राज शमानी के पॉडकास्ट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत-फ्रांस रिश्तों पर कहा—“जब हम टीम बनाते हैं, हम डिलीवर करते हैं।” उन्होंने US-चीन पर निर्भरता से बचने, स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी, फ्रांस में भारतीय छात्रों के अवसर और G7 के लिए मोदी को जून में आमंत्रण पर भी बात की।
“दो बड़े पावर पर निर्भर नहीं होना” — मैक्रों ने भारत के साथ ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ का फॉर्मूला समझाया
मैक्रों का बड़ा संदेश: “भारत-फ्रांस जब टीम बनाते हैं, तो डिलीवर करते हैं” — राज शमानी के पॉडकास्ट में खुलकर बातचीत
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत-फ्रांस रिश्तों को लेकर एक सीधा और मजबूत संदेश दिया है: “मैं सच में मानता हूं कि जब हम टीम बनाते हैं, तो हम डिलीवर करते हैं।” यह बात उन्होंने राज शमानी के पॉडकास्ट में कही, जहां चर्चा भारत-फ्रांस सहयोग, टेक्नोलॉजी, मल्टीपोलर दुनिया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे विषयों तक गई।
यह पॉडकास्ट उस वक्त लाइव हुआ जब मैक्रों भारत की अपनी चौथी यात्रा पूरी कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्रों ने राज शमानी से तब मुलाकात की थी जब वे मुंबई में थे। इस बातचीत में मैक्रों ने दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी को “गहराई” देने वाली पहलें बताईं और कहा कि भारत-फ्रांस का साथ मिलकर काम करना असल नतीजे देता है।
भारत-फ्रांस सहयोग पर मैक्रों की सोच: “टीम अप करके डिलीवर”
पॉडकास्ट में राज शमानी ने मैक्रों से पूछा कि क्या भारत और फ्रांस “एक उदाहरण सेट” कर रहे हैं। जवाब में मैक्रों ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई प्रमुख सेक्टरों में सहयोग की पहलें हुई हैं और यही वजह है कि उन्हें भरोसा है कि साथ मिलकर ठोस नतीजे निकाले जा सकते हैं।
मैक्रों का यह संदेश केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें एक रणनीतिक लाइन भी थी—कि भारत और फ्रांस अलग-अलग वैश्विक मुद्दों पर मिलकर ‘कार्यात्मक साझेदारी’ (working partnership) बनाते हैं। उनके शब्द “deliver” यही दिखाते हैं कि वे रिश्तों को सिर्फ घोषणाओं तक नहीं, प्रोजेक्ट्स और रिजल्ट्स तक ले जाना चाहते हैं।
स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी: US और China के बीच बैलेंस
मैक्रों ने पॉडकास्ट में वैश्विक रिश्तों के संतुलन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वे (और उनका इशारा भारत-फ्रांस की साझा सोच की ओर था) “दो बड़े पावर” में से किसी एक पर निर्भर नहीं होना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन दोनों के साथ अच्छा रिश्ता चाहिए, लेकिन भारत और फ्रांस की दोनों देशों के साथ रिश्तों की प्रकृति अलग-अलग है।
इस लाइन में “strategic autonomy” का संकेत साफ दिखता है—यानी बड़े ब्लॉक्स के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के मुताबिक निर्णय लेने की क्षमता। मैक्रों ने इसे एक तरह से भारत-फ्रांस के साझा दृष्टिकोण के रूप में पेश किया, जो आज की अनिश्चित वैश्विक राजनीति में अहम माना जाता है।
फ्रांस में भारतीय छात्रों के लिए मैक्रों का संदेश: “क्वालिटी, इंग्लिश और इनोवेशन”
मैक्रों ने भारतीय छात्रों को लेकर भी एक स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय छात्र फ्रांस आते हैं तो उन्हें “best quality universities” तक पहुंच मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वहां भाषा “clearly English” है और फ्रांस बड़े कॉरपोरेट्स, संस्थानों, और साथ ही यूरोप के सबसे वाइब्रेंट स्टार्टअप व इनोवेशन इकोसिस्टम का “यूनिक मिक्स” देता है।
यह हिस्सा खास इसलिए है क्योंकि यह भारत-फ्रांस रिश्तों में शिक्षा, कौशल और टैलेंट मोबिलिटी को केंद्र में लाता है। मैक्रों ने इसे केवल ‘स्टडी डेस्टिनेशन’ की तरह नहीं, बल्कि “करियर + इनोवेशन” के रास्ते के तौर पर पेश किया।
मुंबई से दिल्ली तक: यात्रा के दौरान क्या-क्या हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्रों मंगलवार को मुंबई पहुंचे थे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले। भारत यात्रा के अंत में उन्होंने X पर “Thank you India!” नोट भी शेयर किया और एक वीडियो पोस्ट करके भारत में मिले स्वागत की सराहना की।
उनकी तीन दिन की यात्रा के दौरान वे भारत में आयोजित AI Summit में भी शामिल हुए। इसके अलावा, मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को जून में फ्रांस में होने वाले G7 Summit के लिए “state visit” का निमंत्रण भी दिया।
मैक्रों के 6 बड़े संदेश: एक टेबल में
तालिका: पॉडकास्ट और यात्रा से निकले प्रमुख संदेश
| विषय | मैक्रों का मुख्य संदेश |
|---|---|
| भारत-फ्रांस साझेदारी | “When we team up, we deliver” |
| वैश्विक रणनीति | दो बड़े पावर में से किसी एक पर निर्भर नहीं रहना |
| US और China | दोनों से अच्छे रिश्ते, लेकिन अलग प्रकृति |
| भारतीय छात्र | फ्रांस में क्वालिटी यूनिवर्सिटीज, इंग्लिश और अवसर |
| स्टार्टअप/इनोवेशन | फ्रांस का वाइब्रेंट यूरोपीय इकोसिस्टम |
| आगे की डिप्लोमेसी | PM मोदी को जून में फ्रांस (G7) के लिए आमंत्रण |
भारत-फ्रांस रिश्तों के लिए इसका क्या मतलब?
मैक्रों के बयान दिखाते हैं कि फ्रांस भारत के साथ रिश्तों को “लंबी दूरी की साझेदारी” मानता है—जहां रक्षा या कूटनीति के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, शिक्षा और इनोवेशन भी बराबर की प्राथमिकता बन रहे हैं। “टीम अप करके डिलीवर” वाला फ्रेम दोनों देशों के लिए व्यावहारिक भी है, क्योंकि इससे रिश्तों की सफलता को ‘परिणाम’ में मापा जा सकता है।
साथ ही, strategic autonomy वाली लाइन बताती है कि दोनों देश अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पहचान बनाए रखते हुए पार्टनरशिप को आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह सोच आज के जियोपॉलिटिकल दबावों के दौर में भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
FAQs (5)
- मैक्रों ने भारत-फ्रांस सहयोग पर क्या बड़ा संदेश दिया?
उन्होंने कहा, “I really believe that when we team up, we deliver,” यानी भारत-फ्रांस जब साथ काम करते हैं तो ठोस नतीजे देते हैं। - मैक्रों ने US और China को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि वे (और भारत-फ्रांस की साझा सोच) किसी एक बड़े पावर पर निर्भर नहीं होना चाहते, और अमेरिका व चीन दोनों से अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं—हालांकि दोनों देशों के साथ रिश्तों की प्रकृति अलग है। - यह बातचीत किस प्लेटफॉर्म पर हुई?
यह बात राज शमानी के पॉडकास्ट में सामने आई, जो मैक्रों की भारत यात्रा के समापन के साथ लाइव किया गया। - मैक्रों ने भारतीय छात्रों के लिए फ्रांस को कैसे प्रस्तुत किया?
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में भारतीय छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली यूनिवर्सिटीज का एक्सेस मिलता है, भाषा इंग्लिश है, और फ्रांस बड़े संस्थानों के साथ-साथ यूरोप का वाइब्रेंट स्टार्टअप/इनोवेशन इकोसिस्टम भी देता है। - मैक्रों ने PM मोदी को कौन सा निमंत्रण दिया?
रिपोर्ट के अनुसार, मैक्रों ने PM नरेंद्र मोदी को जून में फ्रांस में G7 Summit के लिए स्टेट विजिट का निमंत्रण दिया।
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