कुबेर इंद्र ने की रत्नों की वर्षा,नगर में बांटी गई मिठाई,पाण्डुक शिला पर हुआ महा-जलाभिषेक।
खनियांधाना (म.प्र)। बुंदेलखंड की पावन धरा खनियांधाना में जारी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं त्रयगजरथ महोत्सव के तीसरे दिन भक्ति का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। बालक तीर्थंकर के जन्म के उपरांत जब भव्य जुलूस नगर और ग्रामीण भ्रमण के लिए निकला, तो समूचा क्षेत्र जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
रत्नों की वर्षा और मिठाई वितरण से झूम उठा नगर।
जुलूस के दौरान दृश्य तब अलौकिक हो गया,जब कुबेर इंद्र द्वारा पूरे नगर में रत्नों की बरसात की गई। बालक तीर्थंकर के आगमन की खुशी में पूरे नगर में जगह-जगह मिठाई का वितरण किया गया।जिससे उत्सव का आनंद दोगुना हो गया। श्रद्धालुओं और नगरवासियों ने बड़े ही उत्साह के साथ इस मंगल प्रसंग का स्वागत किया। जयकारों के साथ जब यह जुलूस पुनः ‘अयोध्या नगरी’ पहुँचा, तो वहाँ पाण्डुक शिला पर सौधर्म इंद्र और कुबेर इंद्र सहित समस्त इंद्रों द्वारा बालक तीर्थंकर का 1008 कलशों से मंगल जलाभिषेक किया गया।
प्रातः 7:20 पर हुआ बालक तीर्थंकर का मंगल जन्म।
इससे पूर्व, शुक्रवार की अलसुबह मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज एवं मुनि 108 श्री निरापद सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से ठीक सुबह 7:20 बजे बालक तीर्थंकर के जन्म की मंगल घोषणा हुई। जन्म की खबर मिलते ही अयोध्या नगरी (महोत्सव पांडाल) खुशियों से सराबोर हो गई।
महाराजा नाभिराय का सजा वैभवशाली राजदरबार।
बालक तीर्थंकर के जन्म के पश्चात महाराजा नाभिराय का ऐतिहासिक राजदरबार सजाया गया। महाराजा नाभिराय और माता मरुदेवी के आंगन में प्रभु का अवतरण देख सौधर्म इंद्र अपनी पूरी देव सभा के साथ पधारे। देवराज इंद्र ने महाराजा नाभिराय को बधाई दी और बालक तीर्थंकर की अनुपम छवि के दर्शन किए।
सत्येंद्र शर्मा एंड पार्टी की धुनों पर थिरके श्रद्धालु।
उत्सव के दौरान सुप्रसिद्ध संगीतकार सत्येंद्र शर्मा एंड पार्टी द्वारा विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। जब सत्येंद्र शर्मा ने अपनी टीम के साथ जन्म बधाई के मधुर भजन छेड़े, तो पांडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और भक्ति में लीन होकर जमकर नृत्य किया।
प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप सुयश (अशोकनगर) के निर्देशन में सभी मांगलिक क्रियाएं विधि-विधान से संपन्न की जा रही हैं। मीडिया प्रभारी संजीव जैन चौधरी और सहसंयोजक प्रवीण जैन ने बताया कि बालक तीर्थंकर के जन्म, रत्नवृष्टि, मिठाई वितरण और महाभिषेक के इन दुर्लभ प्रसंगों ने खनियांधाना को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया है।
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