AIMIM चीफ ओवैसी ने छत्रपति संभाजीनगर रैली में आरएसएस के आजादी संग्राम रोल पर सवाल उठाए। हेडगेवार की जेल खलीफत समर्थन के लिए बताई। बांग्लादेशी मुद्दे पर बीजेपी को घेरा। नगर निगम चुनाव से पहले बड़ा बयान।
बांग्लादेशी मुद्दे पर ओवैसी का तंज: आरएसएस को इतिहास पढ़ाओ, हेडगेवार की जेल की सच्चाई!
ओवैसी का आरएसएस पर जोरदार हमला: आजादी की लड़ाई में जेल गए लीडर कौन, हेडगेवार का खुलासा
छत्रपति संभाजीनगर की रैली में AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस के आजादी संग्राम में योगदान पर बड़ा सवाल उठाया। 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले ये बयान सुर्खियों में है। ओवैसी ने कहा कि आरएसएस कोई ऐसा लीडर बताए जो ब्रिटिश राज के खिलाफ लड़ते हुए जेल गया हो। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जिक्र किया और कहा कि वो जेल इसलिए गए क्योंकि उन्होंने खलीफत मूवमेंट का समर्थन किया था, न कि अंग्रेजों के खिलाफ।
ओवैसी ने रैली में जोश भरे लहजे में कहा, ‘आरएसएस हमें देशभक्ति का ज्ञान देता है, लेकिन क्या उनके किसी स्वयंसेवक ने ब्रिटिश के खिलाफ जान गंवाई?’ उन्होंने मुंबई के समाजवादी लीडर यूसुफ मेहरअली का नाम लिया, जिन्होंने ‘क्विट इंडिया’ और ‘साइमन गो बैक’ जैसे नारे दिए। ओवैसी का आरोप था कि आरएसएस इतिहास नहीं पढ़ता और लोगों को बांग्लादेशी ठहरा देता है। आज वो मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं, जबकि हेडगेवार ने खलीफत का साथ दिया था।
खलीफत मूवमेंट क्या था? 1919 से 1924 तक चला ये आंदोलन मुसलमानों का था, जिसमें ओटोमन सुल्तान को इस्लाम का खलीफा बनाए रखने के लिए ब्रिटिश पर दबाव बनाया गया। महात्मा गांधी ने भी इसका समर्थन किया था। हेडगेवार 1921 में इसकी वजह से जेल गए थे। आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई, जब स्वतंत्रता संग्राम जोर पकड़ चुका था। ब्रिटिश दस्तावेजों में लिखा है कि आरएसएस ने कभी आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया।
ओवैसी ने बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेरा। कहा कि इलाके में कोई बांग्लादेशी नहीं है। अगर हैं तो मोदी सरकार की नाकामी। पुलिस, इंटेलिजेंस और बॉर्डर कंट्रोल होने के बावजूद बांग्लादेश बॉर्डर पर 10 किमी फेंसिंग भी पूरी नहीं। ‘चीन और आईएसआई बांग्लादेश पहुंच गए, लेकिन बीजेपी यहां बांग्लादेश-बांग्लादेश चिल्लाती है।’ ये हिंदुतवा एजेंडे से ध्यान भटकाने का तरीका है। गवर्नेंस फेलियर छुपाने को।
महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर ओवैसी ने वोटिंग का आह्वान किया। बोले, भारी वोटिंग से साबित हो जाएगा कि लोग एक्टिव हैं। नागरिकता का फैसला होम मिनिस्ट्री का है, सिटिजनशिप एक्ट के मुताबिक। लेकिन मोदी सरकार ने इसे इलेक्शन कमीशन पर डाल दिया। पूर्व AIMIM सांसद इम्तियाज जलील ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के दावे पर चैलेंज दिया। शिंदे बोले AIMIM चुनाव में खत्म हो जाएगी, तो जलील ने कहा- अगर ऐसा हुआ तो दाढ़ी मुंडवा लूंगा, वरना शिंदे तैयार रहें।
ऐसे बयान नये नहीं। ओवैसी पहले भी आरएसएस को आजादी संग्राम से दूर बताते रहे। 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के आरएसएस प्रशंसा पर तंज कसा था। कहा था कि आरएसएस ब्रिटिश की परछाईं में रहा, फ्रीडम फाइटर्स से ज्यादा नफरत करता था। आरएसएस के ‘ऑर्गनाइजर’ मैगजीन ने 1947 में तिरंगे को अशुभ कहा, 1949 में मनुस्मृति को संविधान बताया। एमएस गोलवलकर ने मुसलमानों-ईसाइयों को आंतरिक खतरा कहा।
आरएसएस का पक्ष क्या कहता है? संघ दावा करता है कि उसके हजारों स्वयंसेवक जेल गए, भूमिगत रहे। हेडगेवार ने दांडी यात्रा में हिस्सा लिया। लेकिन आलोचक कहते हैं कि संस्था के रूप में आरएसएस ने क्विट इंडिया, नॉन कोऑपरेशन जैसे आंदोलनों का विरोध किया। गुरु Golwalkar ने शाखाओं से दूर रहने को कहा। ब्रिटिश ने आरएसएस को गैर-राजनीतिक माना।
ऐतिहासिक तथ्य
- आरएसएस स्थापना: 1925, नागपुर।
- हेडगेवार जेल: 1921 (खलीफत), 1931 (जंगल सत्याग्रह), 1932 (गुजरात नमक सत्याग्रह)।
- क्विट इंडिया 1942: आरएसएस ने आधिकारिक तौर पर हिस्सा नहीं लिया।
- स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, लेकिन संगठन ने ब्रिटिश से दूरी नहीं तोड़ी।
आजादी संग्राम के प्रमुख आंदोलन और आरएसएस
| आंदोलन | साल | आरएसएस की भूमिका |
|---|---|---|
| नॉन-कोऑपरेशन | 1920-22 | हेडगेवार व्यक्तिगत हिस्सा |
| सिविल डिसओबीडिएंस | 1930-34 | हेडगेवार जेल गए |
| क्विट इंडिया | 1942 | आधिकारिक बहिष्कार |
| खलीफत | 1919-24 | हेडगेवार समर्थन |
ओवैसी के बयान का राजनीतिक संदर्भ
महाराष्ट्र लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद अब नगर निगम। AIMIM मुस्लिम वोट बैंक पर फोकस। बीजेपी बांग्लादेशी मुद्दा उठाकर हिंदुत्व ध्रुवीकरण। शिंदे की चुनौती का जवाब। वोटिंग पर जोर।
बांग्लादेश बॉर्डर विवाद
- 4000 किमी लंबी सीमा।
- फेंसिंग 98% पूरी, लेकिन रखरखाव मुद्दा।
- रोहिंग्या, बांग्लादेशी घुसपैठ के दावे।
- ओवैसी: सरकार की नाकामी।
ऐसे विवादों का असर
- इतिहास की राजनीति तेज।
- चुनावी ध्रुवीकरण।
- मुस्लिम वोट एकजुट।
- आरएसएस-BJP जवाब देगा।
ओवैसी का ये बयान महाराष्ट्र चुनावी माहौल गर्म कर रहा। क्या आरएसएस इतिहास पर सफाई देगा? वोटर्स का रिएक्शन क्या? समय बताएगा। लेकिन इतिहास के पन्ने हर बार खुलते हैं।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- ओवैसी ने आरएसएस के बारे में क्या कहा?
आरएसएस का आजादी में कोई योगदान नहीं। हेडगेवार खलीफत के समर्थन में जेल गए। कोई स्वयंसेवक शहीद नहीं। - खलीफत मूवमेंट क्या था?
1919-24 का मुस्लिम आंदोलन, ओटोमन खलीफा बचाने को। गांधी ने समर्थन किया। - बांग्लादेशी मुद्दे पर ओवैसी का स्टैंड?
इलाके में कोई नहीं। अगर हैं तो मोदी सरकार फेल। बीजेपी ध्यान भटकाती। - इम्तियाज जलील ने शिंदे को क्या चैलेंज दिया?
AIMIM खत्म हुई तो दाढ़ी मुंडवाएंगे, वरना शिंदे तैयार रहें। - नगर निगम चुनाव कब?
15 जनवरी 2026 को छत्रपति संभाजीनगर। भारी वोटिंग का आह्वान।
- AIMIM Chhatrapati Sambhajinagar rally
- Bangladeshi migrants narrative
- BJP Hindutva agenda
- Hedgewar Khilafat movement
- Indian independence RSS contribution
- Maharashtra municipal polls 2026
- Modi government border failure
- Owaisi RSS controversy
- Owaisi Shinde challenge
- Quit India Yusuf Meherally
- RSS freedom struggle role
- RSS history debate
Leave a comment