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Samrat Ashoka का प्रेरक वचन: दूसरों के मत सुनने की कला – आज का प्रेरणा उद्धरण!

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Samrat Ashoka
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Samrat Ashoka का आज का उद्धरण: “सभी सुनें और दूसरों के प्रचारित सिद्धांतों को सुनने को तैयार रहें।” धम्म नीति का मूल – सहिष्णुता, श्रवण कला और सामाजिक सद्भाव।

Samrat Ashoka का अमर वचन: दूसरों के सिद्धांत सुनने की कला

“सभी सुनें, और दूसरों के प्रचारित सिद्धांतों को सुनने को तैयार रहें।” – सम्राट अशोक। कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाने वाले इस महान सम्राट ने धम्म नीति के माध्यम से विश्व को सहिष्णुता का संदेश दिया। शिलालेख 12 में दर्ज यह वचन आज के विभाजित समाज के लिए विशेष प्रासंगिक। अशोक कहते हैं – सुनना समझ का प्रथम चरण है, न कि विजय का हथियार।

अशोक के धम्म का मूल सिद्धांत
युद्ध से धर्मप्रेमी शासक बने अशोक ने 33 शिलालेखों में धम्म के सिद्धांत उत्कीर्ण करवाए। सभी धर्मों का सम्मान और श्रवण कला धम्म के आधार स्तंभ। अशोक का मानना था – अपने धर्म की प्रशंसा और दूसरों की निंदा दोनों ही नुकसानदायक। सत्य संवाद ही सामाजिक सद्भाव का आधार।

आज के संदर्भ में अशोक वचन का महत्व
लिस्ट: आधुनिक प्रासंगिकता

  • सोशल मीडिया युग में सुनने की कमी
  • विभाजनकारी राजनीति में ध्रुवीकरण
  • धार्मिक कट्टरता का सामना
  • कार्यस्थल विवाद निपटान
  • परिवार संवाद सुधार

अशोक शिलालेख 12 का पूरा संदेश
“सभी अपने धर्म को बढ़ाने के इच्छुक हैं। लेकिन जो अति भक्ति से अपने धर्म की प्रशंसा करता और दूसरों का अपमान करता, वह अपने धर्म को ही हानि पहुंचाता। इसलिए संपर्क अच्छा है। दूसरों के सिद्धांतों को सुनें और सम्मान करें।”

श्रवण कला के 5 सिद्धांत
टेबल: अशोक से आधुनिक श्रवण कला

अशोक सिद्धांतआधुनिक अनुप्रयोगलाभ
सुनने को तैयार रहेंसक्रिय श्रवणसमझ बढ़ेगी
पूर्वाग्रह त्यागेंखुले मन सेसंघर्ष कम
सम्मान देंगरिमा मान्यतासद्भाव
संवाद करेंबहुदृष्टिकोणप्रगति
धैर्य रखेंत्वरित प्रतिक्रिया न देंबुद्धिमत्ता 

अशोक का जीवन दर्शन
कलिंग युद्ध के बाद (261 BCE) 1 लाख हताहतों से व्यथित अशोक ने विजय नहीं, संयम को अपनाया। साम्राज्य विस्तार छोड़ धम्म विजय का मार्ग। सभी प्रजा को माता-पिता सम्मानगरीबों को दानसभी धर्मों का आदर सिखाया।

आज कैसे अपनाएं अशोक वचन
लिस्ट: प्रैक्टिकल टिप्स

  1. बात बीच में न काटें – पूरा सुनें
  2. प्रश्न पूछें – समझने के लिए
  3. जजमेंट स्थगित – पूर्वधारणा न रखें
  4. सम्मान भाषा – गरिमापूर्ण संवाद
  5. चुप्पी का अभ्यास – प्रतिक्रिया से पहले विराम

अशोक की धम्म नीति के अन्य सुविचार

  • “सुख का मार्ग संयम है।”
  • “प्रजा का हित राजा का धर्म।”
  • “सभी प्राणियों पर दया।”
  • “धम्म यात्रा युद्ध विजय से श्रेष्ठ।”

FAQs

अशोक का यह प्रसिद्ध उद्धरण कहां मिलता है?
शिलालेख 12 में। धम्म नीति का मूल सिद्धांत।

अशोक के अनुसार सुनना क्यों जरूरी?
सामाजिक सद्भाव और धार्मिक सहिष्णुता के लिए।

आज इस वचन का क्या महत्व?
विभाजित समाज में संवाद और समझ का संदेश।

अशोक धम्म नीति क्या थी?
सभी धर्म सम्मान, नैतिक आचरण, प्रजा कल्याण।

शिलालेख कहां स्थित हैं?
भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में 33 शिलालेख।

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