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देशभर में SIR का अगला चरण: चुनाव आयोग ने 22 राज्य/UT को अप्रैल से तैयारी का आदेश

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Election Commission SIR April 2026
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चुनाव आयोग ने 22 राज्य/UT के CEOs को पत्र लिखकर अप्रैल से शुरू होने वाले SIR (Special Intensive Revision) के अगले चरण के लिए “preparatory work” जल्द पूरा करने को कहा है। यह अभ्यास Census 2027 के पहले चरण (हाउसलिस्टिंग/हाउसिंग) के साथ अप्रैल-सितंबर के बीच चलेगा और EC का कहना है कि दोनों में टकराव नहीं होगा

वोटर लिस्ट की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ फिर शुरू: 22 राज्यों-UT को EC का पत्र, अप्रैल से पैन-इंडिया SIR का विस्तार

चुनाव आयोग का बड़ा निर्देश: 22 राज्य/UT अप्रैल से होने वाले SIR के लिए तैयार रहें

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि वे मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के अगले चरण के लिए अपनी तैयारियां जल्द से जल्द पूरी करें। आयोग ने कहा है कि यह अभ्यास अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है, इसलिए “preparatory work” में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। यह जानकारी EC सचिव पवन दीवान द्वारा CEOs को लिखे पत्र में दी गई है।

यह खबर ऐसे समय आई है जब कई चुनावी राज्यों में SIR का काम पहले से चल रहा है और आयोग पैन-इंडिया स्तर पर वोटर लिस्ट को “क्लीन-अप” करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आयोग का मानना है कि एक सटीक, अपडेटेड और त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे बुनियादी जरूरत है—यही वजह है कि SIR को चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जा रहा है।

SIR क्या है और अब अगला चरण क्यों?

SIR यानी Special Intensive Revision of Electoral Rolls का मतलब है—मतदाता सूची में गहन स्तर पर जांच और सुधार, ताकि मृत (dead), स्थानांतरित (shifted), डुप्लिकेट (duplicate) या गलत प्रविष्टियों को हटाया जा सके और योग्य मतदाताओं के नाम सही तरीके से शामिल रह सकें। आयोग ने पत्र में याद दिलाया कि पैन-इंडिया SIR का आदेश 24 जून (पिछले साल) को दिया गया था। इसके तहत बिहार को छोड़कर बाकी सभी राज्यों/UTs को pre-revision activities शुरू करने को कहा गया था, क्योंकि बिहार में यह प्रक्रिया जून 2025 में ही शुरू हो गई थी।

बिहार में SIR समाप्त होने के बाद आयोग ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा की थी। इनमें केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। यानी अब बाकी बचे 22 राज्य/UTs में अगले चरण की तैयारी कराई जा रही है।

किन 22 राज्य/UTs को तैयारी करने को कहा गया?

EC ने जिन 22 राज्य/UTs को पत्र लिखकर तैयारियां पूरी करने को कहा है, उनमें शामिल हैं: आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड।

यह सूची खास इसलिए भी ध्यान खींचती है क्योंकि इसमें महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे बड़े शहरी/अर्ध-शहरी क्षेत्र भी हैं, जहां प्रवासन, पता बदलना और डुप्लिकेट एंट्री जैसी चुनौतियां अपेक्षाकृत ज्यादा देखी जाती हैं।

Census 2027 के साथ टाइमिंग: क्या दोनों टकराएंगे?

आयोग के पत्र में एक अहम बिंदु Census 2027 के पहले चरण से जुड़ा है। EC ने बताया कि 22 राज्य/UTs में होने वाला SIR, Census 2027 के फर्स्ट फेज के साथ ही पड़ेगा। Census 2027 का पहला चरण “Houselisting and Housing Census” है, जो अप्रैल से सितंबर के बीच किया जाएगा।

हालांकि EC अधिकारियों ने कहा कि वे आश्वस्त हैं कि SIR और Census 2027 की गतिविधियां एक-दूसरे से “clash” नहीं करेंगी। इसका संकेत यह है कि दोनों अभियानों की फील्ड लेवल प्लानिंग अलग-अलग तरीके से की जाएगी, ताकि एक ही समय में स्टाफ और संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

CEOs को “preparatory work” में क्या-क्या करना पड़ सकता है?

पत्र में विस्तार से हर टास्क लिस्ट नहीं दी गई, लेकिन SIR की सामान्य प्रक्रिया को देखते हुए तैयारियों में आमतौर पर ये काम आते हैं:
– BLO/फील्ड स्टाफ की ट्रेनिंग और ड्यूटी मैपिंग
– बूथ-वार डेटा ऑडिट, डुप्लिकेट/डेड/शिफ्टेड कैटेगरी की पहचान
– डाटा एंट्री/आईटी सिस्टम की तैयारी, सर्वर/सॉफ्टवेयर सपोर्ट
– शिकायत/क्लेम-ऑब्जेक्शन सिस्टम को मजबूत करना
– जन-जागरूकता अभियान, ताकि मतदाता समय पर अपना नाम चेक कर सकें

इस तरह का “preparatory work” जल्दी पूरा करने का मतलब यह भी है कि अप्रैल से शुरू होने वाले अगले चरण में मैदान पर कम कन्फ्यूजन होगा और काम ज्यादा तेज तथा व्यवस्थित हो सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबर: असम SIR पर PIL “infructuous”

इसी से जुड़ी एक दूसरी खबर में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक PIL (जनहित याचिका) पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें चुनाव आयोग को “पोल-बाउंड असम” में SIR कराने के निर्देश देने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच—CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली—ने चुनाव आयोग की दलील को नोट किया कि असम की फाइनल इलेक्टोरल रोल्स पहले ही तैयार हो चुकी हैं, इसलिए याचिका अब “infructuous” यानी निरर्थक हो गई है।

इस फैसले का राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश यह भी है कि अदालत ने उस समय हस्तक्षेप नहीं किया जब आयोग ने बताया कि चुनावी रोल्स का काम पूरा हो चुका है।

इस फैसले के मायने: वोटर लिस्ट पर देशव्यापी फोकस

अब तक की दिशा यही दिखाती है कि ECI मतदाता सूची की शुद्धता पर देशभर में एक समान मानक लागू करना चाहता है। बिहार से शुरुआत, फिर 12 राज्यों/UTs में SIR, और अब 22 राज्य/UTs के लिए अप्रैल चरण—यह एक स्ट्रक्चर्ड रोलआउट का संकेत है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि SIR की टाइमलाइन और गाइडलाइंस क्या रहती हैं, क्लेम-ऑब्जेक्शन विंडो कितनी लंबी होगी, और क्या किसी राज्य में राजनीतिक विवाद या प्रशासनिक दबाव इसे प्रभावित करता है। लेकिन अभी के लिए आयोग का संदेश साफ है—अगला चरण “expected in April” है और तैयारियों में ढील नहीं चलेगी।

FAQs (5)

  1. चुनाव आयोग ने किन राज्यों/UTs को SIR की तैयारी करने को कहा है?
    EC ने 22 राज्यों/UTs के CEOs को पत्र लिखकर SIR के अगले चरण के लिए “preparatory work” जल्द पूरा करने को कहा है, जिसमें महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना सहित कई राज्य शामिल हैं।
  2. SIR का अगला चरण कब शुरू होने की उम्मीद है?
    चुनाव आयोग के अनुसार, शेष 22 राज्यों/UTs में SIR अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है।
  3. क्या SIR और Census 2027 एक ही समय पर होंगे?
    हाँ, EC ने बताया कि SIR का यह चरण Census 2027 के पहले चरण (Houselisting & Housing Census) के साथ अप्रैल से सितंबर के बीच पड़ेगा, लेकिन आयोग का कहना है कि दोनों अभ्यास टकराएंगे नहीं।
  4. SIR को पैन-इंडिया कब आदेशित किया गया था?
    EC ने पत्र में कहा कि पैन-इंडिया SIR का आदेश 24 जून (पिछले साल) को दिया गया था और बिहार में यह जून 2025 से शुरू हो गया था।
  5. सुप्रीम कोर्ट ने असम SIR पर दायर PIL पर क्या कहा?
    सुप्रीम कोर्ट ने PIL सुनने से इनकार किया और चुनाव आयोग की दलील के आधार पर माना कि असम की फाइनल वोटर लिस्ट तैयार हो चुकी है, इसलिए याचिका “infructuous” हो गई है।

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