगा। लोकतंत्र मजबूत। स्टिग्मा कम। सरकारी स्कीम्स का लाभ। जैसे आयुष्मान कार्ड, राशन। वोटर आईडी से पहचान। NGOs को बूस्ट। CEO अग्रवाल की तारीफ। राजनीतिक दल नोटिस करेंगे। वोट बैंक बढ़ेगा। समाज में बदलाव।

चुनौतियां बाकी
कैंप तो लगेंगे लेकिन फॉलो-अप जरूरी। प्राइवेसी का ध्यान। महिलाओं को डर न लगे। फॉर्म सरल बनें। डिजिटल मदद। मोबाइल ऐप्स। बंगाल चुनाव नजदीक। ये वोटर लिस्ट साफ तो फेयर इलेक्शन।

राज्य स्तर पर विस्तार की संभावना
संस्थाओं ने पूरे बंगाल में मांग की। आयोग विचाररत। अगर कोलकाता सफल तो अन्य शहर। जैसे मुर्शिदाबाद, सिलीगुड़ी। ये सामाजिक न्याय। संविधान के अनुच्छेद 326 का पालन। हर नागरिक का वोट।

सेक्स वर्कर्स के अधिकार
भारत में सेक्स वर्क कानूनी ग्रे एरिया। लेकिन नागरिक अधिकार बराबर। सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी का हक दिया। वोटिंग फंडामेंटल राइट। ये कैंप स्टिग्मा तोड़ने का मौका। समाज बदलाव की शुरुआत।

NGOs की लिस्ट जो मदद कर रही

  • अमरा पडताक: एडवोकेसी और ट्रेनिंग।
  • उषा मल्टीपर्पस कोऑपरेटिव: इकोनॉमिक एम्पावरमेंट।
  • सोसाइटी ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट: सोशल एक्शन।

भविष्य में क्या
कैंप के बाद फीडबैक। ड्राफ्ट लिस्ट में नाम चेक। अपील का मौका। अगर सफल तो नेशनल मॉडल। चुनाव आयोग की रिपोर्ट में शामिल। महिलाओं का वोटर प्रतिशत बढ़ेगा। पश्चिम बंगाल में 2026 चुनाव प्रभावित।

5 FAQs

  1. प्रश्न: SIR कैंप कब और कहां लग रहे हैं?
    उत्तर: 2-3 दिसंबर को कोलकाता के सोनागाची, सेठबागान आदि रेड लाइट एरिया में।
  2. प्रश्न: सेक्स वर्कर्स को क्या दिक्कत हो रही SIR में?
    उत्तर: फॉर्म भरने में कन्फ्यूजन, डर और अक्षमता। कई इलाका छोड़ गईं।
  3. प्रश्न: CEO मनोज अग्रवाल क्या करेंगे?
    उत्तर: स्पेशल हियरिंग का वादा। खुद एक कैंप में शामिल हो सकते हैं।
  4. प्रश्न: कौन सी संस्थाओं ने आवाज उठाई?
    उत्तर: अमरा पडताक, उषा कोऑपरेटिव, सोसाइटी ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट।
  5. प्रश्न: SIR का पहला फेज कब खत्म?
    उत्तर: 4 दिसंबर। ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को रिलीज।
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