ISRO डायरेक्टर P Veeramuthuvel ने कन्फर्म किया – Chandrayaan-4 2027-28 में चांद से 2-3 किलो सैंपल लाएगा। लैंडर, असेंडर, रिटर्न मॉड्यूल। शिव शक्ति पॉइंट के पास लैंडिंग, ड्रिलिंग, डॉकिंग। ₹2100 करोड़ बजट, 2040 ह्यूमन मिशन का स्टेप।
Chandrayaan-4: चांद से मिट्टी लाने का भारत का ऐतिहासिक मिशन कन्फर्म
दोस्तों, चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग ने दुनिया को चौंकाया था। अब ISRO ने अगला बड़ा धमाका कर दिया। स्पेशल प्रोजेक्ट्स डायरेक्टर पी वीरमुथुवेल ने कन्फर्म किया – चंद्रयान-4 भारत का पहला सैंपल रिटर्न मिशन होगा। 2027-28 में लॉन्च, चांद से 2-3 किलो मिट्टी और रॉक्स धरती पर लाएगा। शिव शक्ति पॉइंट के पास लैंडिंग, ड्रिलिंग से सब-सर्फेस सैंपल, ऑर्बिट में डॉकिंग – सब कुछ देसी टेक्नोलॉजी से। ये मिशन भारत को अमेरिका, रूस, चीन वाले एलीट क्लब में ले जाएगा।
कैबिनेट ने ₹2104 करोड़ अप्रूव किया। 5 मॉड्यूल्स – ट्रांसफर, डिसेंडर, असेंडर, प्रोपल्शन, री-एंट्री। दो लॉन्चेस में स्पेस भेजा जाएगा। इस आर्टिकल में पूरा प्लान – टेक्नोलॉजी, साइंस गोल्स, चैलेंजेस, फ्यूचर इंपैक्ट। ISRO की ऑफिशियल अपडेट्स से फैक्ट्स। स्पेस लवर्स के लिए कंप्लीट गाइड। चलिए चांद की यात्रा शुरू करते हैं।
चंद्रयान-4 का मिशन प्लान: 5 मॉड्यूल्स का कमाल
चंद्रयान-4 कॉम्प्लेक्स मिशन। LVM-3 से दोबारा लॉन्च। पहला स्टैक: ट्रांसफर मॉड्यूल (TM), डिसेंडर (DM), असेंडर (AM)। दूसरा: प्रोपल्शन (PM), री-एंट्री (RM)। कुल वजन 4600 किलो। मिशन लाइफ 1 लूनर डे।
मॉड्यूल्स की डिटेल:
- डिसेंडर मॉड्यूल: शिव शक्ति पॉइंट के पास सॉफ्ट लैंडिंग। रोबोटिक आर्म से सरफेस स्कूप, ड्रिल से 2-3 किलो सब-सर्फेस सैंपल।
- असेंडर मॉड्यूल: सैंपल कंटेनर वैक्यूम सील। लूनर ऑर्बिट में उड़ान।
- री-एंट्री मॉड्यूल: ऑर्बिट डॉकिंग के बाद सैंपल ट्रांसफर। अर्थ री-एंट्री, पैराशूट लैंडिंग।
- प्रोपल्शन मॉड्यूल: ऑर्बिट मैनेजमेंट।
वीरमुथुवेल: “इंडिजिनस डॉकिंग, अंडॉकिंग दिखाएंगे।”
चंद्रयान सीरीज का सफर: 4 कैसे अलग?
| मिशन | साल | अचीवमेंट | सैंपल रिटर्न |
|---|---|---|---|
| चंद्रयान-1 | 2008 | ऑर्बिटर, वॉटर डिटेक्ट | नहीं |
| चंद्रयान-2 | 2019 | ऑर्बिटर सफल, लैंडर क्रैश | नहीं |
| चंद्रयान-3 | 2023 | सॉफ्ट लैंडिंग शिव शक्ति | नहीं |
| चंद्रयान-4 | 2027-28 | सैंपल रिटर्न 2-3kg | हां |
लैंडिंग साइट: शिव शक्ति पॉइंट क्यों स्पेशल?
चंद्रयान-3 वाली जगह। साउथ पोल के पास – फ्रोजन वॉटर, एंशेंट मटेरियल। लूनर हिस्ट्री, सोलर सिस्टम फॉर्मेशन क्लूज। वैक्यूम कंटेनर से कंटैमिनेशन फ्री।
टेक्नोलॉजी चैलेंजेस: भारत की देसी इनोवेशन
- सॉफ्ट लैंडिंग: चंद्रयान-3 टेक अपग्रेड।
- सैंपल कलेक्शन: रोबोटिक आर्म, ड्रिलर।
- डॉकिंग: लूनर ऑर्बिट में प्रिसाइज अलाइनमेंट।
- री-एंट्री: हीट शील्ड, पैराशूट्स।
- नेविगेशन: ऑटोनॉमस सिस्टम्स।
ISRO चेयरमैन वी नारायणन: 2028 टारगेट। HAL-L&T से PSLV प्रोडक्शन।
सैंपल्स से क्या मिलेगा? साइंस बेनिफिट्स
चांद की मिट्टी से:
- वॉटर आइस: पोटेंशियल रिसोर्स।
- एंशेंट रॉक्स: 4 बिलियन साल पुरानी हिस्ट्री।
- मिनरल्स: हेलियम-3, रेयर अर्थ।
- सोलर विंड: स्पेस वेदर स्टडी।
लैब एनालिसिस से चांद का जन्म, अर्थ कनेक्शन। ICMR स्टाइल बायो सैंपल हैंडलिंग।
बजट और टाइमलाइन: ₹2100 करोड़ का प्रोजेक्ट
सितंबर 2024 कैबिनेट अप्रूवल। 36 महीने टाइमलाइन। 7 लॉन्चेस 2026 में। स्पेस स्टेशन 2035, क्रूड लूनर 2040।
ग्लोबल रेस: भारत vs चीन-अमेरिका
- अमेरिका: Apollo 382 किलो।
- चीन: Chang’e-5/6 से 1.9 किलो।
- रूस: Luna 0.3 किलो।
- भारत: पहली बार 2-3 किलो।
चुनौतियां और सॉल्यूशंस
| चैलेंज | ISRO सॉल्यूशन |
|---|---|
| डॉकिंग | देसी सॉफ्टवेयर |
| री-एंट्री | हीट शील्ड टेस्ट |
| सैंपल प्रिजर्व | वैक्यूम कंटेनर |
भारत के स्पेस प्लान्स: चंद्रयान-4 से आगे
- गगनयान 2026।
- LUPEX (जापान के साथ)।
- शुक्रयान-1।
- BSSN स्पेस स्टेशन।
सैंपल स्टोरेज: नई ISRO फैसिलिटी
चंद्रयान-4 के लिए स्पेशल लैब। कंटैमिनेशन फ्री स्टोरेज।
5 FAQs
Q1: चंद्रयान-4 कब लॉन्च होगा?
A: 2027-28, दो LVM-3 लॉन्चेस।
Q2: कितना सैंपल लाएगा?
A: 2-3 किलो सरफेस+सब-सर्फेस।
Q3: कहां लैंडिंग?
A: शिव शक्ति पॉइंट पास।
Q4: बजट कितना?
A: ₹2104 करोड़ अप्रूvd।
Q5: अगला मिशन?
A: गगनयान, LUPEX।
Leave a comment