सुप्रीम कोर्ट ने स्नेक वेनम केस में कहा कि अगर लोकप्रिय लोग ‘बोल न पाने वाले पीड़ितों’ जैसे सांपों का इस्तेमाल करें तो समाज को बहुत गलत संदेश जाएगा। कोर्ट एल्विश यादव पर वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट की शिकायत की जांच करेगा; अगली सुनवाई 19 मार्च को है।
नोएडा रेव पार्टी में ‘स्नेक वेनम’ आरोप: SC का कड़ा रुख, “पॉपुलर लोगों के लिए अलग नियम नहीं”
स्नेक वेनम केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “सेलिब्रिटीज़ को ‘बोल न पाने वाले पीड़ितों’ का इस्तेमाल करने देंगे तो बहुत गलत संदेश जाएगा”
सुप्रीम कोर्ट ने स्नेक वेनम केस में एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर लोकप्रिय/सेलिब्रिटी लोग “बोल न पाने वाले पीड़ितों” जैसे सांपों का इस्तेमाल करने लगें, तो यह समाज को “बहुत गलत संदेश” दे सकता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इस मामले में यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत दर्ज शिकायत की भी जांच करेगा।
यह टिप्पणी उस वक्त आई जब न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ एल्विश यादव की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने चार्जशीट और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है। कोर्ट ने एल्विश के वकील से सीधा सवाल किया कि “आपने सांप के साथ डील किया या नहीं? आप सांप को लेकर खेलते हैं… क्या आप ज़ू में जाकर जानवरों के साथ खेल सकते हैं? क्या वह अपराध नहीं होगा?”
मामला क्या है: नोएडा ‘रैव पार्टी’ और स्नेक वेनम आरोप
इस केस की शुरुआत नवंबर 2023 में हुई थी, जब एल्विश यादव पर नोएडा में कथित ‘रैव पार्टी’ में सांपों के ज़हर (snake venom) के इस्तेमाल का आरोप लगा। उन्हें 17 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि रैव पार्टियों में इस्तेमाल के लिए संदिग्ध स्नेक वेनम मिला था और नौ सांप रेस्क्यू किए गए थे, जिनमें पांच कोबरा भी शामिल थे।
चार्जशीट में आरोप है कि “रिक्रिएशनल ड्रग” की तरह रैव पार्टियों में स्नेक वेनम का सेवन किया गया, जिसमें विदेशी नागरिकों तक के शामिल होने का आरोप है। यह मामला इसलिए भी हाई-प्रोफाइल बना क्योंकि एल्विश यादव एक चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं और टीवी के कई रियलिटी शोज़ में भी दिख चुके हैं।
एल्विश यादव का पक्ष: “गेस्ट अपीयरेंस था, कोई सबूत नहीं”
एल्विश यादव की ओर से सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता ने अदालत में दलील दी कि एल्विश एक पार्टी में सिंगर फज़िलपुरिया के वीडियो के लिए “गेस्ट अपीयरेंस” देने गए थे। उनके वकील ने कहा कि किसी रैव पार्टी या किसी शेड्यूल्ड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस के सेवन का कोई ठोस सबूत नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी जोर दिया कि एल्विश कथित लोकेशन पर मौजूद नहीं थे और रिकॉर्ड पर मौजूद मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिन नौ सांपों की जांच हुई, वे “पॉइज़नस नहीं” पाए गए। इसके अलावा वकील का यह भी तर्क रहा कि एल्विश से कोई सांप, नशीला पदार्थ या साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस की रिकवरी नहीं हुई और सह-आरोपियों के साथ उनका ‘कौज़ल लिंक’ स्थापित नहीं होता।
राज्य का पक्ष: “पांच कोबरा सहित 9 सांप, संदिग्ध वेनम बरामद”
राज्य की ओर से पेश वकील ने कहा कि पुलिस ने नौ सांपों को रेस्क्यू किया, जिनमें पांच कोबरा शामिल थे, और रैव पार्टियों में इस्तेमाल के लिए संदिग्ध स्नेक वेनम मिला। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पक्ष के वकील से यह भी पूछा कि “स्नेक वेनम कैसे निकाला जाता है और रैव पार्टियों में इसका इस्तेमाल कैसे होता है?”
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कोर्ट यह समझना चाहता है कि कथित अपराध का तरीका क्या था, और क्या रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री वाइल्डलाइफ एक्ट व अन्य धाराओं के तहत अपराध की बुनियाद बनाती है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट का फोकस: वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट और “सेलिब्रिटी छूट” का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का निचोड़ यह है कि “लोकप्रियता” किसी को कानून से ऊपर नहीं रख सकती। कोर्ट ने “voiceless victims” शब्द का इस्तेमाल करके यह रेखांकित किया कि जानवर—खासकर सांप जैसे जीव—अपने साथ हुए शोषण या दुर्व्यवहार के खिलाफ बोल नहीं सकते, इसलिए कानून और समाज दोनों को उनके प्रति ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए।
कोर्ट ने साफ किया कि वह वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत दर्ज शिकायत के पहलू को लेकर चिंतित है। यानी केस का ध्यान सिर्फ ‘ड्रग’ या ‘रैव पार्टी’ नैरेटिव पर नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन पर भी है।
केस टाइमलाइन: अब तक क्या-क्या हुआ?
तालिका: प्रमुख घटनाक्रम
| तारीख/समय | घटनाक्रम |
|---|---|
| नवंबर 2023 | एल्विश यादव के खिलाफ केस दर्ज (स्नेक वेनम के कथित इस्तेमाल का आरोप) |
| 17 मार्च 2024 | एल्विश यादव की गिरफ्तारी |
| 6 अगस्त 2025 | सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई |
| फरवरी 2026 | SC की टिप्पणी: ‘voiceless victims’ का इस्तेमाल “bad message”, वाइल्डलाइफ एक्ट शिकायत पर जांच का संकेत |
| 19 मार्च 2026 | अगली सुनवाई की तारीख |
आगे क्या: 19 मार्च को सुनवाई, कानूनी बहस का केंद्र
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 19 मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। कोर्ट का अगला कदम संभवतः यह देखना होगा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एल्विश यादव के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को जारी रखा जाए या नहीं। साथ ही, यह भी अहम होगा कि वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत शिकायत का कानूनी आधार किस हद तक बनता है।
यह केस पब्लिक इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी, वन्यजीवों के साथ व्यवहार और “मनोरंजन के नाम पर जानवरों के इस्तेमाल” की सीमा जैसे सवालों को भी राष्ट्रीय बहस में ला रहा है।
FAQs (5)
- सुप्रीम कोर्ट ने स्नेक वेनम केस में “voiceless victims” क्यों कहा?
कोर्ट ने कहा कि सांप जैसे जानवर “बोल नहीं सकते”, और अगर लोकप्रिय लोग उनका इस्तेमाल करें तो यह समाज को बहुत गलत संदेश दे सकता है। - यह मामला किसके खिलाफ है और मुख्य आरोप क्या हैं?
यह मामला यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ है; आरोप है कि नोएडा में कथित रैव पार्टी में स्नेक वेनम का इस्तेमाल/सेवन “रिक्रिएशनल ड्रग” की तरह किया गया। - एल्विश यादव का बचाव क्या है?
उनकी ओर से कहा गया कि वे केवल एक वीडियो में गेस्ट अपीयरेंस के लिए गए थे, उनके खिलाफ रैव पार्टी/साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस का ठोस सबूत नहीं है, और रिकॉर्ड पर मौजूद मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार जांच किए गए नौ सांप पॉइज़नस नहीं पाए गए। - पुलिस/राज्य का दावा क्या है?
राज्य के वकील ने कहा कि पुलिस ने नौ सांप रेस्क्यू किए जिनमें पांच कोबरा शामिल थे, और रैव पार्टियों में इस्तेमाल के लिए संदिग्ध स्नेक वेनम मिला। - अब अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की है।
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