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झारखण्ड से जाकर अंडमान निकोबार में बसे आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिले : बंधु तिर्की

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डेढ़ सौ साल पहले विस्थापन का शिकार हुए आदिवासी अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ पर अपनी सरकारी पहचान से बहुत दूर।

रांची / पोर्ट ब्लेयर । पूर्व मंत्री झारखण्ड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य और झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा कि लगभग डेढ़ सौ साल पहले विस्थापना का शिकार होकर झारखण्ड से ले जाकर अंडमान निकोबार द्वीप समूह के विभिन्न द्वीपों पर बसाये गये आदिवासियों को आजादी के 78 साल के बाद भी अब तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला है और यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है।श्री तिर्की ने कहा कि झारखण्ड और यहाँ के आदिवासियों के साथ ही सभी मूल वासियों और आम लोगों के लिये भी इस बात की पुरजोर आवाज उठाने की जरूरत है कि हमारे जिन भाई-बहनों को जंगल काटने के नाम पर सुदूरवर्ती अंडमान निकोबार जैसे द्वीप समूह में बसाने के लिये ले जाया गया था।वे घोर उपेक्षापूर्ण जीवन बिता रहे हैं।ऐसे सभी आदिवासी, अब तक अपनी मौलिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक पहचान के साथ तो अपने-आप को बरकरार रखने में सफल हुए हैं।लेकिन, सरकारी पहचान से दूर है और उन्हें अब तक अनुसूचित जनजाति का दर्ज भी नहीं मिला है। इसी का परिणाम है कि उन्हें सरकार के द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय को दी जानेवाली कोई भी सुविधा प्राप्त नहीं हो रही है।
श्री तिर्की ने द्वीप समूह के बड़ाटांड, बालूडेरा आदि गाँवों में जाकर आदिवासियों से मुलाकात की और उनके द्वारा आयोजित अनेक कार्यक्रमों में शामिल हुए।विविध आदिवासी संगठनों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ श्री तिर्की का स्वागत किया।इस दौरान श्री तिर्की को आदिवासी समुदाय की विस्तृत जानकारी दी गयी। आदिवासी परिवारों के साथ मुलाकात के दौरान श्री तिर्की ने सभी से उनका कुशलक्षेम जाना और उन परिवारों की आर्थिक-सामाजिक स्थिति की जानकारी ली। लोगों ने बताया कि अंडमान निकोबार के कुछेक लोगों ने कुछ समय पूर्व अपनी रांची यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी अपनी समस्याओं की जानकारी दे दी है।
श्री तिर्की ने कहा कि आदिवासी समुदाय से मिलने के बाद जिस गर्व की अनुभूति होती है उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता।अपनी मौलिक भूमि झारखण्ड से इतनी दूर रहते हुए भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को पूरे गौरव एवं परंपरा के साथ बरकरार रखना बहुत सम्मान की बात है।वहीं अफसोस है कि हमारे हमसे बिछड़े हुए हमारे भाई-बहन आज उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं और उन्हें अनुसूचित जनजाति को प्रदत्त कोई भी संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हो रहा है।इस दौरान श्री तिर्की के साथ विशेष रूप से पूर्व जिला अध्यक्ष बर्नाडेथ सोरेन, सरिता केरकेट्टा, आनंदी ख़ाखा,कृपा टोपनो, अलागेर स्वामी आर, बरहाटांग परिषद सदस्य अनिल किशोर टोप्पो आदि उपस्थित थे।

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