US waiver के बाद भारतीय रिफाइनरों ने 10 मिलियन बैरल से ज्यादा रूसी तेल खरीदा, जिसमें HPCL और MRPL जैसे सरकारी रिफाइनरी शामिल हैं। Urals अब Brent से $2-4 प्रीमियम पर बिक रहा है।
ईरान युद्ध के बीच रूसी तेल पर भारत का दांव: $2-4 प्रीमियम पर 20 मिलियन बैरल डील, क्या महंगाई बढ़ेगी?
US waiver का तुरंत फायदा: भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल की खरीद तेज कर दी
अमेरिका द्वारा 30 दिन की अस्थायी छूट देने के तुरंत बाद भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल की होड़ मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार 10 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल पहले ही खरीद लिया गया है, जिसमें से बहुत सा waiver के पहले भी डील हो चुका था। एशियाई समुद्रों में फंसे लाखों बैरल रूसी क्रूड ने मिडिल ईस्ट सप्लाई संकट के बीच भारतीय खरीदारों को जल्द राहत दी है। मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प (HPCL) जैसे सरकारी रिफाइनर दिसंबर के बाद पहली बार रूसी तेल मार्केट में लौटे हैं। ट्रेडर्स ने इन डील्स की पुष्टि की है।
समुद्र में फंसे तेल का स्टॉक: 15 मिलियन बैरल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 15 मिलियन बैरल रूसी क्रूड लदा हुआ है। सिंगापुर के पास 7 मिलियन बैरल के जहाज इंतजार कर रहे हैं। ये सभी भारतीय बंदरगाहों तक एक हफ्ते में पहुंच सकते हैं। भूमध्य सागर और सुएज़ नहर में भी कई टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। waiver के बाद टैंकरों ने गंतव्य भारत दिखाना शुरू कर दिया। Kpler के अनुसार कम से कम 18 जहाज Urals क्रूड से लदे भारत की ओर आ रहे हैं।
रूसी Urals अब प्रीमियम पर: $2-4 Brent से महंगा
रूसी Urals ग्रेड अब Delivered basis पर Dated Brent से $2 से $4 प्रति बैरल महंगा बिक रहा है। यह उलटफेर बड़ा है क्योंकि पहले यह $15-20 के डिस्काउंट पर मिलता था। ईरान युद्ध के बाद उपलब्धता की कमी से कीमतें उछलीं। waiver से पहले भी खरीदारी तेज थी लेकिन अब रिफाइनर 2 मिलियन बैरल प्रति दिन के पुराने स्तर पर लौट सकते हैं। जनवरी में यह 1.06 मिलियन बीपीडी था, जो 2022 के सितंबर के बाद सबसे कम था।
सरकारी रिफाइनरों की वापसी: HPCL, MRPL फिर बाजार में
HPCL और MRPL ने नवंबर के बाद रूसी तेल खरीदा। Reliance Industries ने फरवरी में फिर शुरू किया था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) भी ट्रेडर्स से बात कर रहे हैं। कुल 20 मिलियन बैरल डील्स हुईं। ट्रेडर्स कहते हैं कि अब उपलब्धता ही मुख्य मुद्दा है, कीमत गौण। waiver से पहले भी टैंकर भारत की ओर मुड़े।
ईरान युद्ध का असर: मिडिल ईस्ट सप्लाई क्रंच से रूसी तेल की डिमांड
ईरान युद्ध ने पर्सियन गल्फ से तेल सप्लाई बाधित कर दी। भारत 90% तेल आयात करता है, इसलिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज हुई। रूस ने 2022 के बाद भारत को सबसे बड़ा सप्लायर बनाया था, लेकिन US दबाव से जनवरी में खरीद घटी। अब waiver ने फिर खरीदारी को हरी झंडी दी। ट्रेडर्स का अनुमान है कि डिस्काउंट खत्म हो रहा है, प्रीमियम आ रहा है।
US का संदेश: भारत essential partner, अमेरिकी तेल बढ़ाओ
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत US का essential partner है, उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल खरीद बढ़ाएगी। waiver तेल बहाव बनाए रखने के लिए है। ईरान के ग्लोबल एनर्जी को बंधक बनाने के प्रयास को कम करेगा। waiver केवल 5 मार्च तक लोड तेल के लिए, 4 अप्रैल तक वैलिड। नए ट्रांजेक्शन कवर नहीं।
भारत के लिए क्या मतलब: ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई का जोखिम
यह waiver भारत को तत्काल राहत देता है। रिफाइनर स्टॉक भर सकते हैं। लेकिन 30 दिन बाद नीति सख्त हो सकती है। अमेरिका चाहता है रूसी आयात कम हो, US तेल बढ़े। भारत diversification पर जोर देगा। जनवरी में डेफिसिट बढ़ा था, waiver से कुछ स्थिरता आएगी। लेकिन Urals प्रीमियम से लागत बढ़ सकती है।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: भारतीय रिफाइनरों ने कितना रूसी तेल खरीदा?
उत्तर: waiver के बाद 10 मिलियन बैरल से ज्यादा खरीदा गया, जिसमें से बहुत सा पहले भी डील हो चुका था। - प्रश्न: Urals क्रूड की कीमत Brent से कितनी ज्यादा?
उत्तर: Delivered basis पर $2 से $4 प्रति बैरल प्रीमियम पर बिक रहा है, पहले $15-20 डिस्काउंट था। - प्रश्न: कौन–से रिफाइनर खरीद रहे हैं?
उत्तर: HPCL, MRPL ने नवंबर के बाद फिर खरीदा। IOC, BPCL, Reliance भी ट्रेडर्स से बात में। - प्रश्न: समुद्र में कितना रूसी तेल फंसा है?
उत्तर: अरब सागर/बंगाल खाड़ी में 15 मिलियन बैरल, सिंगापुर के पास 7 मिलियन, सभी भारत पहुंच सकते हैं। - प्रश्न: waiver कब तक वैलिड है?
उत्तर: 30 दिन, 5 मार्च तक लोड तेल के लिए, 4 अप्रैल तक डिलीवरी। नए ट्रांजेक्शन कवर नहीं।
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