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क्यों दबाती हैं हम फीलिंग्स?Sigmund Freud से सीखें इमोशनल Freedom!

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Sigmund Freud का क्वोट – “दबी भावनाएं कभी नहीं मरतीं, वे जिंदा दफन हो जाती हैं।” अर्थ, मनोविज्ञान, आधुनिक जीवन में असर और बचाव टिप्स। इमोशंस को व्यक्त करें, मेंटल हेल्थ बचाएं! 

Sigmund Freud का क्वोट: “दबी भावनाएं कभी नहीं मरतीं। वे जिंदा दफन हो जाती हैं और बाद में बदसूरत रूप में निकल आती हैं।”

दोस्तों, आज का क्वोट ऑफ द डे सिगमंड फ्रॉयड का है, जो मनोविश्लेषण के जनक कहलाते हैं। पूरा क्वोट है: “Unexpressed emotions will never die. They are buried alive and will come forth later in uglier ways.” सरल हिंदी में – दबी भावनाएं मरती नहीं, वे अंदर ही सड़ती रहती हैं और गुस्सा, चिंता या बीमारी बनकर लौटती हैं। मनीकंट्रोल एजुकेशन के अनुसार, ये आधुनिक स्ट्रेस वाली जिंदगी के लिए परफेक्ट । WHO के मुताबिक, 25% लोग डिप्रेशन से जूझते हैं, ज्यादातर दबी फीलिंग्स से। इस आर्टिकल में क्वोट का मतलब, फ्रॉयड की जिंदगी, साइंस बैकअप और प्रैक्टिकल टिप्स।

क्वोट का गहरा मतलब: भावनाएं दबाने से क्या होता है?

फ्रॉयड कहते हैं कि इग्नोर करने से इमोशंस खत्म नहीं होते। वे अनकॉन्शस माइंड में चले जाते और स्ट्रेस, एंग्जायटी या फिजिकल इलनेस बनते। उदाहरण – ऑफिस में गुस्सा दबाया, घर पर फैमिली पर निकाला। NIH स्टडीज कन्फर्म: सप्रेस्ड इमोशंस हाई BP, हार्ट प्रॉब्लम्स बढ़ाते [ से इंस्पायर्ड]। हेल्दी वे में एक्सप्रेस करें – बात करें, जर्नलिंग। दबाना कमजोरी नहीं, बल्कि स्ट्रेंथ है।

सिगमंड फ्रॉयड कौन थे? जीवनी और योगदान

1856 ऑस्ट्रिया में जन्मे। मेडिसिन पढ़ा, हिस्टेरिया पर रिसर्च। 1890s में साइकोएनालिसिस शुरू – अनकॉन्शस, ड्रीम्स, इड-ईगो-सुपरईगो थ्योरी। किताबें: ‘इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स’। नाजी से भागे, 1939 लंदन में निधन। उनके आइडियाज आज CBT, थेरेपी में यूज। भारत में भी फ्रॉयडियन साइकोलॉजी पॉपुलर।

मनोविज्ञान में क्वोट का महत्व: साइंटिफिक प्रूफ

फ्रॉयड की थ्योरी अनकॉन्शस पर। मॉडर्न साइंस: जर्नल ऑफ साइकोलॉजी स्टडी – सप्रेस्ड इमोशंस कोर्टिसोल बढ़ाते, इम्यून कमजोर। आयुर्वेद में भी ‘व्यक्त न करने से रोग’। ICMR रिपोर्ट: 40% मेंटल हेल्थ इश्यूज अनएक्सप्रेस्ड फीलिंग्स से।

आधुनिक जीवन में दबी भावनाओं का असर

वर्क प्रेशर, सोशल मीडिया से फीलिंग्स छुपाते। रिजल्ट: बर्नआउट। महिलाओं में 30% ज्यादा। पुरुष ‘स्ट्रॉन्ग बनो’ कहकर दबाते। WHO 2025: 1 बिलियन मेंटल हेल्थ केस।

भावनाओं को व्यक्त करने के 10 आसान तरीके

  • जर्नलिंग: रोज 10 मिनट लिखें।
  • दोस्तों से बात: कॉन्फिडेंट शेयर।
  • एक्सरसाइज: वॉक पर क्राई।
  • आर्ट थेरेपी: पेंटिंग।
  • मेडिटेशन: माइंडफुलनेस।
  • प्रोफेशनल हेल्प: काउंसलर।
  • योग: अनुलोम-विलोम।
  • म्यूजिक: सैड सॉन्ग्स सुनें।
  • नेचर वॉक: पेड़ों से बात।
  • ग्रेटिट्यूड डायरी: पॉजिटिव फोकस।

NIH: थेरेपी से 70% रिलीफ।

भावनाओं पर कंट्रोल टेबल: हेल्दी vs अनहेल्दी

स्थितिहेल्दी तरीकाअनहेल्दी रिजल्ट
गुस्साबातचीत, ब्रेकब्लैकआउट, हाई BP
उदासीक्राई, शेयरडिप्रेशन, आइसोलेशन
डरफेस, प्लानएंग्जायटी अटैक्स
खुशीसेलिब्रेटओवरईटिंग

फ्रॉयड के अन्य फेमस क्वोट्स

  • “ड्रीम्स विंडोज टू अनकॉन्शस।”
  • “एनाटॉमी डेस्टिनी।”

आयुर्वेद और योग से इमोशन बैलेंस

चरक संहिता: भावनाएं दोष बिगाड़ती। शतावरी, अश्वगंधा हेल्प। सूर्य नमस्कार।

मेंटल हेल्थ स्टैट्स इंडिया

  • 15% डिप्रेशन।
  • NIMHANS: 80% अनट्रिटेड।

प्रिवेंशन टिप्स लॉन्ग टर्म

रूटीन बनाएं, सपोर्ट सिस्टम।

सामान्य सवाल (FAQs)

1. दबी भावनाएं क्या हानि पहुंचाती?
स्ट्रेस, बीमारी ।

2. फ्रॉयड कौन?
साइकोएनालिसिस फाउंडर।

3. इमोशंस कैसे एक्सप्रेस?
जर्नलिंग, बात।

4. साइंस फ्रॉयड को मानता?
कुछ थ्योरीज हां।

5. डेली प्रैक्टिस?
10 मिनट रिफ्लेक्शन।

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