नोएडा सेक्टर 150 में टेकी युवराज मेहता की ग्रैंड विटारा को 20 फीट गहरे पानी से निकाला गया। 2 घंटे तक मदद मांगी लेकिन बच न सके। एसआईटी जांच में गाड़ी महत्वपूर्ण सुराग देगी। लापरवाही का खुलासा।
नोएडा सेक्टर 150 हादसा: एनडीआरएफ ने निकाली कार, एसआईटी को मिलेगी बड़ी क्लू!
नोएडा टेकी हादसा: 20 फीट गहरे गड्ढे से निकली युवराज मेहता की गाड़ी, अब खुलेगा लापरवाही का राज
नोएडा के सेक्टर 150 में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया। 27 साल के युवराज मेहता 16-17 जनवरी की रात को घने कोहरे में अपनी मारुति ग्रैंड विटारा चला रहे थे। अचानक गाड़ी फिसली, टूटी नाले की दीवार तोड़कर 20 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में समा गई। वो करीब दो घंटे तक मदद मांगते रहे, फोन की लाइट जलाकर सिग्नल देते रहे। पुलिस-फायर ब्रिगेड पहुंची लेकिन डाइवर्स और भारी मशीनरी के अभाव में बचा नहीं सके। शनिवार को एनडीआरएफ ने शव बरामद किया, मंगलवार शाम को क्रेन से गाड़ी बाहर निकाली गई।
ये गड्ढा किसी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट के लिए खोदा गया था। महीनों से खुला पड़ा, पानी भर गया। आसपास कोई चेतावनी साइनबोर्ड नहीं, टूटी दीवार। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में कोहरा इतना घना था कि कुछ दिख ही नहीं रहा था। युवराज अपने घर के करीब थे, शायद ड्यूटी से लौट रहे। गाड़ी में घुसते ही डूबने लगी। वीडियो फुटेज में धुंध में फोन लाइट की हल्की चमक दिखती है। गवाहों ने कहा, ‘भाई साहब चिल्ला रहे थे लेकिन कोई पहुंच न सका।’
मंगलवार को एनडीआरएफ, फायर डिपार्टमेंट ने मिलकर ऑपरेशन चलाया। गड्ढे में गाढ़ा कीचड़, लोहे की रॉड्स, 20 फीट पानी। नावें, बड़े चुंबक, क्रेन लगे। दो दर्जन जवान लगे। शाम 6:30 बजे ग्रैंड विटारा बाहर आई- कीचड़ से सनी, खरपतवार लिपटी। अब ये गाड़ी जांच में अहम होगी। स्पीड, ब्रेक, टायर कंडीशन सब पता चलेगा। पुलिस बोली, बीएनएस की धारा 105, 106, 281 के तहत एफआईआर दर्ज। दो और बिल्डर गिरफ्तार।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को एसआईटी गठित की। हेड- मेरठ जोन एडीजी भानु भaskar, मेरठ डिविजनल कमिश्नर भानु चंद्रा गोस्वामी, पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर अजय वर्मा। 5 दिन में रिपोर्ट। भaskar बोले, ‘सिविक अथॉरिटी, पुलिस, इमरजेंसी सर्विसेज की भूमिका जांचेंगे। किसकी गलती, क्या बचाव हो सकता था। पीड़ित पिता से बात करेंगे।’ सीएम योगी आदित्यनाथ ने नोएडा अथॉरिटी सीईओ लोकेश एम को हटा दिया। जनता में गुस्सा भरा है।
युवराज के पिता का दर्द सुनकर आंसू आ जाते हैं। बोले, ‘मैं पुलिस संग पहुंचा लेकिन बेटा डूब चुका। एक्सपर्ट डाइवर्स होते तो बच जाता। दो घंटे चीखा लेकिन…’ परिवार दिल्ली-एनसीआर में रहता। युवराज सिंगल, मेहनती। आईटी कंपनी में काम। दोस्तों ने बताया, रात 12 बजे के करीब एक्सीडेंट। कोहरा, स्पीड, टूटी दीवार। प्रीलिमिनरी रिपोर्ट में लो विजिबिलिटी और हाई स्पीड। लेकिन बिल्डर की लापरवाही साफ।
नोएडा जैसे स्मार्ट सिटी में ऐसा हादसा शर्मनाक। सेक्टर 150 तेजी से बढ़ रहा। कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सुरक्षा ढीली। खुली खुदाई, बिना बैरिकेडिंग। पानी भरना आम। जनवरी में कोहरा तो होता ही। नोएडा अथॉरिटी पर सवाल। क्या नियम फॉलो होते? एनजीटी गाइडलाइंस? रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के नाम पर गड्ढे? स्थानीय बोले, ‘ये साइट महीनों से वैसी ही। बच्चे खेलते, कुत्ते गिरते।’
ऐसी घटनाओं की लिस्ट लंबी। 2024 में ही नोएडा में दो मौतें खुली नाली में। गाजियाबाद में बच्चा डूबा। सेफ्टी ऑडिट क्यों नहीं? बिल्डर मुनाफे में, अथॉरिटी सोई। एसआईटी रिपोर्ट से उम्मीद। दोषी पाए तो सजा। पीड़ित परिवार को न्याय।
नोएडा हादसे के प्रमुख तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पीड़ित | युवराज मेहता, 27 साल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर |
| वाहन | मारुति ग्रैंड विटारा (ग्रे) |
| जगह | सेक्टर 150, नोएडा, कमर्शियल बेसमेंट साइट |
| गहराई | 20 फीट, पानी भरा |
| रेस्क्यू | एनडीआरएफ, क्रेन, चुंबक, नावें |
| जांच | एसआईटी, 5 दिन रिपोर्ट |
| कार्रवाई | सीईओ हटाए, 2 बिल्डर गिरफ्तार |
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- युवराज मेहता की मौत कैसे हुई?
कोहरे में गाड़ी फिसली, टूटी दीवार तोड़ 20 फीट गहरे पानी गड्ढे में गिरी। 2 घंटे मदद मांगी लेकिन रेस्क्यू लेट। - गाड़ी कब निकाली गई?
मंगलवार शाम 6:30 बजे। एनडीआरएफ, क्रेन से। कीचड़-खरपतवार से भरी। जांच में क्लू देगी। - एसआईटी क्या करेगी?
5 दिन में रिपोर्ट। अथॉरिटी, पुलिस, बिल्डर की लापरवाही जांच। पिता से बात। - कौन जिम्मेदार?
टूटी वॉल, बिना साइन गड्ढा, रेस्क्यू देरी। सीईओ हटाया, बिल्डर अरेस्ट। - वीडियो में क्या दिखा?
फोन लाइट की चमक, कोहरे में सिग्नल। युवराज जिंदा थे लंबे समय।
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