Home देश अवैध खनन केस में FIR क्यों नहीं? खड़से का पुलिस स्टेशन पर हंगामा
देश

अवैध खनन केस में FIR क्यों नहीं? खड़से का पुलिस स्टेशन पर हंगामा

Share
Eknath Khadse FIR, NCP SP leader abuse cop
Share

जलगाँव सावदा पुलिस स्टेशन पर NCP(SP) MLC एकनाथ खड़से ने पुलिसकर्मी को गाली दी, ACB केस की धमकी दी व मंत्री को बेइज्जत किया। BNS 296,221 के तहत FIR, जाँच जारी।

NCP(SP) खड़से पर गाली-गलौज का केस: मंत्री को धमकी क्यों दी?

एकनाथ खड़से पर पुलिस स्टेशन में हंगामा: FIR का पूरा किस्सा

11 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र के जलगाँव जिले के सावदा पुलिस स्टेशन पर NCP(SP) के MLC एकनाथ खड़से पहुँचे। वे रावेर तहसील के टासखेड़ा में अवैध खनन के मामले में पूछताछ करने आए थे। उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर से सवाल किया कि केस क्यों दर्ज नहीं हुआ। गुस्से में आकर खड़से ने कथित तौर पर पुलिसकर्मी को गालियाँ दीं और अपमानजनक शब्द कहे। उन्होंने धमकी भी दी कि अगर FIR न हुई तो ACB केस कर देंगे। पुलिस ने BNS की धारा 296 (अश्लील भाषा) और 221 (सार्वजनिक सेवक को बाधा) के तहत FIR दर्ज कर ली। जाँच जारी है।

मंत्री पर भी बरसे खड़से: दूसरा विवाद क्या?

खड़से ने न सिर्फ पुलिसकर्मी को निशाना बनाया बल्कि मौजूदा मंत्री पर भी गालियाँ बरसाईं। मामला रिजर्वायर सॉइल चोरी का था। उन्होंने मंत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं। पुलिस अधिकारी ने FIR में ये भी दर्ज किया। खड़से का कहना था कि दोनों मामलों में पुलिस निष्क्रिय है। विपक्षी नेता के तौर पर वे अक्सर स्थानीय मुद्दों पर आक्रामक रहते हैं। लेकिन इस बार बात गालियों तक पहुँच गई। स्टेट गवर्नमेंट ने अभी कोई ऑफिशियल रिएक्शन नहीं दिया।

टासखेड़ा अवैध खनन: विवाद की जड़ क्या?

टासखेड़ा इलाके में अवैध खनन का मुद्दा पुराना है। स्थानीय लोग शिकायत करते रहे हैं लेकिन FIR न होने से नाराजगी। खड़से ने स्टेशन जाकर दबाव बनाया। उनका इलाका रावेर है जहाँ वे पहले MP रह चुके। अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान और माफिया सक्रिय। खड़से ने कहा पुलिस भ्रष्टाचार में लिप्त है। लेकिन पुलिस का कहना है जाँच चल रही। ये घटना खड़से की आक्रामक राजनीति को दिखाती है।

रिजर्वायर सॉइल चोरी केस: मंत्री कौन लक्ष्य?

रिजर्वायर से मिट्टी चोरी का केस भी जलगाँव में चर्चित है। खड़से ने मंत्री को इसका जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने खुलेआम अपशब्द कहे। मंत्री कौन हैं ये नाम न लिया गया लेकिन लोकल पॉलिटिक्स में साफ संकेत। ये विवाद खड़से की पुरानी दुश्मनी दिखा सकता है। पुलिस FIR में मंत्री का नाम नहीं लिया लेकिन शिकायत दर्ज। राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज़।

एकनाथ खड़से का राजनीतिक सफर: उतार-चढ़ाव भरा

एकनाथ खड़से BJP के पुराने सिपाही रहे। देवेंद्र फडणवीस कैबिनेट में मंत्री थे लेकिन 2016 में पुणे लैंड डील घोटाले से इस्तीफा। ED ने चार्जशीट भी दाखिल की। 2020 में शरद पवार की NCP जॉइन की। 2023 स्प्लिट में NCP(SP) के साथ रहे। MLC हैं। बेटी-बहू रक्षा खड़से रावेर MP। हाल में BJP वापसी की अफवाहें लेकिन अब NCP(SP) में। विवादों से घिरे रहते हैं।

पुराने विवाद: खड़से पर पहले भी केस

खड़से का इतिहास विवादों से भरा। 2016 लैंड डील में ED-ACB केस चला। बॉम्बे HC ने एक FIR रोकी। हनी ट्रैप मामलों पर CBI जाँच की मांग की। शरद पवार ने मुश्किल वक्त में साथ दिया। BJP लीडर्स से मतभेद। लेकिन उत्तर महाराष्ट्र में मजबूत बेस। ये FIR उनके स्टाइल को दर्शाता है। समर्थक कहते आक्रामकता ज़रूरी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: NCP-SP क्या कहेगी?

NCP(SP) ने अभी चुप्पी साधी। शरद पवार गुट में खड़से महत्वपूर्ण। BJP ने तंज कसा कि विपक्षी नेता पुलिस को धमकाते हैं। महा विकास अघाड़ी सरकार पर खनन-माफिया का आरोप। खड़से समर्थक कहते राजनीतिक साजिश। जाँच में अगर बरी हुए तो मसला ठंडा। लेकिन कोर्ट पहुँचा तो हेडलाइंस बनेगा।

महाराष्ट्र में अवैध खनन: बड़ी समस्या क्यों?

महाराष्ट्र में खनन माफिया सक्रिय। जलगाँव-रावेर जैसे इलाकों में अवैध उत्खनन आम। पर्यावरण नुकसान, राजस्व हानि। NCP-SP ने कई बार सदन में उठाया। पुलिस पर भ्रष्टाचार आरोप। सरकार ACB-ED से जाँच का दावा। लेकिन FIR कम। खड़से जैसी घटनाएँ तनाव बढ़ाती हैं। सख्त कानून की मांग।

BNS धारा 296-221 क्या कहतीं?

BNS 296 obscene language पर सज़ा देती है। 221 public servant को रोकने पर। खड़से पर दोनों लागू। ACB धमकी से IPC/BNS की धाराएँ जोड़ी जा सकतीं। जमानत आसान लेकिन इमेज प्रभावित। पुलिस ने वीडियो/गवाह तलाशे। कोर्ट में सफाई दें। राजनीतिक केसों में अक्सर सेटल।

भविष्य में क्या हो सकता?

जाँच पूरी होने पर चार्जशीट। खड़से बेल लेंगे। NCP-SP इस्तेमाल करेगी मुद्दा बनाने को। BJP सरकार पर खनन नीति का हमला। खड़से का BJP वापसी प्लान प्रभावित। उत्तर महाराष्ट्र पॉलिटिक्स हलचल। आम लोग कहते नेता पुलिस से ऊपर समझें। कानून सबके लिए बराबर।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: एकनाथ खड़से पर FIR कब और कहाँ दर्ज हुई?
    उत्तर: 11 फरवरी 2026 को जलगाँव के सावदा पुलिस स्टेशन पर, पुलिसकर्मी व मंत्री को गाली देने के आरोप में।
  2. प्रश्न: विवाद किस मामले से शुरू हुआ?
    उत्तर: टासखेड़ा अवैध खनन पर FIR न होने पर नाराजगी, पुलिस को गाली व ACB धमकी।
  3. प्रश्न: कौन सी धाराओं के तहत FIR?
    उत्तर: BNS 296 (अश्लील भाषा) व 221 (सार्वजनिक सेवक को बाधा पहुँचाना)।
  4. प्रश्न: मंत्री पर क्या कहा खड़से ने?
    उत्तर: रिजर्वायर सॉइल चोरी मामले में अपमानजनक व आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल किए।
  5. प्रश्न: खड़से का राजनीतिक बैकग्राउंड क्या?
    उत्तर: पूर्व BJP मंत्री, 2020 से NCP जॉइन, अब NCP(SP) MLC, विवादास्पद छवि।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

“हम अंधाधुंध पैसे नहीं छोड़ते” – FM सीतारमण का दावा, SNA SPARSH से अब हर रुपये की ट्रैकिंग

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि केंद्र अब बिना...

बेंगलुरु रियल एस्टेट मर्डर: बसवराज क्यों भागे थे गुजरात, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रोका बेल?

कर्नाटक BJP विधायक बायराथी बसवराज को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर बिक्लू शिवा हत्या...

लैम्बो क्रैश में अमीर बेटे को घंटों में बेल क्यों? कोर्ट ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

कानपुर VIP रोड पर लैम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को घायल किया, तंबाकू...