10 फरवरी 2026 से स्पाइसजेट पहली बार इम्फाल को कोलकाता, गुवाहाटी और मुंबई से रोज़ जोड़ेगी। बोइंग 737 से डेली फ्लाइट्स, एक ही प्लेन से मुंबई–इम्फाल सफर, नॉर्थ-ईस्ट की कनेक्टिविटी, किराए, यात्रियों को फायदे और इम्फाल एयरपोर्ट पर इसका असर विस्तार से जानिए।
अब इम्फाल जाना होगा सस्ता और आसान? स्पाइसजेट के नए रूट्स से किसको होगा सबसे ज़्यादा फायदा
स्पाइसजेट की नई उड़ानें: 10 फरवरी से इम्फाल अब कोलकाता, गुवाहाटी और मुंबई से रोज़ जुड़ेगा
नॉर्थ-ईस्ट की बात आती है, तो अक्सर सबसे बड़ा सवाल होता है – यहां तक पहुंचना इतना मुश्किल और महंगा क्यों है? मणिपुर की राजधानी इम्फाल उसके सबसे बड़े उदाहरणों में से एक है। लिमिटेड फ्लाइट्स, महंगे टिकट, सीधी कनेक्टिविटी की कमी – इन सबके बीच 10 फरवरी 2026 से स्पाइसजेट की नई डेली फ्लाइट्स इम्फाल के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आ रही हैं।
बजट कैरियर स्पाइसजेट ने पहली बार इम्फाल मार्केट में एंट्री करते हुए ऐलान किया है कि वह 10 फरवरी से इम्फाल को रोज़ाना कोलकाता, गुवाहाटी और मुंबई से जोड़ेगा। कंपनी बोइंग 737 विमान से ये सर्विस चलाएगी, जिससे एक साथ ज्यादा पैसेंजर्स, बेहतर कम्फर्ट और लगातार ऑपरेशन संभव होगा।
यह कदम सिर्फ एक नई रूट एनाउंसमेंट नहीं है, बल्कि नॉर्थ-ईस्ट की एयर कनेक्टिविटी को मज़बूत करने की स्ट्रेटेजिक चाल माना जा रहा है। आइए इस फैसले के सभी पहलुओं को डिटेल में समझते हैं – रूट्स, टाइमिंग, किसे फायदा, किराए पर असर, और मणिपुर के इकोनॉमी और टूरिज्म पर इसका लंबा असर क्या हो सकता है।
नई फ्लाइट्स का पूरा प्लान: कौन, कहां से, कैसे उड़ पाएगा?
स्पाइसजेट की ओर से जारी स्टेटमेंट के हिसाब से, 10 फरवरी 2026 से ये डेली फ्लाइट्स ऑपरेट होंगी।
कुल मिलाकर तीन तरह की कनेक्टिविटी दी जा रही है:
- कोलकाता–इम्फाल (नॉन-स्टॉप)
कोलकाता से इम्फाल के लिए रोज़ सीधी उड़ान दी जाएगी। यह रूट पहले भी अलग-अलग एयरलाइंस चलाती रही हैं, लेकिन सीट्स लिमिटेड और फ्रीक्वेंसी कम रहने से किराए अक्सर हाई हो जाते थे। स्पाइसजेट के आने से कोलकाता–इम्फाल सेक्टर पर कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और पैसेंजर के पास ज्यादा ऑप्शन होंगे। - गुवाहाटी–इम्फाल (नॉन-स्टॉप)
गुवाहाटी नॉर्थ-ईस्ट का सबसे बड़ा एयर हब माना जाता है। यहां से इम्फाल की नॉन-स्टॉप डेली फ्लाइट स्टूडेंट्स, बिजनेस ट्रैवलर्स और लोकल रेसिडेंट्स के लिए काफी मददगार रहेगी। पहले गुवाहाटी–इम्फाल रूट पर उड़ानें थीं, लेकिन फ्लाइट्स की संख्या और टाइमिंग हमेशा पैसेंजर की डिमांड के हिसाब से नहीं होती थी। अब डेली बोइंग 737 सर्विस से कैपेसिटी अच्छी-खासी बढ़ने की उम्मीद है। - मुंबई–कोलकाता–इम्फाल (सिंगल एयरक्राफ्ट जर्नी)
सबसे दिलचस्प मॉडल मुंबई से इम्फाल का है। यहां पैसेंजर्स को इम्फाल के लिए एक ही प्लेन से सफर मिलेगा, जिसके बीच में कोलकाता में शॉर्ट स्टॉपओवर होगा। यानी पैसेंजर को विमान बदलने की झंझट नहीं रहेगी – न नया बोर्डिंग, न सुरक्षा जांच दोबारा, न गेट बदलने की टेंशन।
यह सिंगल एयरक्राफ्ट मॉडल मुंबई जैसे बड़ी मेट्रो सिटी से नॉर्थ-ईस्ट के अंदरूनी हिस्सों तक जाने वालों के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है, क्योंकि अभी तक या तो दो फ्लाइट्स बदलनी पड़ती थीं या बहुत महंगा टिकट लेना पड़ता था।
स्पाइसजेट की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक, ये नई फ्लाइट्स सिर्फ डायरेक्ट कनेक्टिविटी नहीं देंगी, बल्कि कोलकाता और गुवाहाटी जैसे हब्स के जरिए पूरे इंडिया और कुछ इंटरनेशनल पॉइंट्स तक आगे की जर्नी भी आसान बनाएंगी।
मणिपुर के लिए ये कनेक्टिविटी इतनी बड़ी बात क्यों?
कंपनी ने अपने स्टेटमेंट में साफ कहा है कि मणिपुर फिलहाल लिमिटेड एयर कनेक्टिविटी से जूझ रहा है।
पिछले कुछ सालों में इम्फाल एयरपोर्ट से फ्लाइट्स की संख्या में उतार-चढ़ाव रहा है। कुछ रूट्स पर सर्विस बंद भी हुई, तो कुछ पर फ्रीक्वेंसी घट गई। नतीजा –
- टिकट के दाम कई बार अचानक बहुत ज्यादा चले जाते थे
- स्टूडेंट्स को एग्जाम या सेशन शुरू होने से पहले टिकट मिलना मुश्किल हो जाता था
- मेडिकल ट्रैवलर्स को अर्जेंट केस में रूट या डेट से समझौता करना पड़ता था
- बिजनेस और सरकारी यात्राएं प्लान करने में दिक्कतें बढ़ जाती थीं
सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने खुद माना है कि नॉर्थ-ईस्ट, खासकर मणिपुर में फ्लाइट्स की कमी और महंगे किराए की दिक्कत है, और इसको दूर करने के लिए और फ्लाइट्स जोड़ने और फेयर कैप करने पर काम हो रहा है।
स्पाइसजेट की इन नई डेली बोइंग 737 फ्लाइट्स से तीन बड़े चेंज दिख सकते हैं:
- हर दिन रेगुलर कैपेसिटी उपलब्ध रहेगी, जिससे अचानक डिमांड बढ़ने पर भी कुछ हद तक बैलेंस बना रहेगा
- अलग-अलग एयरलाइंस के बीच कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, जो आम तौर पर लॉन्ग टर्म में किराए को स्थिर या थोड़ा कम रखने में मदद करता है
- इम्फाल अब सीधे तीन बड़े शहरों से जुड़कर ज्यादा नेशनल मेनस्ट्रीम नेटवर्क का हिस्सा बनेगा
किस-किस को होगा सबसे ज़्यादा फायदा?
स्पाइसजेट ने खास तौर पर जिन पैसेंजर ग्रुप्स का जिक्र किया है, वे हैं – रेसिडेंट्स, स्टूडेंट्स, मेडिकल ट्रैवलर्स, गवर्नमेंट ऑफिशियल्स और बिजनेसमैन।
- लोकल रेसिडेंट्स और प्रवासी मणिपुरी
कई मणिपुरी लोग कोलकाता, मुंबई, पुणे, दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों में काम या पढ़ाई करते हैं। अभी तक उन्हें सीधी कनेक्टिविटी कम मिलती थी या टिकट काफी महंगा पड़ता था। मुंबई से सिंगल एयरक्राफ्ट जर्नी, और कोलकाता–गुवाहाटी से नॉन-स्टॉप फ्लाइट्स, दोनों मिलकर घर आना-जाना आसान और प्रिडिक्टेबल बना सकते हैं। - स्टूडेंट्स
नॉर्थ-ईस्ट से बाहर पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स के लिए फ्लाइट टाइमिंग और किराया दोनों मायने रखते हैं। सेमेस्टर शुरू या खत्म होने पर फ्लाइट्स फुल हो जाती हैं। डेली बोइंग 737 से अच्छी संख्या में सीट्स उपलब्ध होंगी। साथ ही मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे स्टूडेंट हब्स तक कनेक्टिविटी और मजबूत होगी, क्योंकि कोलकाता और गुवाहाटी से आगे स्पाइसजेट का नेटवर्क अच्छा फैला हुआ है। - मेडिकल ट्रैवलर्स
मणिपुर और आसपास के राज्यों के काफी मरीज प्राइवेट या सुपर स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट के लिए कोलकाता, मुंबई और दूसरे मेट्रो शहरों में जाते हैं। इनके लिए –
- सीधी या सिंगल एयरक्राफ्ट सर्विस का मतलब कम थकान
- रेगुलर डेली फ्लाइट्स का मतलब अपॉइंटमेंट्स और सर्जरी की तारीख़ के हिसाब से बेहतर प्लानिंग
- गवर्नमेंट और ऑफिशियल विजिट्स
नॉर्थ-ईस्ट में सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को लेकर लगातार सेंट्रल और स्टेट ऑफिशियल्स की मूवमेंट रहती है। बेहतर कनेक्टिविटी से ट्रिप्स प्लान करना, अचानक मीटिंग्स और सर्वे विजिट्स करना आसान होगा। - बिजनेस, MSME और टूरिज्म सेक्टर
इम्फाल और मणिपुर में हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, एग्रीकल्चर और छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। बेहतर एयर कनेक्टिविटी से:
- बिजनेस डेलीगेशन और बायर्स आसानी से आ-जा सकेंगे
- प्रॉडक्ट्स को बड़े शहरों तक पहुंचाने की लॉजिस्टिक्स प्लानिंग बेहतर होगी (भले ही एयर कार्गो डायरेक्ट न हो, लेकिन ह्यूमन नेटवर्क मजबूत होगा)
- टूरिज्म, खासकर डोमेस्टिक टूरिस्ट्स के लिए इम्फाल एक ज्यादा एक्सेसिबल डेस्टिनेशन बन सकता है
स्पाइसजेट का नॉर्थ-ईस्ट फोकस और स्ट्रेटेजिक एंगल
स्पाइसजेट काफी समय से नॉर्थ-ईस्ट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर काम कर रहा है। इससे पहले एयरलाइन ने शिलॉन्ग–दिल्ली नॉन-स्टॉप फ्लाइट, और कई UDAN रूट्स पर कनेक्टिविटी दी है।
कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर देबोज्योति (देबोजो) महार्शि ने साफ कहा है कि नॉर्थ-ईस्ट की कनेक्टिविटी हमेशा से कंपनी की प्राथमिकता रही है, और इम्फाल में पहली उड़ान शुरू करना उनके लिए एक अहम माइलस्टोन है।
इम्फाल रूट्स के साथ, स्पाइसजेट को तीन बड़े फायदे हो सकते हैं:
- नॉर्थ-ईस्ट में ब्रांड प्रेजेंस मजबूत होगी
- हाई-पोटेंशियल लेकिन अंडरसर्व्ड मार्केट में जल्दी एंट्री मिल जाएगी
- कोलकाता और गुवाहाटी जैसे हब्स को मजबूत बनाकर पूरे ईस्ट और नॉर्थ-ईस्ट नेटवर्क को बेहतर तरीके से फीड किया जा सकेगा
हालांकि, ये भी सच है कि स्पाइसजेट पिछले कुछ सालों से फाइनेंशियल प्रेशर और फ्लीट से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है – प्रमोटर होल्डिंग्स पर प्लेज, बुक वैल्यू नेगेटिव, और ऑपरेशन स्केल-अप के बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल। फिर भी कंपनी नए रूट्स लॉन्च कर रही है और 2025 के विंटर शेड्यूल में लगभग 250 रोज़ की फ्लाइट्स चलाने की तैयारी में है।
ऐसे में इम्फाल जैसे रूट्स कंपनी के लिए रेवेन्यू और नेटवर्क दोनों की दृष्टि से स्ट्रेटेजिक हैं – अगर लोड फैक्टर अच्छा रहा, तो ये रूट्स मीडियम टर्म में अच्छा कॉन्ट्रिब्यूशन दे सकते हैं।
इम्फाल एयरपोर्ट और मौजूदा एयरलाइंस पर असर
अभी इम्फाल एयरपोर्ट से इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एलायंस एयर जैसी एयरलाइंस अलग-अलग शहरों के लिए सेवाएं देती हैं।
एलायंस एयर ने भी जनवरी 2025 से इम्फाल को कोलकाता, गुवाहाटी और दीमापुर से जोड़ने के लिए नई सर्विस शुरू की है, जिसमें फेयर्स कैप्ड रखे गए हैं ताकि लोकल पैसेंजर्स पर फेयर का बोझ कम हो।
अब जब स्पाइसजेट भी बोइंग 737 जैसी बड़ी कैपेसिटी वाली मशीनों के साथ रोज़ की फ्लाइट्स शुरू करेगा, तो कुछ संभावित बदलाव दिख सकते हैं:
- कोलकाता और गुवाहाटी रूट पर कॉम्पिटिशन बढ़ेगा
- वीक पीरियड्स या नॉन-पीक डेट्स पर डिस्काउंट फेयर्स और ऑफर्स आ सकते हैं
- इम्फाल एयरपोर्ट की डेली पैसेंजर हैंडलिंग और स्लॉट मैनेजमेंट और टाइट हो जाएगा, लेकिन इससे एयरपोर्ट की इम्पॉर्टेंस भी बढ़ेगी
पैसेंजर्स के लिए प्रैक्टिकल फायदे: सफर कितना आसान होगा?
- सिंगल एयरक्राफ्ट जर्नी – बड़ा रिलिफ
मुंबई से इम्फाल जाने वालों के लिए पहले अक्सर दो बार प्लेन बदलना आम बात थी – जैसे मुंबई–कोलकाता–इम्फाल या मुंबई–गुवाहाटी–इम्फाल, वो भी अलग एयरलाइंस या अलग फ्लाइट नंबरों के साथ।
अब स्पाइसजेट के नए मॉडल में:
- पैसेंजर मुंबई से उसी प्लेन में बैठकर कोलकाता पहुंचेगा
- वहीं वो थोड़ी देर रुककर, बिना सीट/प्लेन बदले, इम्फाल की तरफ आगे उड़ जाएगा
- ट्रांजिट में सामान की चिंता कम, मिस-कनेक्शन रिस्क कम, बुजुर्ग और बच्चों के साथ सफर आसान
- डेली सर्विस – प्लानिंग में फ्लेक्सिबिलिटी
डेली फ्लाइट्स का मतलब ये है कि अब लोगों को सिर्फ वीक में 2–3 दिन ही नहीं, बल्कि लगभग हर दिन के ऑप्शन मिलेंगे। इससे:
- बिजनेस मीटिंग्स जो जल्दी-जल्दी रखनी हों, उनके लिए शेड्यूल बनाना आसान होगा
- अर्जेंट फैमिली इवेंट्स, फंक्शन या इमरजेंसी के समय ट्रैवल करना थोड़ा कम स्ट्रेसफुल होगा
- स्टूडेंट्स सेशन शुरू/खत्म होने के आसपास भीड़ के बीच किसी न किसी दिन फ्लाइट फाइनल करने का स्कोप बढ़ जाएगा
- बोइंग 737 – ज्यादा सीट, ज्यादा स्टेबिलिटी
बोइंग 737 एक फुल-साइज़ नैरो-बॉडी जेट है, जिसमें आमतौर पर 180–189 के बीच सीटें होती हैं (स्पाइसजेट अपने 737-800, 737-900ER वेरिएंट ऑपरेट करता है)।
इससे दो बड़े फायदे होते हैं:
- टर्ब्यूलेंस में छोटी प्लेनों (जैसे टर्बोप्रॉप्स) के मुकाबले ज्यादा स्टेबिल फीलिंग
- जर्नी के लिए ज्यादा सीट्स, जिससे ओवरऑल कैपेसिटी हाई रहती है और हाई डिमांड के दौरान भी कुछ सीट्स बचने का चांस बढ़ता है
नॉर्थ-ईस्ट कनेक्टिविटी पर लॉन्ग-टर्म असर
अगर ये रूट्स सफल रहते हैं, तो इम्फाल आने वाले समय में न सिर्फ एक स्टेट कैपिटल, बल्कि पूरे रीजन के लिए एक मजबूत एयर नोड बन सकता है। एलायंस एयर, इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अब स्पाइसजेट – इन सबकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि एयरलाइंस को यहां लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल नज़र आ रहा है।
लंबे समय में इसके संभावित इम्पैक्ट:
- टूरिज्म: लोकटक लेक, कांगला फोर्ट, इम्फाल वॉर सेमेट्री जैसी जगहों पर बाहर से आने वाले टूरिस्ट्स की संख्या बढ़ सकती है
- एजुकेशन: मणिपुर यूनिवर्सिटी और दूसरे कॉलेजों में बाहर से स्टूडेंट्स आने-जाने में आसानी होगी
- इकोनॉमी: छोटे और मझोले व्यापारों को नए मार्केट और इन्वेस्टर्स तक पहुंच मिलेगी
- नेशनल इंटीग्रेशन: नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच शारीरिक और मानसिक दूरी दोनों कुछ हद तक कम होंगी
SpiceJet के लिए चैलेंज क्या हैं?
जहां एक तरफ ये रूट्स स्पाइसजेट के लिए मौक़ा हैं, वहीं कुछ चुनौतियां भी हैं:
- फाइनेंशियल हेल्थ: एयरलाइन ने पिछले कुछ सालों में कैश फ्लो और डेट के मोर्चे पर काफी प्रेशर फेस किया है। ऐसे में नए रूट्स को लंबे समय तक रन कराने के लिए अच्छी फाइनेंशियल प्लानिंग जरूरी होगी।
- लोड फैक्टर: अगर लॉन्ग-टर्म में इन फ्लाइट्स में सीट्स खाली रहने लगीं, तो रूट लॉस मेकिंग हो सकता है, जिससे सर्विस बंद या फ्रीक्वेंसी घटने का रिस्क रहता है।
- ऑपरेशनल रिलायबिलिटी: नॉर्थ-ईस्ट में मौसम, विजिबिलिटी और रनवे ऑपरेशंस भी कई बार चैलेंज बनते हैं। इससे फ्लाइट्स के ऑन-टाइम परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है।
फिर भी, अगर स्पाइसजेट इन रूट्स को स्टेबल रखता है, तो ये उसके लिए भी ब्रांड और रेवेन्यू दोनों के लिहाज़ से फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां और टिप्स
जो पैसेंजर्स इन रूट्स का इस्तेमाल करेंगे, वे कुछ बातों पर ध्यान दें:
- शुरुआती महीनों में रूट स्टेबलाइज होने तक टाइमिंग और फ्रीक्वेंसी में छोटे बदलाव आ सकते हैं, इसलिए ट्रैवल से पहले फ्लाइट स्टेटस ज़रूर चेक करें
- ट्रांजिट वाली मुंबई–कोलकाता–इम्फाल जर्नी में भी कनेक्शन टाइम देखने के साथ हेल्थ और कम्फर्ट का ध्यान रखें
- नॉर्थ-ईस्ट में मानसून या फॉग सीज़न के दौरान फ्लाइट्स में देरी या रि-रूटिंग की संभावना रहती है, इसलिए इम्पॉर्टेंट इवेंट्स या मीटिंग्स के लिए एक एक्स्ट्रा बफर डे रखना बेहतर होता है
निष्कर्ष: क्या सचमुच गेम-चेंजर साबित होंगी ये फ्लाइट्स?
स्पाइसजेट की इम्फाल एंट्री सिर्फ एक एयरलाइन की न्यूज़ नहीं है, बल्कि मणिपुर और पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लिए एक बड़े कनेक्टिविटी अपग्रेड का संकेत है।
- डेली बोइंग 737 फ्लाइट्स
- कोलकाता और गुवाहाटी से नॉन-स्टॉप कनेक्शन
- मुंबई से बिना प्लेन बदले सिंगल एयरक्राफ्ट जर्नी
- और साथ ही आगे पूरे इंडिया और चुनिंदा इंटरनेशनल पॉइंट्स तक ऑनवर्ड कनेक्शन
ये सब मिलकर इम्फाल को भारत के बाकी हिस्सों से और बेहतर जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम हैं। अब आगे ये देखना होगा कि किरायों का व्यवहार कैसा रहता है, लोड फैक्टर कैसा बनता है और एयरलाइन इस रूट को कितनी स्थिरता के साथ चला पाती है।
फिलहाल के लिए इतना तय है कि 10 फरवरी 2026 के बाद मणिपुर के लोगों, स्टूडेंट्स, मरीजों, बिजनेस और टूरिस्ट्स के लिए आसमान थोड़ा और करीब और सफर थोड़ा और आसान हो जाएगा।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: स्पाइसजेट की इम्फाल के लिए नई फ्लाइट्स कब से शुरू होंगी?
उत्तर: स्पाइसजेट 10 फरवरी 2026 से इम्फाल के लिए अपनी पहली डेली फ्लाइट्स शुरू कर रहा है। ये उड़ानें कोलकाता, गुवाहाटी और मुंबई से रोज़ ऑपरेट होंगी और बोइंग 737 विमान इस्तेमाल किए जाएंगे।
प्रश्न 2: मुंबई से इम्फाल जाने पर क्या प्लेन बदलना पड़ेगा?
उत्तर: नहीं, स्पाइसजेट ने साफ कहा है कि मुंबई से इम्फाल के लिए सिंगल एयरक्राफ्ट जर्नी होगी। बीच में कोलकाता में एक शॉर्ट स्टॉपओवर रहेगा, लेकिन पैसेंजर को एयरक्राफ्ट बदलने की जरूरत नहीं होगी।
प्रश्न 3: कोलकाता और गुवाहाटी से इम्फाल की फ्लाइट्स कैसी होंगी?
उत्तर: कोलकाता–इम्फाल और गुवाहाटी–इम्फाल दोनों रूट्स पर नॉन-स्टॉप डेली फ्लाइट्स दी जाएंगी। यानी इन शहरों से इम्फाल जाने वाले पैसेंजर्स को सीधी उड़ान मिलेगी, बिना किसी रुकावट के।
प्रश्न 4: इन नई फ्लाइट्स से किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
उत्तर: मणिपुर के रेसिडेंट्स, बाहर पढ़ने या काम करने वाले स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स, मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए बड़े शहरों में जाने वाले मरीज, सरकारी अधिकारी और बिजनेस ट्रैवलर्स – सबके लिए ये रूट्स काफी मददगार साबित होंगे, क्योंकि अब ज्यादा ऑप्शन और रेगुलर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
प्रश्न 5: क्या इससे इम्फाल में टूरिज्म और बिजनेस पर भी असर पड़ेगा?
उत्तर: जी हां, बेहतर एयर कनेक्टिविटी आमतौर पर टूरिज्म, ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देती है। इम्फाल अब मुंबई जैसे बड़े मेट्रो और ईस्टर्न हब्स कोलकाता–गुवाहाटी से मजबूत तरीके से जुड़ जाएगा, जिससे टूरिस्ट्स, बायर्स और इन्वेस्टर्स का आना-जाना और आसान हो जाएगा।
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