सुप्रीम कोर्ट ने ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स वाली ‘पब्लिसिटी PIL’ खारिज कर दी। CJI सूर्य कांत बोले- कैमरों के लिए याचिका न दाखिल करें। 1 साल में हर केस फैसला असंभव। पत्र लिखकर सुझाव दें। सुनवाई हाइलाइट्स।
CJI सूर्य कांत का फटकार: देश बदलना है तो पत्र लिखो, PIL से नहीं- ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स पर बयान
सुप्रीम कोर्ट ने ‘पब्लिसिटी PIL’ को फटकारा: न्यायालय कैमरा टाइम के लिए नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक PIL को साफ खारिज करते हुए कहा कि ये ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’ है। याचिका में हर कोर्ट में 1 साल में केस डिस्पोज करने का आदेश मांगा गया था। CJI जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ज्योमल्या बाघची की बेंच ने तीखी फटकार लगाई। CJI ने कहा, ‘आप लोग बाहर खड़े कैमरामैन के सामने बोलने के लिए याचिका न दाखिल करें। कोर्ट स्टेज नहीं है।’ याचिकाकर्ता कमलेश त्रिपाठी ने हिंदी में बहस की इजाजत मांगी लेकिन बेंच ने सुझाव दिया- पत्र लिखकर भेज दें।
सुनवाई में CJI ने व्यंग्य भरा सवाल किया, ‘आप कह रहे हो हर कोर्ट 1 साल में फैसला करे? इसके लिए कितने कोर्ट चाहिए होंगे?’ भारत में 4.7 करोड़ से ज्यादा पेंडिंग केस हैं। SC में 80,000, हाई कोर्ट में 60 लाख, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 4 करोड़। 1 साल का डेडलाइन अमल के लायक नहीं। बेंच ने PIL ट्रेंड पर चिंता जताई। ये सामाजिक न्याय के लिए था, अब पब्लिसिटी टूल बन गया।
याचिकाकर्ता ने सिस्टम चेंज का दावा किया लेकिन CJI बोले, ‘देश बदलना है तो पत्र लिखो, PIL की जरूरत नहीं।’ ऑर्डर में कहा गया कि एडमिनिस्ट्रेटिव साइड पर CJI को सुझाव पत्र भेज सकते हैं। ये हमेशा वेलकम है। PIL का दुरुपयोग रोकने का मेसेज साफ।
भारत में ज्यूडिशियल सिस्टम की समस्या
- पेंडिंग केस: 4.7 करोड़ (2025 डेटा)
- जज-जनसंख्या रेशियो: 21 प्रति 10 लाख (वर्ल्ड एवरेज 50+)
- SC डिस्पोजल: 2-5 साल
- HC: 5-10 साल
- डिस्ट्रिक्ट: 3-7 साल
रिफॉर्म्स जरूरी लेकिन PIL से नहीं।
पेंडिंग केस स्टेटस (2026)
| कोर्ट | पेंडिंग केस | औसत समय |
|---|---|---|
| सुप्रीम कोर्ट | 80,000+ | 2-5 साल |
| हाई कोर्ट | 60 लाख | 5-10 साल |
| डिस्ट्रिक्ट | 4 करोड़ | 3-7 साल |
| ट्रिब्यूनल्स | 50 लाख | 2-4 साल |
CJI के बयान हाइलाइट्स
- ‘PIL पब्लिसिटी के लिए न हो।’
- ‘कितने कोर्ट चाहिए 1 साल के लिए?’
- ‘पत्र लिखो, PIL मत दाखिल करो।’
हिंदी में बहस पर इजाजत लेकिन खारिज।
PIL का इतिहास
- 1980s: जस्टिस पीएन भगवती ने शुरू किया।
- पब्लिक इंटरेस्ट के लिए।
- अब दुरुपयोग: पर्सनल एजेंडा।
SC ने कई बार गाइडलाइंस जारी कीं।
रिफॉर्म्स के रास्ते
- फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बढ़ाएं।
- ई-कोर्टिंग: 90% केस ऑनलाइन।
- जजों की भर्ती: 50% वेकेंसी भरें।
- AI टूल्स केस मैनेजमेंट।
- NJAC बहाल? बहस जारी।
पिछले समान केस
- 2024: PIL फेक न्यूज पर खारिज।
- 2023: यूनिफॉर्म सिविल कोड PIL स्वीकार।
- 2022: CAA PIL पेंडिंग।
SC सिलेक्टिव है।
कमलेश त्रिपाठी कौन?
सोशल मीडिया रिएक्शन
- ‘SC सही कहा, PIL का दुरुपयोग बंद।’
- ‘रिफॉर्म्स जरूरी, लेकिन सही तरीके से।’
- ‘पेंडिंग केस कम करने का समय।’
न्यायिक सुधार सुझाव
- वीडियो कॉन्फ्रेंस बढ़ाएं।
- पैरालीगल स्टाफ।
- केस ट्रांसफर सिस्टम।
- बजट बढ़ाएं 1% GDP।
CJI सूर्य कांत का विजन
- पेंडिंग कम: 2026 टारगेट 20% रिडक्शन।
- ट्रेनिंग प्रोग्राम।
- टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन।
ये फैसला PIL कल्चर पर ब्रेक लगाएगा। जनता को पत्र लिखने का रास्ता खुला। सिस्टम सुधार जरूरी, लेकिन कोर्ट का बोझ न बढ़ाएं।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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