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लैम्बो क्रैश में अमीर बेटे को घंटों में बेल क्यों? कोर्ट ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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कानपुर VIP रोड पर लैम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को घायल किया, तंबाकू व्यापारी के बेटे शिवम मिश्रा गिरफ्तार लेकिन घंटों में 20 हज़ार बॉन्ड पर बेल। कोर्ट ने पुलिस की प्रोसीजर लैप्सेस पर तंज कसा।

10 करोड़ की लैम्बो ने मचाया तांडव, 6 घायल: शिवम मिश्रा गिरफ्तार तो तुरंत बेल?

कानपुर में लैम्बोर्गिनी का तांडव: 10 करोड़ की गाड़ी ने कैसे मचाया हाहाकार?

8 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 3 बजे कानपुर के VIP रोड पर हंगामा मच गया। एक लग्ज़री लैम्बोर्गिनी रेवोल्टो ने पैदल चल रहे लोगों और कई गाड़ियों को टक्कर मार दी। छह लोग घायल हो गए – कुछ को गंभीर चोटें आईं, बुलेट बाइक भी चूर-चूर हो गई। आंखों देखा बताते हैं कि गाड़ी तेज़ रफ्तार में थी, ड्राइवर शायद नशे में था और हादसे के बाद भागने की कोशिश की।

ये गाड़ी तंबाकू व्यापारी के.के. मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा (24-35 साल, रिपोर्ट्स में उम्र अलग-अलग) की थी। पुलिस ने शुरुआत में कहा कि वीडियो और सबूतों से साफ है कि शिवम ही ड्राइव कर रहा था। लेकिन पिता ने दावा किया कि उनका बेटा गाड़ी चेक कराने गया था, ड्राइवर मोहनलाल ही पीछे था।

पिता का दावा: “मेरा बेटा बीमार था, ड्राइवर चला रहा था”

के.के. मिश्रा ने मीडिया से कहा कि शिवम ने गाड़ी सिर्फ़ टेस्ट करने को ली थी, ड्राइवर मोहन ही पीछे था। उनका कहना था कि बेटे की तबीयत खराब हो गई, वो बेहोश हो गया और दिल्ली इलाज के लिए ले गए। पुलिस पर फंसाने का आरोप लगाया। लेकिन कोप ने CCTV फुटेज और गवाहों के बयान से शिवम को ही ड्राइवर बताया।

शिवम 4 दिन फरार रहा, एम्बुलेंस में घूमता रहा ताकि पकड़े न जाएं। आखिरकार 12 फरवरी को कानपुर में ही गिरफ्तार हुआ।

गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही बेल: कोर्ट का पुलिस पर तंज

गिरफ्तारी के चंद घंटों बाद शिवम को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने 14 दिन की रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने साफ मना कर दिया। 20 हज़ार के पर्सनल बॉन्ड पर बेल दे दी।

कोर्ट ने कहा, “पुलिस ने गंभीर प्रोसीजरल लैप्सेस किए। गिरफ्तारी BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत प्रॉपर नोटिस के बिना हुई, सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार गाइडलाइंस का उल्लंघन है।” ये गाइडलाइंस 2014 की हैं, जो कहती हैं कि 7 साल से कम सजा वाले केस में गिरफ्तारी अपवाद होनी चाहिए, पहले नोटिस दें।

शिवम के वकील अनंत शर्मा ने बताया कि रिमांड पेपर्स में कई गलतियाँ थीं, नोटिस सर्व न होने का जिक्र नहीं। कोर्ट ने रिमांड खारिज कर बेल दी।

अर्नेश कुमार गाइडलाइंस क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण?

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य केस में साफ निर्देश दिए। अगर अपराध की सजा 7 साल से कम है (जैसे ये IPC 279, 337, 338 – रैश ड्राइविंग, चोट पहुँचाना), तो पुलिस बिना वजह गिरफ्तार न करे। पहले लिखित नोटिस भेजे, आरोपी को सरेंडर का मौका दें।

इसके पीछे मकसद है बेगुनाहों को जेल न भेजना, पुलिस की मनमानी रोकना। लाखों केस में गलत गिरफ्तारियाँ रुक गईं। कानपुर कोर्ट ने यही लागू किया।

मोहनलाल का सरेंडर: ड्राइवर कौन था, असली ड्रामा?

11 फरवरी को मोहनलाल कोर्ट पहुँचा, सरेंडर करने और बेल मांगने। हलफनामा दिया कि वो ही ड्राइवर था, नौ गियर वाली गाड़ी चला रहा था। हादसे पर शिवम बेहोश हो गया, तो उसे ड्राइवर सीट पर शिफ्ट किया और बाहर आया।

लेकिन कोर्ट ने सरेंडर ठुकरा दिया क्योंकि पुलिस रिपोर्ट में मोहन आरोपी ही नहीं था। पुलिस कहती है कि मोहन को मिश्रा परिवार ने बाद में आगे किया ताकि शिवम बच जाए। फोरेंसिक और टेक्निकल रिपोर्ट्स का इंतज़ार।

कानपुर VIP रोड क्रैश का पूरा विवरण

VIP रोड पर रेव-3 मॉल के पास ये हादसा हुआ। लैम्बो ने पैदलियों को कुचला, कई गाड़ियाँ टक्कर खाईं। डीसीपी अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्पीड हाई थी, ड्राइवर कंट्रोल खो बैठा। गाड़ी जब्त, लेकिन अब बेल के बाद शिवम बाहर।

शिकायतकर्ता ने भी सेटलमेंट की बात कही, लेकिन पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी।

तंबाकू व्यापारी के.के. मिश्रा कौन हैं?

के.के. मिश्रा कानपुर के बड़े तंबाकू व्यापारी हैं। उनका बेटा शिवम अमीर शहजादा टाइप – महंगी गाड़ियाँ, लग्ज़री लाइफ। परिवार ने दावा किया कि गाड़ी में खराबी थी। लेकिन पब्लिक आउटरेज भारी है – सोशल मीडिया पर “जस्टिस फॉर विक्टिम्स” ट्रेंड कर रहा।

पुलिस की लैप्सेस से सबक: कानून सबके लिए बराबर?

ये केस दिखाता है कि अमीरों के लिए भी कानून सख्त हो रहा। लेकिन बेल इतनी जल्दी मिलना पुलिस पर सवाल खड़े करता है। क्या नोटिस दिया गया था? BNSS फॉलो किया? अर्नेश कुमार नियम तोड़े? कोर्ट ने इन्हीं सवालों पर पुलिस को फटकार लगाई।

आम आदमी के लिए संदेश साफ – तेज़ ड्राइविंग मत करो, खासकर महंगी गाड़ियों में। कानपुर जैसे शहरों में VIP रोड पर भीड़ रहती है, छोटी लापरवाही बड़ी त्रासदी बन जाती।

अब आगे क्या? चार्जशीट और अपील

पुलिस फोरेंसिक रिपोर्ट्स लेकर चार्जशीट दाखिल करेगी। शिवम की बेल पर ऊपर अपील हो सकती है। मोहनलाल का रोल क्लियर होगा। ये केस रैश ड्राइविंग लॉज को नया मोड़ दे सकता है।

कुल मिलाकर, ये हादसा अमीर-गरीब के फर्क को उजागर करता है, लेकिन कोर्ट का फैसला कानूनी सिस्टम की ताकत भी दिखाता है।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: कानपुर लैम्बो क्रैश कब और कैसे हुआ?
    उत्तर: 8 फरवरी 2026 को दोपहर 3 बजे VIP रोड पर लैम्बोर्गिनी रेवोल्टो ने पैदलियों व गाड़ियों को टक्कर मारी, 6 घायल हुए।
  2. प्रश्न: शिवम मिश्रा को बेल क्यों मिल गई कुछ घंटों में?
    उत्तर: कोर्ट ने पुलिस की प्रोसीजर लैप्सेस पाईं – BNSS नोटिस न देना, अर्नेश कुमार गाइडलाइंस तोड़ना; 20 हज़ार बॉन्ड पर रिहा।
  3. प्रश्न: अर्नेश कुमार गाइडलाइंस क्या कहती हैं?
    उत्तर: 7 साल से कम सजा वाले केस में गिरफ्तारी अपवाद, पहले नोटिस दें; 2014 सुप्रीम कोर्ट जजमेंट।
  4. प्रश्न: मोहनलाल ने क्या दावा किया?
    उत्तर: सरेंडर कर कहा कि वो ड्राइवर था, शिवम बेहोश था; लेकिन कोर्ट ने ठुकरा दिया क्योंकि वो आरोपी ही नहीं।
  5. प्रश्न: शिवम के पिता का कहना क्या है?
    उत्तर: के.के. मिश्रा ने कहा बेटा ड्राइव नहीं कर रहा था, ड्राइवर मोहन था; गाड़ी में खराबी आई, बेटा बीमार हो गया।
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