केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक भारत‑अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील अप्रैल में ऑपरेशनल हो सकती है। इसके तहत करीब आधे भारतीय निर्यात US में ड्यूटी‑फ्री जाएंगे, 35% पर लगभग 18% कम टैरिफ लगेगा और 10–15% (स्टील‑एल्यूमिनियम सहित) पर सेक्शन 232 टैरिफ जारी रहेंगे।
US टैरिफ 50% से 18% तक, 25% पेनल्टी हटेगी: भारत‑US इंटरिम डील की टाइमलाइन और पूरा गेमप्लान
भारत‑अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील अप्रैल से ऑपरेशनल हो सकती है: पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील के अप्रैल में “ऑपरेशनलाइज” होने की संभावना है। उनके मुताबिक, इसी तरह UK और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी अप्रैल में लागू होने की उम्मीद है, जबकि न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौता सितंबर तक “कॉम्प्लीमेंट” किया जा सकता है।
इस बयान का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की थी। इसके बाद वॉशिंगटन और नई दिल्ली ने एक अंतरिम ट्रेड डील पर साइन किए और संयुक्त बयान जारी करके द्विपक्षीय समझौते की दिशा तय की।
इंटरिम डील में क्या है: ड्यूटी‑फ्री, कम टैरिफ और सेक्शन 232 की सख्ती
पीयूष गोयल के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत भारत के करीब आधे निर्यात (लगभग 50%) अमेरिका में ड्यूटी‑फ्री एंट्री कर पाएंगे। करीब 35% निर्यात पर कम टैरिफ लगेगा, जो लगभग 18% बताया गया है। बाकी 10–15% निर्यात—जिसमें स्टील और एल्यूमिनियम जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं—अमेरिका के सेक्शन 232 टैरिफ के दायरे में बने रहेंगे, जो 50% तक जा सकते हैं।
यानी डील का सबसे बड़ा “तुरंत” फायदा यह है कि कई भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में तेज राहत मिलेगी, लेकिन धातु जैसे संवेदनशील सेक्टर पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
रूसी कच्चे तेल पर शर्त और 25% पेनल्टी हटाने की बात
रिपोर्ट के मुताबिक, डील के तहत भारत अपनी रूसी कच्चे तेल (Russian crude oil) की इम्पोर्ट निर्भरता कम करेगा और इसके बदले ट्रंप प्रशासन भारतीय शिपमेंट्स पर लगने वाली 25% पेनल्टी हटाएगा। यह शर्त‑आधारित “क्विड‑प्रो‑क्वो” व्यवस्था बताई गई है, जो आने वाले महीनों में भारत की ऊर्जा खरीद रणनीति और ट्रेड बैलेंस दोनों पर असर डाल सकती है।
कौन‑कौन से सेक्टर को मिलेगा तुरंत बूस्ट?
पीयूष गोयल के मुताबिक, इस अंतरिम ट्रेड डील से कई लेबर‑इंटेंसिव और एक्सपोर्ट‑ओरिएंटेड सेक्टर को तुरंत फायदा मिल सकता है। उन्होंने जिन सेक्टर्स का जिक्र किया, उनमें शामिल हैं:
– टेक्सटाइल्स
– मशीनरी कंपोनेंट्स
– ऑटो पार्ट्स
– लेदर, फुटवियर
– स्पोर्ट्स गुड्स
– फर्नीचर
– हैंडीक्राफ्ट्स और हैंडलूम प्रोडक्ट्स
ये ऐसे सेक्टर हैं जहां भारत का सप्लाई‑चेन बेस बड़ा है और US में डिमांड भी स्थिर रहती है। टैरिफ राहत मिलने पर ऑर्डर, मार्जिन और प्रतिस्पर्धात्मकता—तीनों में सुधार की संभावना बनती है।
क्या‑क्या बाहर रखा गया है: “सेंसिटिव एग्री” पूरी तरह एक्सक्लूड
गोयल ने यह भी साफ किया कि संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा गया है। जिन आइटम्स को कवर नहीं किया गया, उनमें डेयरी, पोल्ट्री, मीट, चावल, गेहूं, शुगर, सोयाबीन, कॉर्न, मिलेट्स, दालें, केला और जीन‑परिवर्तित (GM) प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
इस कदम को भारत की घरेलू कृषि‑राजनीति और फूड‑सिक्योरिटी के नजरिये से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन्हीं क्षेत्रों में आयात‑खुलापन अक्सर राजनीतिक और आर्थिक विवाद पैदा करता है।
UK‑ओमान FTA और न्यूज़ीलैंड pact: अप्रैल‑सितंबर का ट्रेड कैलेंडर
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि UK और ओमान के साथ FTAs के अप्रैल में ऑपरेशनल होने की संभावना है। साथ ही, न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौता सितंबर तक “कॉम्प्लीमेंट” होने की उम्मीद जताई गई। इसका संकेत यह है कि भारत 2026 के पहले 9 महीनों में एक साथ कई फ्रंट्स पर ट्रेड डील्स को जमीन पर उतारने की कोशिश कर रहा है।
डील के बाद बिजनेस के लिए क्या मायने?
अगर अप्रैल तक ऑपरेशनलाइजेशन हो जाता है, तो एक्सपोर्टर्स को ऑर्डर बुकिंग, प्राइसिंग और लॉन्ग‑टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स में जल्दी स्पष्टता मिल सकती है। साथ ही, जो कंपनियां US मार्केट में “टैरिफ‑हिट” की वजह से पिछड़ रही थीं, उनके लिए री‑एंट्री का विंडो खुल सकता है। हालांकि, सेक्शन 232 वाले प्रोडक्ट्स और उन सेक्टर्स के लिए अनिश्चितता बनी रहेगी जो इस डील की कवरेज में नहीं हैं।
FAQs (5)
- भारत‑अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील कब तक लागू हो सकती है?
पीयूष गोयल के मुताबिक यह डील अप्रैल में ऑपरेशनलाइज हो सकती है। - इस डील में भारतीय निर्यात पर टैरिफ स्ट्रक्चर क्या बताया गया है?
गोयल के अनुसार, करीब आधे निर्यात US में ड्यूटी‑फ्री जाएंगे, लगभग 35% पर करीब 18% कम टैरिफ लगेगा और 10–15% (स्टील‑एल्यूमिनियम सहित) पर सेक्शन 232 टैरिफ जारी रहेंगे, जो 50% तक जा सकते हैं। - डील से किन सेक्टर्स को तुरंत फायदा बताया गया है?
टेक्सटाइल्स, मशीनरी कंपोनेंट्स, ऑटो पार्ट्स, लेदर‑फुटवियर, स्पोर्ट्स गुड्स, फर्नीचर, हैंडीक्राफ्ट्स और हैंडलूम प्रोडक्ट्स को बूस्ट मिलने की बात कही गई है। - कौन‑से कृषि उत्पाद इस समझौते से बाहर रखे गए हैं?
डेयरी, पोल्ट्री, मीट, चावल, गेहूं, शुगर, सोयाबीन, कॉर्न, मिलेट्स, दालें, केला और GM प्रोडक्ट्स को समझौते से बाहर रखा गया है। - UK, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ ट्रेड डील्स की टाइमलाइन क्या है?
गोयल के अनुसार UK और ओमान के FTAs अप्रैल में ऑपरेशनल हो सकते हैं, जबकि न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौता सितंबर तक कॉम्प्लीमेंट होने की संभावना है।
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