जौनपुर में 24 साल के सूरज भास्कर ने NEET में दो बार फेल होने के बाद खुद बाएं पैर का हिस्सा काट लिया। MBBS में दिव्यांग कोटे के लिए हमले का झूठा केस किया। डायरी में लिखा- 2026 में डॉक्टर बनूंगा। पूरी सच्चाई।
मेडिकल सपना टूटा तो पैर काट लिया: यूपी छात्र की विचलित कर देने वाली कहानी
जौनपुर का सनसनीखेज मामला: NEET फेलियर ने खुद पैर काटा, MBBS दिव्यांग कोटे के लिए झूठा हमला दिखाया
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के खलीलपुर गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है जो पूरे देश को हिला देने वाली है। 24 साल का सूरज भास्कर, जो MBBS की तैयारी कर रहा था, दो बार NEET परीक्षा में फेल हो गया। हताशा में उसने खुद अपना बायां पैर काट लिया ताकि दिव्यांग कोटे से मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल जाए। पुलिस ने उसके झूठे हमले के दावे को पकड़ लिया। सूरज अभी प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवा रहा है, उसकी जान तो बची हुई है।
सूरज का बड़ा भाई आकाश ने रविवार को पुलिस को बताया कि अज्ञात बदमाशों ने रात में सूरज पर हमला कर दिया। पैर काटकर उसे बेहोश छोड़ भागे। हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ। लेकिन पूछताछ में सूरज बार-बार बयान बदलता रहा। गर्लफ्रेंड से पूछने पर खुलासा हुआ कि वो किसी भी कीमत पर 2026 में डॉक्टर बनना चाहता था। पुलिस ने उसकी डायरी बरामद की, जिसमें लिखा था- मैं 2026 में MBBS डॉक्टर बनूंगा।
पुलिस के अनुसार अक्टूबर में सूरज वाराणसी के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी गया था। दिव्यांग प्रमाण पत्र के कागजात लेने। नाकाम रहा तो लौटा। फिर निर्माणाधीन मकान में मशीन से खुद पैर काट लिया। हमले का नाटक रचा। सर्कल ऑफिसर गोल्डी गुप्ता ने बताया कि कानूनी सलाह ली जा रही है- किस धाराओं में मुकदमा चले। अभी सूरज खतरे से बाहर लेकिन ये कदम सोचने पर मजबूर कर देता है।
NEET का दबाव कितना खतरनाक हो चुका है, ये केस दिखाता है। हर साल 20 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स परीक्षा देते हैं। सिर्फ 1 लाख के करीब MBBS सीटें। सरकारी कॉलेजों में तो और कम। कटऑफ ऊंचा। दिव्यांग कोटे में छूट मिलती है- 45% डिसएबिलिटी वाले को कम मार्क्स पर दाखिला। RPWD एक्ट 2016 के तहत 5% कोटा। लेकिन ये कोटा फर्जीवाड़े का शिकार बन रहा। सूरज जैसी घटना पहली नहीं लेकिन इतना एक्सट्रीम रेयर।
NEET और मेडिकल एडमिशन सिस्टम समझ लीजिए। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी आयोजित करती। UG के लिए सालाना। 2025 में 23 लाख रजिस्ट्रेशन। AIQ में 15% सीटें। स्टेट कोटा 85%। PwD के लिए बेंचमार्क- लेग फंक्शनल लिमिटेशन 40-80%। सर्टिफिकेट MCC या राज्य मेडिकल काउंसिल से। फर्जी केस पकड़े जाते हैं तो रद्द। लेकिन सूरज ने खुद डिसेबल होने का रास्ता चुना।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सूरज ने ऐसा क्यों किया?
NEET में दो बार फेल। दिव्यांग कोटे से MBBS चाहता था। डायरी में 2026 डॉक्टर बनने का संकल्प। - पुलिस ने कैसे पकड़ा?
बयान बदले। गर्लफ्रेंड ने बताया। डायरी मिली। BHU विजिट का रिकॉर्ड। - दिव्यांग कोटा कैसे काम करता?
5% सीटें। 45% डिसएबिलिटी। कम कटऑफ। वेरिफिकेशन जरूरी। - सूरज की हालत?
प्राइवेट हॉस्पिटल में। खतरा टला। कानूनी सलाह ली जा रही। - NEET प्रेशर से और केस?
हां, सुसाइड, डिप्रेशन बढ़े। फर्जी कोटा केस भी। मेंटल हेल्थ जरूरी।
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