एप्स्टीन फाइल्स में दीपक चोपड़ा का नाम: 2008 दोषी के बाद भी मीटिंग्स, ईमेल्स में ‘यंग वुमन’ टोन पर पछतावा। चोपड़ा बोले – कभी अपराध में शामिल नहीं। मिरा नायर, अनुराग कश्यप, अनिल अंबानी भी लिस्ट में। पूरा बैकग्राउंड, स्टेटमेंट व केस डिटेल्स।
मिरा नायर, अनुराग कश्यप भी एप्स्टीन फाइल्स में? चोपड़ा का सफाई स्टेटमेंट व पूरा केस
दीपक चोपड़ा का एप्स्टीन फाइल्स पर जवाब: “मैं कभी शामिल नहीं था”
वेलनेस और स्पिरिचुअल गुरु दीपक चोपड़ा का नाम हाल ही में जेफ्री एप्स्टीन फाइल्स में आया तो दुनिया भर में चर्चा छिड़ गई। एप्स्टीन एक कुख्यात अमेरिकी फाइनेंसर था जो नाबालिग लड़कियों के सेक्स ट्रैफिकिंग और एब्यूज़ के आरोप में दोषी ठहराया गया। चोपड़ा ने 4 फरवरी 2026 को एक्स पर स्टेटमेंट जारी कर साफ कहा कि वे कभी किसी अपराधी या शोषणकारी गतिविधि में शामिल नहीं थे। उन्होंने पीड़ितों के दर्द पर दुख जताया और पुराने ईमेल्स के टोन पर पछतावा भी व्यक्त किया। ये फाइल्स कोर्ट दस्तावेज़, ईमेल्स, फ्लाइट लॉग्स का कलेक्शन हैं जो एप्स्टीन और उनकी पार्टनर गिस्लेन मैक्सवेल के केस से जुड़े। चोपड़ा के अलावा मिरा नायर, अनुराग कश्यप जैसे भारतीय नाम भी सामने आए। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझें।
एप्स्टीन केस का पूरा बैकग्राउंड: सेक्स ट्रैफिकिंग का काला साम्राज्य
जेफ्री एप्स्टीन एक अमीर निवेशक था जिसने 1990 के दशक से नाबालिग लड़कियों को सेक्स के लिए ट्रैफिक करने का नेटवर्क खड़ा किया। उसके प्राइवेट आइलैंड, न्यूयॉर्क और फ्लोरिडा प्रॉपर्टीज़ पर हाई–प्रोफाइल लोग आते थे। 2008 में फ्लोरिडा कोर्ट ने इसे स्वीकार किया और 13 महीने जेल हुई लेकिन डील से बच निकला। 2019 में फिर अरेस्ट हुआ, जेल में सुसाइड। गिस्लेन मैक्सवेल 2021 में दोषी ठहराई गई। फाइल्स 2024–2026 में जारी हुईं – हजारों पेज कोर्ट रिकॉर्ड्स, गवाह स्टेटमेंट्स, ईमेल्स, फोन लॉग्स। इनमें बिल क्लिंटन, प्रिंस एंड्र्यू जैसे नाम आए लेकिन नाम का मतलब अपराधी होना नहीं। चोप्रा का नाम ईमेल्स में आया। ये फाइल्स मैक्सवेल ट्रायल और एप्स्टीन केस से जुड़ी। पीड़ितों के नाम गुप्त रखे गए लेकिन संपर्कों की लिस्ट पब्लिक।
दीपक चोप्रा का एप्स्टीन से कनेक्शन: मीटिंग्स और ईमेल्स
फाइल्स में चोपड़ा का नाम कई जगह आया। रिपोर्ट्स कहती हैं कि 2008 दोषी होने के बाद भी चोपड़ा ने एप्स्टीन से कई बार मुलाक़ात की। 2016 के ईमेल्स सामने आए जिनमें चोप्रा ने लिखा कि उन्हें “यंगर, इंटेलेक्चुअली शार्प एंड सेल्फ–अवेयर विमेन” का साथ अच्छा लगता है ताकि उन्हें इंस्पायर कर सकें। एक ईमेल में डोनाल्ड ट्रंप पर मुक़दमे की न्यूज़ शेयर की। ट्रंप की तत्कालीन पत्नी मार्ला मैपल्स का ज़िक्र भी। चोप्रा ने सफाई दी कि संपर्क सीमित था और शोषण से असंबंधित। उन्होंने टोन पर खेद जताया कि आज वो पढ़ने पर गलत लगते हैं। चोप्रा ने कहा उनका फोकस अकाउंटेबिलिटी और सर्वाइवर्स सपोर्ट पर है। ये ईमेल्स एप्स्टीन के प्राइवेट सर्वर से रिकवर हुए।
चोपड़ा का पूरा स्टेटमेंट: पीड़ितों के दर्द पर दुख
4 फरवरी को एक्स पर चोप्रा ने लिखा – “मैं इस केस के पीड़ितों के दुख से गहरे दुखी हूँ। मैं हर तरह के एब्यूज़ और शोषण की कड़ी निंदा करता हूँ। साफ़ कहूँ – मैं कभी किसी क्रिमिनल या एक्सप्लॉइटेटिव एक्टिविटी में शामिल नहीं था। मेरा कोई संपर्क सीमित और बेज़रूरी था। कुछ पुराने ईमेल्स टोन में गलत थे, उस पर पछतावा है। मेरा फोकस अकाउंटेबिलिटी, प्रिवेंशन और सर्वाइवर्स प्रोटेक्शन पर रहेगा।” ये स्टेटमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। चोप्रा ने महर्षि महेश योगी से मिलने के बाद हॉस्पिटल मेडिसिन छोड़ वेलनेस में शिफ्ट किया। उनके लाखों फॉलोअर्स हैं।
अन्य भारतीय नाम: मिरा नायर से अनिल अंबानी तक
फाइल्स में कई भारतीय चेहरे आए। फिल्ममेकर मिरा नायर का नाम संपर्क लिस्ट में। अनुराग कश्यप, नंदिता दास भी मेंशन। बिजनेसमैन अनिल अंबानी का नाम फोन रिकॉर्ड्स में। इनका मतलब अपराध में शामिल होना नहीं बल्कि संपर्क होना। अनुराग कश्यप पर कोई स्पेसिफिक डिटेल नहीं। मिरा नायर ने कोई कमेंट नहीं किया। अंबानी ग्रुप ने सफाई दी कि बिजनेस कनेक्शन था। ये नाम आने से भारत में चर्चा तेज़। मीडिया ने इसे लिंक किया लेकिन लीगल एंगल क्लियर नहीं। फाइल्स में नाम का मतलब गवाही या संपर्क।
चोप्रा की सफाई पर रिएक्शन्स: समर्थक vs आलोचक
चोप्रा के स्टेटमेंट पर उनके फैंस ने सपोर्ट किया। कहा संपर्क प्रोफेशनल था। वेलनेस कम्युनिटी ने कहा पुराने ईमेल्स का टोन आज गलत लगे। लेकिन आलोचकों ने सवाल उठाए – 2008 दोषी के बाद क्यों संपर्क? यंग वुमन वाला ईमेल संदिग्ध। सोशल मीडिया पर मीम्स चले। चोप्रा के किताबें, लेक्चर्स पर असर पड़ा। वेलनेस इंडस्ट्री में ये पहला बड़ा कंट्रोवर्सी। उनके फाउंडेशन ने कहा फोकस हीलिंग पर रहेगा।
एप्स्टीन फाइल्स का मतलब: नाम का अपराधी होना नहीं
फाइल्स रिलीज़ से साफ़ – नाम का मतलब गुनहगार होना नहीं। ये संपर्क, ईमेल्स हैं। क्लिंटन, गेट्स जैसे नाम आए लेकिन चार्जशीट नहीं। चोप्रा का केस भी यही। लीगल एक्सपर्ट्स कहते हैं बिना चार्ज के सिर्फ़ स्पेकुलेशन। लेकिन पब्लिक इमेज पर असर पड़ता। चोप्रा ने इसे हैंडल करने की कोशिश की। पीड़ितों पर फोकस रखा।
दीपक चोप्रा कौन हैं: वेलनेस गुरु की जर्नी
चोप्रा भारत में पैदा हुए डॉक्टर। 1985 में महर्षि से मिले, मेडिसिन छोड़ स्पिरिचुअलिटी। 90 किताबें बिक चुकीं। ओपरा, क्लिंटन से दोस्ती। वेलनेस इंडस्ट्री के पायनियर। चोप्रा सेंटर चलाते। ये कंट्रोवर्सी उनकी इमेज चैलेंज। लेकिन स्टेटमेंट से डैमेज कंट्रोल की कोशिश।
फाइल्स का भविष्य: और नाम आएंगे?
फाइल्स रिलीज़ जारी। मैक्सवेल अपील पेंडिंग। और ईमेल्स, लॉग्स आ सकते। भारतीयों पर नज़र। चोप्रा जैसे सेलेब्रिटीज़ को सावधान रहना। केस पीड़ितों के जस्टिस पर।
5 FAQs
प्रश्न 1: दीपक चोप्रा का एप्स्टीन फाइल्स से क्या कनेक्शन?
उत्तर: फाइल्स में चोपड़ा का नाम ईमेल्स और मीटिंग्स में आया। 2008 दोषी के बाद भी संपर्क। लेकिन चोप्रा बोले कभी अपराध में शामिल नहीं।
प्रश्न 2: चोप्रा के ईमेल्स में क्या लिखा था?
उत्तर: 2016 ईमेल्स में यंगर इंटेलेक्चुअल विमेन का साथ अच्छा लगने की बात। ट्रंप मुक़दमे का ज़िक्र। चोप्रा ने टोन पर पछतावा जताया।
प्रश्न 3: एप्स्टीन फाइल्स क्या हैं?
उत्तर: एप्स्टीन–मैक्सवेल केस के कोर्ट दस्तावेज़, ईमेल्स, लॉग्स। सेक्स ट्रैफिकिंग से जुड़े। नाम संपर्क दिखाते अपराध साबित नहीं।
प्रश्न 4: अन्य भारतीय कौन नाम आए?
उत्तर: मिरा नायर, अनुराग कश्यप, नंदिता दास, अनिल अंबानी। कोई चार्ज नहीं बस मेंशन।
प्रश्न 5: चोप्रा का स्टेटमेंट क्या कहता है?
उत्तर: पीड़ितों पर दुख, अपराध निंदा। संपर्क सीमित। ईमेल टोन पर खेद। फोकस अकाउंटेबिलिटी पर।
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