सुप्रीम कोर्ट ने जयराम रमेश की रेट्रोस्पेक्टिव पर्यावरणीय मंजूरी पर याचिका खारिज की। CJI ने इसे रिव्यू का गलत तरीका बताया, एग्जेम्प्लरी कॉस्ट की चेतावनी दी।
20,000 करोड़ के प्रोजेक्ट बचाने SC ने फैसला उलटा, जयराम की पिटीशन क्यों फेल?
जयराम रमेश की याचिका SC ने क्यों ठुकराई?
11 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की रिट पिटीशन सुनने से साफ मना कर दिया। मामला रेट्रोस्पेक्टिव यानी पोस्ट-फैक्टो पर्यावरणीय मंजूरी (ex-post facto environmental clearances) का था। CJI सूर्या कांत और जस्टिस ज्योमल्या बागची की बेंच ने इसे पुराने जजमेंट की रिव्यू का गलत तरीका बताया।
CJI ने वकील से कहा, “रिट में जजमेंट की रिव्यू कैसे मांग सकते हो? ये डिज़ाइन हम जानते हैं। बड़ी बेंच ने फैसला रिवर्स कर दिया, अब अप्रत्यक्ष रिव्यू मत फाइल करो। एग्जेम्प्लरी कॉस्ट के लिए तैयार रहो।” वकील ने पिटीशन वापस ले ली, कोर्ट ने लीगल रेमेडी लेने की छूट दी।
रेट्रोस्पेक्टिव ग्रीन क्लियरेंस क्या होता है?
ये वो मंजूरी है जो प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद दी जाती है, अगर पर्यावरण नियम तोड़े गए हों। पहले MoEFCC की 2021 की ऑफिस मेमो से ये संभव था, लेकिन 16 मई 2025 को SC ने वनशक्ति जजमेंट में इसे बैन कर दिया। कहा गया कि ये Environment Protection Act 1986 और EIA नोटिफिकेशन 2006 के खिलाफ है।
फिर क्या हुआ? 18 नवंबर 2025 को 3 जज बेंच ने 2:1 से फैसला रिकॉल कर लिया। CJI बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन ने कहा कि इससे 20,000 करोड़ के पब्लिक प्रोजेक्ट्स डेमोलिश हो जाएंगे। जस्टिस उज्जल भuyan ने डिसेंट किया, कहा पोस्ट-फैक्टो EC पर्यावरण कानून के खिलाफ है।
जयराम रमेश ने क्यों दाखिल की याचिका?
पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम ने जनवरी 2026 में MoEFCC के ऑफिस मेमो को चैलेंज किया, जो SC फैसले को लागू करने के लिए था। उनका कहना था कि ये अवैध है, पब्लिक हेल्थ को खतरा, गवर्नेंस का मज़ाक। उन्होंने कहा, “रिव्यू अनकॉल्ड फॉर था, रेट्रोस्पेक्टिव अप्रूवल कभी नहीं होना चाहिए।”
SC ने पूछा – जजमेंट आने के बाद नोटिफिकेशन चैलेंज कैसे? ये मीडिया पब्लिसिटी के लिए लग रही। CJI ने साफ कहा कि असली ग्रिवांस हो तो रिव्यू फाइल करो, रिट से नहीं।
16 मई 2025 का वनशक्ति जजमेंट क्या था?
जस्टिस एएस ओका और उज्जल भuyan की बेंच ने कहा कि नियम तोड़कर प्रोजेक्ट चलाने वालों को बाद में मंजूरी नहीं मिलेगी। 2021 मेमो और 2017 नोटिफिकेशन को आर्बिट्रेरी बताया। कुछ पुरानी क्लियरेंस वैलिड रखीं, लेकिन फ्यूचर में बैन।
ये फैसला कई प्रोजेक्ट्स – हाईवे, ब्रिज, डैम – के लिए खतरे की घंटी था। पब्लिक मनी से बने 20,000 करोड़ के काम बर्बाद होने का डर।
18 नवंबर 2025 का रिवर्सल: क्यों लिया फैसला?
लगभग 40 रिव्यू प्लीज़ पर सुनवाई हुई। CJI गवई ने कहा कि जजमेंट में लीगल प्रेसिडेंट्स मिस हुए, इससे डेवस्टेटिंग इफेक्ट्स होंगे। जस्टिस चंद्रन सहमत। जस्टिस भuyan ने कहा ये पर्यावरण जुरिस्प्रूडेंस को कर्स है।
फैसला रिकॉल कर मेनर को री-लिस्ट किया। अब प्रोजेक्ट्स पेनल्टी देकर रेगुलराइज़ हो सकते हैं।
रेट्रोस्पेक्टिव EC के फायदे-नुकसान क्या?
फायदे: बड़े प्रोजेक्ट्स बच जाते हैं, पब्लिक मनी वेस्ट नहीं। देरी से क्लियरेंस मिल जाए तो काम जारी। पेनल्टी से कंप्लायंस बढ़े। नुकसान: कंपनियाँ पहले नियम तोड़ेंगी, बाद में पैसे देकर बच निकलेंगी। पर्यावरण डैमेज पहले हो चुका तो रिवर्स मुश्किल। पब्लिक हेल्थ रिस्क।
जयराम जैसी आवाज़ें कहती हैं ये लॉ का मज़ाक है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया क्या रही?
कांग्रेस ने नवंबर फैसले को “डबल डिसअपॉइंटिंग” कहा। कहा पेनल्टी से नियम तोड़ना रेगुलराइज़ नहीं होता। जयराम ने अरावली रिव्यू से प्रेरित होकर पिटीशन फाइल की।
SC ने इसे राजनीतिक स्टंट जैसा देखा।
पर्यावरण कानूनों का बैकग्राउंड
EIA नोटिफिकेशन 2006 से क्लियरेंस प्रोसेस सख्त। लेकिन प्रोजेक्ट्स देरी से स्टक। 2017 और 2021 मेमो से पोस्ट-फैक्टो रास्ता खुला। SC फैसलों ने बैलेंस बनाने की कोशिश की – पर्यावरण vs डेवलपमेंट।
अब सवाल ये कि कंपनियाँ कितनी पेनल्टी देंगी? क्या सिस्टम मिसयूज़ होगा?
आम आदमी के लिए असर
बड़े प्रोजेक्ट्स – हाईवे, मेट्रो, डैम – समय पर पूरे होंगे तो ट्रैफिक कम, कनेक्टिविटी बेहतर। लेकिन अगर पर्यावरण डैमेज हुआ तो प्रदूषण, हेल्थ प्रॉब्लम्स। बैलेंस ज़रूरी – कंप्लायंस पहले, क्लियरेंस बाद में।
भविष्य में क्या?
SC ने लीगल रेमेडी खुला रखा। जयराम रिव्यू फाइल कर सकते हैं। लेकिन CJI की चेतावनी से साफ कि गलत तरीके से कोर्ट का समय वेस्ट न हो। पर्यावरण vs इंफ्रास्ट्रक्चर डिबेट जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, ये केस दिखाता है कि SC डेवलपमेंट को प्राथमिकता दे रही, लेकिन सख्त पेनल्टी के साथ। जयराम को झटका लगा, लेकिन बहस खत्म नहीं हुई।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने जयराम रमेश की याचिका क्यों खारिज की?
उत्तर: इसे पुराने जजमेंट की अप्रत्यक्ष रिव्यू बताया, रिट से चैलेंज नहीं हो सकता। CJI ने एग्जेम्प्लरी कॉस्ट की चेतावनी दी। - प्रश्न: रेट्रोस्पेक्टिव पर्यावरणीय क्लियरेंस क्या है?
उत्तर: प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद, नियम तोड़ने पर पेनल्टी देकर दी जाने वाली मंजूरी। - प्रश्न: 18 नवंबर 2025 का SC फैसला क्या था?
उत्तर: 16 मई 2025 के बैन को 2:1 से रिकॉल किया, 20,000 करोड़ प्रोजेक्ट्स बचाने के लिए। - प्रश्न: जयराम ने किस OM को चैलेंज किया?
उत्तर: जनवरी 2026 का MoEFCC मेमो, जो SC फैसले को लागू करने के लिए जारी हुआ। - प्रश्न: वनशक्ति जजमेंट क्या था?
उत्तर: 16 मई 2025 को पोस्ट-फैक्टो EC पर बैन लगाया, 2021 मेमो को अवैध बताया।
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