भारत‑ब्राज़ील ने 5 साल में $20 बिलियन द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया और क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग समझौता किया। राष्ट्रपति लूला बोले—$15 बिलियन “ज्यादा नहीं”, 2030 तक $30 बिलियन संभव है। निवेश, टेक‑ट्रांसफर, जॉइंट वेंचर्स, DPI‑AI साझेदारी पर जोर।
India‑Brazil Business Forum में लूला का संदेश: $15 बिलियन से आगे तेज़ दौड़, 5 साल में $20 बिलियन और 2030 तक $30 बिलियन संभव
“$20 बिलियन भी कम है”: लूला ने भारत‑ब्राज़ील व्यापार को 2030 तक $30 बिलियन पहुँचाने का दिया नया विज़न
भारत और ब्राज़ील ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को $20 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है और इसी दिशा में दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) पर सहयोग का एक अहम समझौता भी साइन किया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया की सप्लाई‑चेन और जियो‑इकॉनॉमिक्स तेजी से बदल रही है, और देशों को ऊर्जा‑सुरक्षा, बैटरी‑मटेरियल और टेक्नोलॉजी के लिए भरोसेमंद साझेदार चाहिए।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने भारत‑ब्राज़ील बिज़नेस फोरम में इससे भी आगे बढ़कर कहा कि उन्हें हैरानी नहीं होगी अगर 2030 तक यह व्यापार $30 बिलियन तक पहुंच जाए। उनका संदेश साफ था—आज का $15 बिलियन व्यापार “ज्यादा नहीं” है और दोनों देशों की संभावनाएं इससे कहीं बड़ी हैं।
लूला ने ट्रेड ग्रोथ का पूरा सफर गिनाया: 2006 से 2025 तक तेज़ उछाल
लूला ने मंच से आंकड़ों के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि भारत‑ब्राज़ील ट्रेड में भले ही तेजी आई है, लेकिन अभी भी यह “अंडर‑अचीव” कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2006 में दोनों देशों का व्यापार लगभग $200 मिलियन था, फिर कुछ साल पहले यह $2.4 बिलियन तक गया और पिछले साल यह बढ़कर $15 बिलियन हो गया। लेकिन उनके मुताबिक, “यह ज्यादा नहीं है—विकास की संभावनाएं बहुत बड़ी हैं।”
लूला ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले कुछ वर्षों में $20 बिलियन तक पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई है। फिर भी उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को इससे भी ज्यादा महत्वाकांक्षी फ्रेमवर्क अपनाना चाहिए, ताकि 2030 तक $30 बिलियन का लक्ष्य वास्तविकता बन सके।
$20 बिलियन का लक्ष्य कैसे हासिल होगा: “ब्रॉडर ट्रेड आर्किटेक्चर” की योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और ब्राज़ील ने एक “ब्रॉडर ट्रेड आर्किटेक्चर” विकसित करने पर सहमति जताई है, जिसका उद्देश्य केवल लेन-देन आधारित व्यापार नहीं, बल्कि लंबी अवधि की साझेदारियाँ बनाना है। इसका मतलब है कि दोनों देश सिर्फ इम्पोर्ट‑एक्सपोर्ट नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि जॉइंट वेंचर्स, टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन और इंडस्ट्रियल लिंकेंज जैसे मॉडल पर भी जोर देंगे।
लूला ने भारत में टेक‑ट्रांसफर और इंडस्ट्रियल मौजूदगी बढ़ाने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि ब्राज़ील भारत में संयुक्त परियोजनाओं (joint ventures) और साझा क्षमताओं (shared capabilities) के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहता है।
क्रिटिकल मिनरल्स समझौता: सप्लाई‑चेन सुरक्षा और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी का ‘की’ कदम
भारत‑ब्राज़ील ने क्रिटिकल मिनरल्स पर जो सहयोग pact साइन किया है, वह आज के समय में बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। क्रिटिकल मिनरल्स—जैसे लिथियम, निकल, कोबाल्ट, रेयर अर्थ और दूसरे बैटरी‑ग्रेड मटेरियल—EV, सोलर, विंड टर्बाइन, सेमीकंडक्टर और आधुनिक रक्षा‑टेक्नोलॉजी की सप्लाई‑चेन का आधार बन चुके हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्राज़ील अपने क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में भारत समेत विदेशी निवेश आकर्षित करना चाहता है। साथ ही, यह समझौता दोनों देशों के लिए “वulnerabilities” कम करने का तरीका है—यानी किसी एक क्षेत्र/देश पर निर्भरता घटाकर, सप्लाई‑चेन को ज्यादा भरोसेमंद बनाना।
DPI और AI की साझेदारी: सिर्फ कमोडिटीज नहीं, अब डिजिटल‑टेक इकोसिस्टम
लूला ने यह भी कहा कि भारत और ब्राज़ील डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने में अग्रणी रहे हैं, और यह साझेदारी कमोडिटी ट्रेड से आगे बढ़कर डिजिटल और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तक जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, लूला की यह यात्रा 18 फरवरी से चल रही है और इसमें India AI Impact Summit में भागीदारी भी शामिल है—यानी AI और डिजिटल गवर्नेंस को द्विपक्षीय बातचीत के केंद्र में रखा गया है।
यह संकेत देता है कि भविष्य में भारत‑ब्राज़ील सहयोग केवल कृषि/खनिज/ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल सेवाएँ, GovTech, AI‑एप्लिकेशन और इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में भी बढ़ सकता है।
पीयूष गोयल का बयान: “Defining moment” और भारत की FTA रणनीति
कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों में “defining moment” बताया। उन्होंने कहा कि ब्राज़ील लंबे समय से ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज रहा है, और भारत के साथ इसकी साझेदारी व्यापक रणनीतिक अर्थ रखती है।
गोयल ने भारत के बढ़ते ट्रेड नेटवर्क का भी जिक्र किया और कहा कि भारत को अब नौ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के जरिए दुनिया के लगभग दो‑तिहाई वैश्विक व्यापार तक “preferential access” मिल चुका है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत कई भागीदारों के साथ बातचीत कर रहा है—इज़राइल और GCC के साथ terms of reference फाइनल हुए हैं, कनाडा के साथ चर्चा शुरू हुई है और ओटावा के साथ FTA वार्ता औपचारिक रूप से शुरू करने की उम्मीद है।
गोयल ने यह भी कहा कि भारत अगले दो वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने ब्राज़ील की कंपनियों को भारत में एग्रीकल्चर, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजीज में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।
लूला के साथ “सबसे बड़ा बिज़नेस डेलिगेशन”: संदेश क्या है?
लूला ने कहा कि वह अपने किसी भी विदेशी दौरे में इतना बड़ा बिज़नेस डेलिगेशन लेकर नहीं आए थे, और यह भारत के प्रति ब्राज़ील की गंभीरता दिखाता है। उन्होंने इसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विकास‑लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि लक्ष्य सिर्फ “डेवलप्ड देशों” जैसा बनना नहीं, बल्कि खुद “developed countries” बनना है।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि भारत‑ब्राज़ील रिश्ते अब अधिक बिज़नेस‑ड्रिवन, निवेश‑उन्मुख और टेक‑सक्षम दिशा में आगे बढ़ सकते हैं—खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई‑चेन रिस्क बढ़े हुए हैं।
भारत‑ब्राज़ील ट्रेड को बढ़ाने के लिए संभावित सेक्टर्स (प्रैक्टिकल नजरिया)
रिपोर्ट के संकेतों के आधार पर कुछ सेक्टर्स ऐसे हैं जहां सहयोग तेजी से बढ़ सकता है:
- क्रिटिकल मिनरल्स और क्लीन एनर्जी सप्लाई‑चेन: खनन, रिफाइनिंग, बैटरी‑ग्रेड प्रोसेसिंग, जॉइंट प्रोजेक्ट्स।
- एग्री‑टेक और फूड प्रोसेसिंग: ब्राज़ील की कृषि ताकत और भारत का प्रोसेसिंग/कंजम्प्शन मार्केट।
- ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग: पार्ट्स, EV‑कंपोनेंट्स, इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन।
- DPI + AI: डिजिटल गवर्नेंस, भुगतान, पहचान, हेल्थ‑टेक जैसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर सीख‑साझा और कॉमर्शियल एप्लिकेशन।
(Note: ये सेक्टर्स रिपोर्ट में दिए गए पॉलिसी संकेतों/बयानों से निकले संभावित अवसर हैं; वास्तविक प्रोजेक्ट्स आगे के MoUs/डील्स पर निर्भर करेंगे।)
FAQs (5)
- भारत‑ब्राज़ील ने व्यापार का नया लक्ष्य क्या तय किया है?
दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को $20 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। - राष्ट्रपति लूला ने 2030 के लिए क्या कहा?
लूला ने कहा कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा अगर 2030 तक भारत‑ब्राज़ील व्यापार $30 बिलियन तक पहुंच जाए, क्योंकि वर्तमान $15 बिलियन “ज्यादा नहीं” है। - क्रिटिकल मिनरल्स पर क्या समझौता हुआ है और यह क्यों अहम है?
भारत और ब्राज़ील ने क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग pact साइन किया है, जो सप्लाई‑चेन सुरक्षा, क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। - पीयूष गोयल ने इस दौरे पर क्या कहा?
गोयल ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में “defining moment” बताया और कहा कि भारत को 9 FTAs के जरिए दुनिया के लगभग दो‑तिहाई व्यापार तक preferential access मिलता है; साथ ही कई नए FTA बातचीत चल रही हैं। - लूला भारत क्यों बड़े बिज़नेस डेलिगेशन के साथ आए?
लूला ने कहा कि यह उनके विदेशी दौरों में सबसे बड़ा बिज़नेस डेलिगेशन है, जो भारत के प्रति ब्राज़ील की प्रतिबद्धता और निवेश‑व्यापार बढ़ाने की मंशा को दिखाता है।
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