अमेरिका और रूस ने 4 साल बाद अबू धाबी में हाई लेवल मिलिट्री डायलॉग बहाल करने पर सहमति जताई। यूक्रेन युद्ध से पहले 2021 में बंद चैनल फिर खुलेगा। यूरोपियन कमांड कमांडर की मीटिंग, न्यूक्लियर मिसकैल्कुलेशन रोकना, यूक्रेन चीन पर असर। पूरा बैकग्राउंड।
रूस–अमेरिका 2021 से बंद चैनल फिर खुला: यूक्रेन, चीन और ग्लोबल सिक्योरिटी पर असर
अमेरिका–रूस हाई लेवल मिलिट्री डायलॉग बहाल: 4 साल बाद अबू धाबी में बड़ा समझौता
दुनिया की दो महाशक्तियों अमेरिका और रूस के बीच तनाव चरम पर होने के बावजूद एक सकारात्मक खबर आई है। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने उच्च स्तरीय सैन्य–सैन्य संवाद बहाल करने पर सहमति जताई है। यह चैनल 2021 के अंत में यूक्रेन पर रूसी हमले से ठीक पहले बंद हो गया था। अमेरिकी यूरोपियन कमांड ने बयान जारी कर कहा कि जनरल एलेक्सस जी ग्रिंकेविच की अगुवाई में रूसी और यूक्रेनी अधिकारियों से बात हुई। यह कदम परमाणु या पारंपरिक संघर्ष में गलतफहमी रोकने के लिए अहम माना जा रहा है। वैश्विक तनाव के दौर में यह डिप्लोमेसी का संकेत है।
2021 से बंद चैनल का इतिहास: यूक्रेन युद्ध की शुरुआत
यह संवाद 2021 के पतझड़ में बंद हुआ जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया। तब दोनों देशों के बीच सैन्य संचार पूरी तरह ठप हो गया। अमेरिका ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए और NATO ने यूरोप में अपनी तैनाती बढ़ाई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे पश्चिमी आक्रमण बताया जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे यूरोपीय सुरक्षा के लिए खतरा कहा। इस दौरान कई घटनाएँ हुईं जहाँ अमेरिकी और रूसी विमान या जहाज़ करीब आ गए लेकिन संवाद न होने से जोखिम बढ़ा। अबू धाबी मीटिंग इसी गलतफहमी को दूर करने का प्रयास है। यह पहली बार नहीं जब तनाव के बीच दोनों ने बातचीत की कोशिश की।
अबू धाबी मीटिंग का पूरा विवरण: जनरल ग्रिंकेविच की भूमिका
अमेरिकी यूरोपियन कमांड के कमांडर जनरल एलेक्सस जी ग्रिंकेविच ने अबू धाबी में रूसी उच्च अधिकारियों से मुलाक़ात की। इसमें यूक्रेनी प्रतिनिधि भी शामिल थे। मीटिंग का मकसद उच्च स्तरीय सैन्य संवाद फिर शुरू करना था। अमेरिकी बयान में कहा गया कि यह चैनल 2021 के यूक्रेन संघर्ष से ठीक पहले बंद हुआ था। अब बहाली से दोनों पक्ष आपस में जोखिम भरी स्थितियों पर तुरंत बात कर सकेंगे। UAE ने न्यूट्रल जगह प्रदान की। ग्रिंकेविच यूरोप में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन्स के प्रमुख हैं। उनकी भूमिका यूरोप–एशिया सीमा पर तैनाती मैनेज करने में अहम है।
परमाणु मिसकैल्कुलेशन रोकना: क्यों ज़रूरी
सैन्य संवाद बहाल करने का सबसे बड़ा मकसद परमाणु हथियारों या पारंपरिक संघर्ष में गलतफहमी रोकना है। 2021 से बंद चैनल के कारण कई बार रूसी बमवर्षक अमेरिकी जहाज़ के ऊपर से गुज़रे या ब्लैक सी में टकराव की नौबत आई। ऐसे हालात में तुरंत हॉटलाइन न होने से एस्केलेशन का खतरा रहता। अब उच्च स्तरीय डायलॉग से कमांडर आपस में बात कर सकेंगे। विशेषज्ञ कहते हैं कि यूक्रेन युद्ध में रूस के न्यूक्लियर धमकी के बाद ये कदम शांति की दिशा में है। वैश्विक शांति के लिए अमेरिका–रूस संवाद अनिवार्य माना जाता।
यूक्रेन युद्ध पर संभावित असर: शांति वार्ता को बूस्ट?
यह समझौता यूक्रेन युद्ध पर सीधा असर डाल सकता है। रूस ने दावा किया कि उसके विशेष अभियान सफल हो रहे जबकि यूक्रेन अमेरिकी हथियारों से लड़ रहा। संवाद बहाल होने से आपसी तनाव कम हो सकता। हालांकि दोनों पक्षों ने यूक्रेन पर सीधी बातचीत का ज़िक्र नहीं किया। अमेरिका ने कहा कि डायलॉग सैन्य जोखिम कम करने के लिए है। रूस ने इसे सकारात्मक बताया। शांति वार्ता तुर्की या अन्य जगहों पर चल रही हैं। यह कदम उन वार्ताओं को मज़बूती दे सकता। यूरोप में ऊर्जा संकट भी कम हो सकता।
चीन ताइवान पर ग्लोबल इम्प्लिकेशन्स
अमेरिका–रूस डायलॉग बहाली का असर चीन–ताइवान तनाव पर भी पड़ सकता। रूस चीन का करीबी सहयोगी है। अमेरिका इंडो–पैसिफिक में चीन को घेर रहा। संवाद से रूस अमेरिका को चीन पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता। वैश्विक सिक्योरिटी आर्किटेक्चर में बदलाव। NATO ने स्वागत किया। भारत जैसे तटस्थ देशों के लिए अच्छा। बहुपक्षीय फोरम में बातचीत बढ़ेगी।
अमेरिकी राजनीति का एंगल: ट्रंप vs बाइडेन अप्रोच
यह समझौसा बाइडेन प्रशासन का है। 2024 चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप जीत चुके हैं। ट्रंप रूस के साथ सॉफ्ट अप्रोच रखते हैं। उन्होंने यूक्रेन को हथियार रोकने की बात कही। नया डायलॉग ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन को विरासत देगा। बाइडेन ने इसे स्ट्रेटेजिक मूव बताया। रूस ने इसे म्यूचुअल बेनिफिट कहा।
वैश्विक प्रतिक्रियाएँ: NATO यूरोप की चिंता
NATO ने डायलॉग का स्वागत किया लेकिन सावधानी बरतने को कहा। यूक्रेन ने कहा कि ये उनका मुद्दा प्रभावित नहीं करेगा। यूरोपीय संघ ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। चीन ने न्यूट्रल रहने का संकेत दिया। भारत ने शांति वार्ता का समर्थन किया। विशेषज्ञों ने इसे कोल्ड वॉर के बाद पहला बड़ा कदम बताया।
5 FAQs
प्रश्न 1: अमेरिका–रूस ने मिलिट्री डायलॉग क्यों बहाल किया?
उत्तर: अबू धाबी में जनरल ग्रिंकेविच की मीटिंग के बाद। 2021 यूक्रेन युद्ध से बंद चैनल फिर खुला। गलतफहमी रोकने के लिए।
प्रश्न 2: डायलॉग कब बंद हुआ था?
उत्तर: 2021 पतझड़ में यूक्रेन आक्रमण से ठीक पहले। अब 4 साल बाद बहाल।
प्रश्न 3: यूक्रेन युद्ध पर असर क्या होगा?
उत्तर: तनाव कम हो सकता। शांति वार्ता को बूस्ट। लेकिन सीधी बातचीत का ज़िक्र नहीं।
प्रश्न 4: अबू धाबी मीटिंग में कौन शामिल था?
उत्तर: अमेरिकी यूरोपियन कमांड कमांडर ग्रिंकेविच, रूसी और यूक्रेनी अधिकारी। UAE न्यूट्रल जगह।
प्रश्न 5: वैश्विक असर क्या?
उत्तर: परमाणु जोखिम कम। चीन ताइवान पर प्रभाव। NATO ने स्वागत किया।
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