AI Summit 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत लौटकर खुशी जताई और कहा—“मुंबई का स्ट्रीट वेंडर फोन पर तुरंत डिजिटल पेमेंट लेता है, यह सभ्यता की कहानी है।” उन्होंने 15 साल से कम बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क बैन, डेटा-संप्रभुता और AI रेगुलेशन पर भी सख्त संदेश दिया
“मुंबई का स्ट्रीट वेंडर UPI लेता है, यह सभ्यता की कहानी है” — AI Summit 2026 में मैक्रों का भारत पर बड़ा बयान
AI Summit 2026 में मैक्रों: “भारत लौटकर अच्छा लगा”, डिजिटल पेमेंट को बताया “सभ्यता की कहानी”
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने AI Summit 2026 में बोलते हुए कहा कि “भारत वापस आकर बहुत अच्छा लगा।” उन्होंने टेक्नोलॉजी, रेगुलेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर अपनी बात रखी और भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की खास तारीफ की।
मैक्रों ने भारत की रोजमर्रा की डिजिटल क्रांति को एक बहुत सरल उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा, “मुंबई में स्ट्रीट वेंडर आज फोन पर तुरंत पेमेंट स्वीकार करता है, यह एक civilisation story है।” यानी उनके मुताबिक, यह केवल टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि समाज के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव है।
भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम की तारीफ: ‘सिर्फ सुविधा नहीं, बड़ा बदलाव’
मैक्रों के बयान का मतलब साफ है—जब टेक्नोलॉजी सबसे छोटे कारोबारी तक पहुंचती है, तभी उसका असली असर दिखता है। एक समय था जब डिजिटल पेमेंट केवल बड़े शहरों के बड़े स्टोर्स या कार्ड-स्वाइप मशीन तक सीमित था, लेकिन अब छोटी दुकानें और ठेले वाले भी मोबाइल से भुगतान ले रहे हैं—और यही “सभ्यता की कहानी” वाला उनका संकेत है।
यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की ताकत की तरफ भी इशारा करता है। मैक्रों ने इसे एक ऐसी कहानी कहा जो बताती है कि तकनीक कैसे आम लोगों के जीवन का हिस्सा बनकर पूरे समाज को बदल देती है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा: “15 साल से कम उम्र के लिए सोशल नेटवर्क बैन की तरफ बढ़ रहे”
मैक्रों ने अपने भाषण में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को सबसे संवेदनशील मुद्दों में गिना। उन्होंने कहा, “हम 15 साल से कम बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क्स को बैन करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।” यह फ्रांस की पॉलिसी दिशा का संकेत है, जिसमें नाबालिगों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने भारत के साथ सहयोग का भी जिक्र किया और कहा कि भारत भी ऐसी व्यवस्था से जुड़ सकता है जो बच्चों और किशोरों को सुरक्षित रखने के लिए काम करे, ताकि युवा नागरिक वास्तव में सुरक्षित रहें।
रेगुलेशन पर मैक्रों का सख्त स्टैंड: “बच्चों की सुरक्षा रेगुलेशन नहीं, सभ्यता है”
मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “Protecting our children is not regulation but civilisation.” यानी उनके अनुसार, बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम बनाना ‘बिना वजह की रोक-टोक’ नहीं है, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह लाइन इसलिए भी कही क्योंकि टेक कंपनियों और कुछ देशों में “रेगुलेशन” शब्द को नवाचार विरोधी माना जाता है। मैक्रों का तर्क है कि बच्चों की सुरक्षा और समाज के मूल्यों की रक्षा के लिए नियम जरूरी हैं।
डेटा-संप्रभुता पर चेतावनी: “कोई देश विदेशी मॉडल्स और डेटा डाउनलोडिंग का बाजार बनने को मजबूर नहीं”
मैक्रों ने डिजिटल संप्रभुता (data sovereignty) पर भी तीखी बात कही। उन्होंने कहा, “No country is bound to serve as a market where foreign companies serve models and download digital data.” यानी कोई भी देश मजबूरी में ऐसा बाजार न बने जहां विदेशी कंपनियां अपने मॉडल बेचें और स्थानीय डेटा उठाकर ले जाएं।
इस बयान में डेटा के नियंत्रण, स्थानीय नियमों और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी का मुद्दा सीधे सामने आता है। मैक्रों का संकेत यह है कि देशों को अपने नागरिकों के डेटा और डिजिटल इकोसिस्टम पर अधिकार बनाए रखना चाहिए।
AI पर मैक्रों का टेक मंत्र: “सबसे स्मार्ट AI सबसे महंगा नहीं”
मैक्रों ने AI पर एक दिलचस्प लाइन कही: “Smartest AI is not the most expensive, but built by best people for right purpose.” यानी सबसे स्मार्ट AI वही नहीं जो सबसे ज्यादा पैसा खर्च करके बना हो, बल्कि वह है जिसे सही लोग सही मकसद के लिए बनाते हैं।
यह बात स्टार्टअप्स और छात्रों के लिए भी एक मजबूत संदेश है—केवल बड़े बजट से नहीं, बल्कि टैलेंट, उद्देश्य और जिम्मेदार डिजाइन से बेहतरीन AI सिस्टम बनते हैं।
मैक्रों के भाषण के 5 बड़े संदेश (Quick Table)
| विषय | मैक्रों का संदेश |
|---|---|
| भारत का डिजिटल इकोसिस्टम | “मुंबई का स्ट्रीट वेंडर डिजिटल पेमेंट लेता है—यह सभ्यता की कहानी है” |
| बच्चों की सुरक्षा | अंडर-15 सोशल नेटवर्क बैन की दिशा में कदम |
| रेगुलेशन का मतलब | “बच्चों की सुरक्षा रेगुलेशन नहीं, सभ्यता है” |
| डेटा-संप्रभुता | कोई देश विदेशी कंपनियों के मॉडल-डेटा डाउनलोडिंग का बाजार बनने को मजबूर नहीं |
| AI की गुणवत्ता | सबसे स्मार्ट AI सबसे महंगा नहीं; सही लोग, सही उद्देश्य |
भारत के लिए इस भाषण का संकेत क्या है?
मैक्रों के बयान भारत के लिए तीन बड़े संकेत देते हैं। पहला, डिजिटल पेमेंट और टेक्नोलॉजी को “सोशल ट्रांसफॉर्मेशन” की तरह देखा जा रहा है। दूसरा, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर वैश्विक स्तर पर सख्त नियमों की तरफ झुकाव बढ़ रहा है। तीसरा, डेटा-संप्रभुता और AI रेगुलेशन पर देशों का रुख ज्यादा assertive होता जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह भाषण सिर्फ तारीफ नहीं था; इसमें “नियम, सुरक्षा और संप्रभुता” का मजबूत पॉलिसी मैसेज भी छिपा था।
FAQs (5)
- मैक्रों ने भारत के डिजिटल पेमेंट पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि “मुंबई में स्ट्रीट वेंडर फोन पर तुरंत पेमेंट स्वीकार करता है—यह एक civilisation story है।” - मैक्रों ने सोशल नेटवर्क पर बच्चों के लिए क्या कहा?
उन्होंने कहा कि फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क्स को बैन करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। - “Protecting our children is not regulation but civilisation” का मतलब क्या है?
मैक्रों के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम बनाना अनावश्यक नियंत्रण नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी और सभ्यता का हिस्सा है। - डेटा-संप्रभुता पर मैक्रों की मुख्य चेतावनी क्या थी?
उन्होंने कहा कि कोई देश विदेशी कंपनियों के लिए ऐसा बाजार बनने को मजबूर नहीं है जहां वे अपने मॉडल बेचें और स्थानीय डिजिटल डेटा डाउनलोड करें। - AI को लेकर मैक्रों ने क्या विचार रखा?
उन्होंने कहा कि सबसे स्मार्ट AI सबसे महंगा नहीं होता, बल्कि वह होता है जिसे सही लोग सही उद्देश्य के लिए बनाते हैं।
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