सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए इक्विटी नियम स्थगित कर दिए। भाषा अस्पष्ट बताई, केंद्र से नए ड्राफ्ट की मांग। एससी-एसटी-ओबीसी तक सीमित पर सवाल। 2012 नियम जारी। कैंपस विवाद पर राहत।
यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार: एससी-एसटी-ओबीसी तक सीमित क्यों? नए ड्राफ्ट की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए इक्विटी नियमों पर लगाई रोक: केंद्र से नए ड्राफ्ट की मांग, 2012 वाले जारी
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यूजीसी के ताजा इक्विटी नियमों पर बड़ा ब्रेक लगा दिया। चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमलया बागची की बेंच ने नियमों को स्थगित करते हुए केंद्र को नए सिरे से ड्राफ्ट करने को कहा। कोर्ट ने भाषा को अस्पष्ट बताया और विशेषज्ञों से समीक्षा की जरूरत जताई ताकि शोषण न हो। अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर 2012 के पुराने नियमों को बहाल किया। पूरे देश में कॉलेजों में हंगामा मच गया था इन नियमों को लेकर।
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई किए गए इन नियमों में सभी उच्च संस्थानों को इक्विटी कमेटियां गठित करने का आदेश दिया। ये एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं के प्रतिनिधियों से बनेगी। भेदभाव की शिकायतें संभालेंगी। ये 2012 के सलाहकारी नियमों की जगह लेने वाले थे। लेकिन याचिका में कहा गया कि जाति भेदभाव को सिर्फ आरक्षित वर्गों तक सीमित कर सामान्य वर्ग को अधिकारों से वंचित किया। जनरल कैटेगरी के लोग भी जाति आधारित उत्पीड़न झेल सकते हैं। छात्र संगठनों ने तीखा विरोध किया।
कोर्ट ने कहा, ‘भारत की एकता शिक्षा संस्थानों में दिखे।’ नियम अस्पष्ट हैं, शोषण का खतरा। केंद्र को रीड्राफ्ट करो। 2026 नियम अब लागू नहीं। 2012 वाले चालू रहेंगे। ये फैसला छात्रों, शिक्षकों के लिए राहत। प्रदर्शनकारी बोले, ‘नियम अंतर बढ़ाते, संवेदना न पैदा करते।’
यूजीसी इक्विटी नियमों का बैकग्राउंड। 2012 में सलाहकारी थे- भेदभाव रोकने को। 2026 में बाध्यकारी बने। कमेटी में आरक्षित वर्गों के सदस्य जरूरी। सामान्य वर्ग की शिकायतें? याचिकाकर्ता वकील ने तुरंत सुनवाई मांगी। कोर्ट ने नोटिस लिया। अब स्थगन। केंद्र को जवाब देना होगा।
प्रभाव
- कॉलेज, यूनिवर्सिटी: पुराने नियम।
- कमेटियां: नई न बनें।
- शिकायतें: 2012 तंत्र से।
- विशेषज्ञ समीक्षा: कोर्ट निर्देश।
देशभर प्रदर्शन रुक सकते।
पुराने vs नए नियम
| बिंदु | 2012 नियम | 2026 नियम (स्थगित) |
|---|---|---|
| प्रकृति | सलाहकारी | बाध्यकारी |
| कमेटी | वैकल्पिक | अनिवार्य, आरक्षित प्रतिनिधि |
| दायरा | सामान्य भेदभाव | जाति=एससी/एसटी/ओबीसी तक सीमित |
| सजा | – | शोषण रोकथाम |
कोर्ट की टिप्पणियां
शिक्षा में भेदभाव
राजनीतिक रंग
- विपक्ष: सामान्य वर्ग के अधिकार।
- सरकार: आरक्षित सुरक्षा।
- कोर्ट: बीच का रास्ता।
चुनावी मुद्दा बन सकता।
छात्र संगठन
भविष्य
- केंद्र ड्राफ्ट करेगा।
- सुनवाई आगे।
- नए नियम संतुलित?
शिक्षा व्यवस्था पर नजर।
सुप्रीम कोर्ट का ये कदम शिक्षा में न्याय सुनिश्चित करेगा। अस्पष्ट नियमों से बचाव। सभी वर्ग सुरक्षित। केंद्र जल्द कार्रवाई करे।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- यूजीसी के नए नियम क्या थे?
इक्विटी कमेटियां अनिवार्य। एससी-एसटी-ओबीसी प्रतिनिधि। जाति भेदभाव पर फोकस। - सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?
2026 नियम स्थगित। 2012 वाले बहाल। केंद्र को रीड्राफ्ट कहा। - क्यों विवाद हुआ?
सामान्य वर्ग को भेदभाव सुरक्षा नहीं। भाषा अस्पष्ट। - अनुच्छेद 142 क्या?
कोर्ट को पूर्ण न्याय के लिए कोई भी आदेश देने की शक्ति। - अब क्या होगा?
केंद्र नए ड्राफ्ट बनाएगा। सुनवाई जारी। पुराने नियम चलें।
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