सीजेआई सूर्या कांत ने ट्रेड यूनियनों को इंडस्ट्री बंद करने का जिम्मेदार ठहराया। घरेलू कामगारों की PIL खारिज। बोले- एजेंसी असली शोषक, मिनिमम वेज से नौकरियां जाएंगी। कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया।
घरेलू नौकरों पर PIL ठुकराई: CJI बोले- यूनियन नेता असली शोषक, एजेंसी वाले चोर
ट्रेड यूनियन ने देश की इंडस्ट्री रोकी: सीजेआई सूर्या कांत का सुप्रीम कोर्ट में धमाकेदार बयान
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्या कांत ने ट्रेड यूनियनों पर ऐसा तीखा प्रहार किया कि श्रम जगत सन्न रह गया। घरेलू कामगारों के कल्याण की PIL सुनते हुए बोले, ‘ट्रेड यूनियन ने देशभर फैक्ट्रियां बंद करा दीं। झंडा लहराने वाले नेता काम नहीं करना चाहते। ये ही नौकरी छीनने के जिम्मेदार हैं।’ जस्टिस जॉयमलया बागची संग बेंच ने PIL खारिज कर दी। राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि घरेलू नौकरों की शिकायतें देखें।
PIL पेन थोजिलारगल संघम और अन्य यूनियनों की। मांग- घरेलू कामगारों को मिनिमम वेज, साप्ताहिक छुट्टी, रजिस्ट्रेशन। सीनियर वकील राजू रामचंद्रन ने कहा सिंगापुर में ऐसा है। अनुच्छेद 21, 23 उल्लंघन, बंधुआ मजूरी। बंधुआ मुक्ति मोर्चा केस का हवाला। लेकिन सीजेआई ने साफ मना। ‘हर घर में मुकदमा हो जाएगा।’ एजेंसी असली शोषक बताई। शहरों में एजेंसी ने बाजार कब्जा लिया। कोर्ट एजेंसी से 40 हजार लेती, कामगार को 19 हजार मिलता। ‘ट्रस्ट टूटेगा, परिवार प्रभावित।’
सीजेआई बोले, ‘सुधारों की जल्दबाजी में शोषण बढ़ता है। मिनिमम वेज फिक्स करो, नौकरियां चली जाएंगी। डिमांड सप्लाई का मामला। यूनियन नेता कामगारों को लटका देते।’ अपना अनुभव बताया- सुप्रीम कोर्ट में भी एजेंसी शोषण। ‘मानवीय रिश्ता टूटेगा, अपराध बढ़ेंगे।’ PIL को मंडामस बताकर खारिज। 2025 के अजय मल्लिक केस का हवाला दिया था केंद्र को कानून बनाने को, लेकिन केंद्र बोला राज्य विषय। अब राज्य देखें।
ट्रेड यूनियन का इतिहास। स्वतंत्रता के बाद मजबूत। हड़तालें, लेबर लॉ। लेकिन सीजेआई के मुताबिक पारंपरिक इंडस्ट्री बंद। टेक्सटाइल, स्टील प्रभावित। सुधार की कमी- स्किल, अधिकार जागरूकता। शोषण है लेकिन समाधान हैं।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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