भारत और अमेरिका ने इंटरिम ट्रेड डील पर चीफ नेगोशिएटर्स की प्रस्तावित बैठक/भारतीय टीम की US यात्रा को री-शेड्यूल करने का फैसला किया है। 23 फरवरी से होने वाली तीन दिन की वार्ता अब “ताजा घटनाक्रमों और उनके असर” की समीक्षा के बाद, दोनों पक्षों की सहमति से नई तारीख पर होगी। यह फैसला US सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले और ट्रंप के 10% (फिर 15%) ग्लोबल टैरिफ के ऐलान के बाद आया।
इंटरिम डील पर ब्रेक: भारत के चीफ नेगोशिएटर की US यात्रा टली, वजह—टैरिफ अनिश्चितता और नए डेवलपमेंट
भारत-अमेरिका इंटरिम ट्रेड डील वार्ता क्यों टली? पूरी कहानी
भारत और अमेरिका ने इंटरिम ट्रेड डील को लेकर चीफ नेगोशिएटर्स की प्रस्तावित बैठक को री-शेड्यूल करने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि यह तीन दिन की ट्रेड मीटिंग 23 फरवरी से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब दोनों पक्ष चाहते हैं कि “ताजा घटनाक्रमों और उनके प्रभाव” का आकलन करने के बाद ही आगे बढ़ा जाए। बैठक अब दोनों देशों की सहमति से किसी “mutually convenient date” पर होगी।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल भारत के चीफ नेगोशिएटर और टीम की अमेरिका यात्रा भी टल गई है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों का मानना है कि हाल के डेवलपमेंट इतने बड़े हैं कि बिना समीक्षा के बातचीत आगे बढ़ाना व्यावहारिक नहीं होगा।
कौन-कौन सी घटनाएं बीच में आ गईं?
इस स्थगन की टाइमिंग सीधे अमेरिका में टैरिफ से जुड़े बड़े घटनाक्रमों से जुड़ती है। 20 फरवरी को US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के पहले के “sweeping tariffs” के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि जिस कानून के तहत ये टैरिफ लगाए गए थे, वह राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता। यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया और इसे ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के लिए बड़ा झटका माना गया।
फिर उसी दिन ट्रंप ने एक नया कदम उठाते हुए सभी देशों पर 10% का टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए लागू होने वाला है। यह टैरिफ उन्होंने अलग कानूनी आधार (Section 122, Trade Act of 1974) के तहत लगाने की बात कही।
इसके अगले ही दिन ट्रंप ने घोषणा की कि यह 10% की दर बढ़ाकर 15% की जाएगी। रिपोर्टों में बताया गया कि Section 122 के तहत 15% अधिकतम सीमा है और यह व्यवस्था अधिकतम 150 दिनों तक चल सकती है, जब तक कांग्रेस इसे बढ़ाए नहीं।
इंटरिम ट्रेड डील की बातचीत पर इसका असर क्या पड़ता है?
जब टैरिफ व्यवस्था ही अचानक बदल रही हो, तो किसी भी इंटरिम ट्रेड डील का “किस कीमत पर क्या मिलेगा” वाला गणित तुरंत बदल जाता है। भारत-अमेरिका वार्ता में आमतौर पर टैरिफ, मार्केट एक्सेस, स्टैंडर्ड्स, और कुछ सेक्टर्स में रियायतें जैसे मुद्दे आते हैं—और नई ग्लोबल टैरिफ घोषणा के बाद इन सभी बिंदुओं पर दोनों पक्षों को अपनी पोजिशन फिर से तय करनी पड़ती है।
यही वजह है कि सरकारी सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्ष चाहते हैं कि हर साइड को “latest developments and their implications” को evaluate करने का समय मिले। इसके बाद ही चीफ नेगोशिएटर्स की मीटिंग रखी जाएगी।
भारत के लिए 10%/15% टैरिफ का मतलब क्या है?
इस टैरिफ का सीधा असर भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है, क्योंकि यह “सभी देशों पर” लागू टैरिफ है, जिसमें भारत भी शामिल है। यह टैरिफ 24 फरवरी से लागू होने की बात कही गई है और यह मौजूदा ड्यूटी/टैरिफ के ऊपर अतिरिक्त होगा, यानी कई प्रोडक्ट्स पर प्रभाव बढ़ सकता है।
हालांकि, अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-से आइटम्स पर पहले से कौन-सी ड्यूटी है, किन चीजों को छूट दी गई है, और US कस्टम्स के नोटिफिकेशन में क्या डिटेल आती है। व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में कुछ सेक्टर्स/प्रोडक्ट्स के लिए अपवाद (exemptions) का जिक्र भी है।
अब आगे क्या? संभावित अगले कदम
- नई तारीख तय होगी
भारत और अमेरिका दोनों की तरफ से अब मीटिंग को नई तारीख पर रखने की प्रक्रिया होगी, जब दोनों की “री-इवैल्युएशन” पूरी हो जाएगी। - इंटरिम डील की शर्तों पर फिर से गणित
टैरिफ के नए ढांचे में इंटरिम डील के बदले क्या कंसेशन होंगे, इस पर दोबारा मंथन होगा। - सेक्टर-वार प्राथमिकताएं बदलेगी
कुछ सेक्टर्स (जैसे टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स) पर प्रभाव अलग-अलग हो सकता है, इसलिए बातचीत में प्राथमिकताएं शिफ्ट हो सकती हैं।
मुख्य बातें एक नजर में (टेबल)
| बिंदु | क्या हुआ |
|---|---|
| मीटिंग प्लान | भारत-US तीन दिन की मीटिंग 23 फरवरी से संभावित थी |
| फैसला | मीटिंग/भारतीय टीम की यात्रा “री-शेड्यूल” |
| कारण | दोनों पक्ष “latest developments” का असर evaluate करना चाहते हैं |
| बैकड्रॉप | US सुप्रीम कोर्ट ने पुराने sweeping tariffs पर रोक, फिर ट्रंप ने 24 फरवरी से 10% (फिर 15%) ग्लोबल टैरिफ की घोषणा |
FAQs (5)
- भारत-अमेरिका ट्रेड बातचीत कब होने वाली थी और अब क्या हुआ?
यह मीटिंग 23 फरवरी से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब दोनों देशों ने इसे स्थगित कर दिया है और “mutually convenient date” पर री-शेड्यूल करने की बात कही है। - बातचीत क्यों टली?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष हाल के डेवलपमेंट और उनके असर का आकलन (evaluate) करने के बाद ही मीटिंग करना चाहते हैं। - हाल के डेवलपमेंट कौन से हैं?
US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पहले के sweeping tariffs के खिलाफ फैसला दिया, इसके बाद ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए 10% ग्लोबल टैरिफ घोषित किया और फिर इसे 15% तक बढ़ाने की घोषणा की। - 10%/15% ग्लोबल टैरिफ भारत पर कैसे असर डाल सकता है?
क्योंकि यह सभी देशों पर लागू है, इसलिए भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर भी इसका असर पड़ सकता है और यह कई वस्तुओं पर मौजूदा ड्यूटी के ऊपर अतिरिक्त शुल्क की तरह लग सकता है। - अब अगला कदम क्या है?
दोनों पक्ष नई तारीख तय करेंगे और तब तक इंटरिम ट्रेड डील के संभावित विकल्पों व शर्तों पर ताजा टैरिफ स्थितियों के हिसाब से दोबारा समीक्षा करेंगे।
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