वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि केंद्र अब बिना सोचे-समझे फंड जारी नहीं करता। SNA SPARSH पोर्टल के जरिए पैसे का रियल-टाइम ट्रैकिंग होता है और वही पैसा छोड़ा जाता है जो ज़मीनी काम की ज़रूरत से जुड़ा हो। उन्होंने दावा किया कि FY27 के लिए किसी भी केंद्रीय योजना का फंड नहीं घटाया गया और पहले जो लगभग ₹1 लाख करोड़ हर साल राज्यों की ट्रेज़री में फंसे रहते थे, वह अब लगभग शून्य पर आ गए हैं।
“हर रुपये का हिसाब, न फ्री कैश पूल न ब्लाइंड खर्च” – FY27 स्कीम फंडिंग पर FM का जवाब
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि केंद्र सरकार “अंधाधुंध” या सिर्फ खर्च दिखाने के लिए पैसा रिलीज नहीं करती, बल्कि तभी फंड जारी होते हैं जब ज़मीनी स्तर पर काम के लिए अतिरिक्त पैसे की जरूरत होती है।
– विपक्ष के इस आरोप पर कि केंद्र ने centrally sponsored schemes के फंड काट दिए, उन्होंने कहा कि FY27 के लिए किसी भी योजना का फंड नहीं घटाया गया, सिर्फ फंड फ्लो का तरीका बदला है।
“फ्री पूल ऑफ कैश नहीं है” – FM का तर्क
सीतारमण ने कहा कि केंद्र का पैसा “फ्री पूल ऑफ कैश” नहीं है, जिसे सिर्फ डेडलाइन पूरा करने के लिए खर्च कर दिया जाए। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ इसलिए पैसा नहीं छोड़ते कि खाता साफ दिखे या बुक्स में खर्च बढ़ा दिखे। हम उतना ही छोड़ते हैं जितना ग्राउंड पर काम की मांग है।”
उनके मुताबिक, पुराने दौर में सफलता इस बात से मापी जाती थी कि खजाने से कितना पैसा “धक्का देकर” बाहर भेजा गया, भले ही वह खर्च हुआ या नहीं। नतीजा यह हुआ कि “हजारों करोड़ रुपये राज्यों की ट्रेज़री में सालों तक पड़े रहते थे और असली लाभार्थी तक पहुंचते ही नहीं थे।”
SNA SPARSH पोर्टल: फंड फ्लो का नया मॉडल
FM ने SNA SPARSH पोर्टल को गेम–चेंजर बताया। उनके अनुसार:
– इस पोर्टल की वजह से केंद्र सरकार को “absolute visibility” है कि पैसा कहां जा रहा है और कहां वास्तव में खर्च हो रहा है।
– अब “just in time” फंड रिलीज संभव है – जिस राज्य/स्कीम को जिस समय, जितने पैसे की जरूरत हो, उसी हिसाब से पैसा छोड़ा जाता है।
व्यय सचिव V Vualnam ने Moneycontrol को दिए इंटरव्यू में बताया था कि:
– SNA SPARSH पोर्टल, जो 2024 के अंत से ऑपरेशनल है, पर अभी तक लगभग 50 केंद्रीय योजनाओं को ऑनबोर्ड किया जा चुका है।
– पहले Consolidated Fund of India से पैसा सीधे राज्यों की ट्रेज़री में जाता था और वहां “पार्क” होकर पड़ा रहता था; वह वास्तविक लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाता था।
– करीब ₹1 लाख करोड़ हर साल राज्यों के पास यूँ ही पार्क रहता था, जिसका बोझ केंद्र को झेलना पड़ता था; अब यह लगभग शून्य के स्तर पर आ गया है, क्योंकि पैसा तभी जारी होता है जब वह beneficiary account तक पहुंचने की कड़ी में हो।
फंड कट की बात को FM ने कैसे खारिज किया?
– सीतारमण ने साफ कहा कि FY27 के लिए “किसी स्कीम का फंड स्लैश नहीं किया गया।”
– उन्होंने जोड़ा कि फर्क सिर्फ “फंड पुश” की पुरानी आदत और “डिमांड–बेस्ड रिलीज” के नए सिस्टम में है।
– उनका संदेश: “किसी राज्य या स्कीम के लिए फंड रोकना नहीं हो रहा, यह टैक्सपेयर के लिए आश्वासन है कि हर रुपये का हिसाब है और वह कहीं बेकार पार्क नहीं पड़ा।”
उधार और आउटकम: “पैसा देंगे, नतीजा भी चाहिए”
FM ने यह भी कहा कि सरकार बेमियादी तरीके से कर्ज नहीं ले सकती। “हम पैसा देंगे, लेकिन हमें आउटकम भी चाहिए।” यानी:
– योजनाओं में खर्च अब आउटपुट/आउटकम से जोड़ा जाएगा।
– सिर्फ बजट अलॉटमेंट या रिलीजी पर नहीं, बल्कि ग्राउंड रिजल्ट – जैसे सड़क बनी या नहीं, घर मिले या नहीं – पर जोर रहेगा।
पहले क्या होता था, अब क्या हो रहा है? (संक्षिप्त तुलना)
| पहलू | पहले का मॉडल | अब SNA SPARSH मॉडल |
|---|---|---|
| फंड रिलीज | साल की शुरुआत/बीच में बड़ी रकम एकमुश्त राज्यों को | जरूरत और प्रोग्रेस के आधार पर “just in time” रिलीज |
| पैसा कहाँ जाता था | राज्यों की ट्रेज़री में पार्क, वर्षों तक पड़ा | सीधे स्कीम–विशिष्ट SNA और आगे लाभार्थी खाते तक ट्रैक |
| पारदर्शिता | सीमित, ट्रेज़री से आगे का विवर कम दिखता था | पोर्टल पर पूरा ट्रैक, “absolute visibility” |
| फंसा पैसा | लगभग ₹1 लाख करोड़ हर साल | लगभग शून्य के आसपास, दावा सरकार का |
टैक्सपेयर के लिए संदेश
सीतारमण ने अपने बयान का अंत इस बात पर किया कि यह पूरा बदलाव टैक्सपेयर को भरोसा दिलाने के लिए है कि:
– उसकी दी हुई हर रुपया रकम का ट्रैक रखा जा रहा है,
– वह राज्यों की ट्रेज़री में सालों तक बेकार नहीं पड़ी रह रही,
– और फंड तभी जारी किया जा रहा है जब जमीन पर काम आगे बढ़ रहा हो।
5 FAQs
- वित्त मंत्री क्या कह रही हैं – क्या सरकार फंड काट रही है?
उनका कहना है कि FY27 के लिए किसी भी केंद्रीय योजना का फंड कम नहीं किया गया, सिर्फ फंड रिलीज अब मांग और प्रोग्रेस के हिसाब से होता है, “ब्लाइंडली” नहीं। - SNA SPARSH पोर्टल क्या है?
यह एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिस पर लगभग 50 केंद्रीय योजनाएँ ऑनबोर्ड हैं; इसके जरिए फंड फ्लो को ट्रैक किया जाता है और पैसा तब ही छोड़ा जाता है जब वह लाभार्थी तक पहुंचने की कड़ी में हो। - पहले राज्यों के पास कितना पैसा फंसा रहता था?
व्यय सचिव के अनुसार, लगभग ₹1 लाख करोड़ हर साल राज्यों की ट्रेज़री में पार्क रहते थे, जो अब लगभग शून्य के स्तर पर आ गया है। - विपक्ष क्या आरोप लगा रहा था?
विपक्ष का आरोप था कि केंद्र ने centrally sponsored schemes के लिए फंड घटा दिए या रोक दिए हैं; FM ने इसे खारिज कर कहा कि यह सिर्फ फंड फ्लो के तरीके में बदलाव है, कटौती नहीं। - FM ने उधार और आउटकम पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सरकार अनलिमिटेड कर्ज नहीं ले सकती; “हम पैसा देंगे, लेकिन उसके बदले में ठोस आउटकम भी चाहिए,” यानी खर्च रिजल्ट से जोड़ा जाएगा।
- Expenditure Secretary V Vualnam interview SPARSH
- funds not blindly released centre
- FY27 centrally sponsored schemes allocations
- just-in-time fund release to states
- Nirmala Sitharaman transparent fund release
- outcome-based spending India
- Rajya Sabha debate scheme fund cuts
- Rs 1 lakh crore parked in state treasuries earlier
- SNA SPARSH portal central schemes
Leave a comment