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सर्दियों में सेहत का मीठा राज़:From Carrot to Millet तक देसी हलवे जो शरीर को अंदर से गर्म रखें

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Carrot to Millet
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Carrot to Millet-सर्दियों में गाजर, बादाम, मिलेट, मूंग दाल और सूजी जैसे देसी हलवों से शरीर को गर्माहट, ऊर्जा और इम्युनिटी कैसे दें, जानें हल्का और हेल्दी तरीका।

सर्दियों और हलवे का रिश्ता: सिर्फ मिठास नहीं, पूरी पौष्टिकता

सर्दियाँ आते ही हमारे घरों में हलवे की खुशबू फैलने लगती है। हलवा सिर्फ त्योहारों पर बनी मिठाई नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही ऐसी परंपरा है जो ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने, ऊर्जा देने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए अपनाई जाती रही है। ठंडी हवाओं के बीच गर्म हलवे की एक छोटी-सी कटोरी मन को ही नहीं, मेटाबॉलिज़्म और पाचन को भी राहत देती है।

ठंड के मौसम में पाचन सामान्य तौर पर थोड़ा धीमा हो जाता है, लेकिन शरीर की एनर्जी और गर्माहट की ज़रूरत बढ़ जाती है। ऐसे में देसी घी, मेवे, अनाज, दालें, गाजर, शकरकंद और मिलेट (ज्वार, बाजरा, रागी) से बना हलवा एक तरह से सीज़नल सुपरफूड की तरह काम कर सकता है, अगर इसे सही तरीके से और सीमित मात्रा में खाया जाए।

क्यों माना जाता है हलवा विंटर सुपरफूड?

हलवे में आमतौर पर तीन चीजें ज़रूर होती हैं – कोई अनाज/दाल/सब्जी, घी और मीठा (चीनी या गुड़/खजूर)। ये तीनों मिलकर शरीर को कई तरह के पोषण देते हैं:

  • घी और मेवे से अच्छे फैट मिलते हैं जो शरीर को गर्म रखते हैं, हार्मोन बैलेंस में मदद करते हैं और फैट सॉल्यूबल विटामिन्स के अब्सॉर्प्शन को बेहतर बनाते हैं।
  • अनाज, दालें और मिलेट कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और फाइबर देते हैं, जिससे ऊर्जा धीरे-धीरे रिलीज होती है और लंबे समय तक तृप्ति का अहसास रहता है।
  • गाजर, कद्दू, चुकंदर और शकरकंद जैसी सब्जियाँ बीटा‑कैरोॉटीन, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन्स से भरपूर होती हैं, जो इम्युनिटी और स्किन हेल्थ को सपोर्ट करती हैं।

अगर हलवे में रिफाइंड शुगर को थोड़ा कम करके या उसकी जगह गुड़, खजूर या डेट सिरप जैसी नैचुरल स्वीटनर का इस्तेमाल किया जाए, तो यह सर्दियों के लिए एक अच्छा, बैलेंस्ड डेज़र्ट बन सकता है।

हलवे को हेल्दी बनाने के आसान तरीके

अक्सर हलवा सुनते ही दिमाग में भारी, तैलीय और बहुत मीठी डिश की इमेज आ जाती है। लेकिन आज की लाइफस्टाइल में हलवे को हल्का और पाचन के लिए आसान बनाना मुश्किल नहीं है।

  • रिफाइंड चीनी कम करके, उसकी जगह आंशिक रूप से गुड़, खजूर या किशमिश का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे कुछ मात्रा में आयरन, मिनरल और फाइबर भी मिलते हैं।
  • घी बिल्कुल ज़रूरी है, लेकिन मात्रा को कंट्रोल में रखना और शुरुआत में ज़्यादा डालने की बजाय धीरे‑धीरे मिलाना अच्छा रहता है, ताकि टेक्सचर भी अच्छा रहे और फालतू कैलोरी भी न बढ़े।
  • अनाज या दाल को अच्छी तरह भूनकर और पर्याप्त समय तक पकाकर बनाया गया हलवा पेट पर हल्का पड़ता है और गैस, पेट फूलने जैसी समस्याएँ कम होती हैं।
  • जहाँ संभव हो, फुल‑फैट क्रीम वाली दूध की जगह टोंड मिल्क या बादाम दूध जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं, ताकि डिश हल्की रहे और फिर भी क्रीमी टेक्सचर बना रहे।

अब एक‑एक करके देखते हैं कि कौन‑कौन से पारंपरिक हलवे सर्दियों में शरीर को अंदर से पोषण दे सकते हैं।

बादाम हलवा: दिमाग और स्किन का दोस्त

बादाम हलवा ठंड के दिनों में दिमाग, स्किन और हेयर हेल्थ के लिए बेहतरीन माना जाता है। बादाम में विटामिन E, हेल्दी मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स और प्रोटीन मौजूद रहते हैं, जो सेल्स को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से बचाने, स्किन की नमी बरकरार रखने और दिमाग की कार्यक्षमता सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।

  • बादाम को रात भर भिगोकर, सुबह छीलकर इस्तेमाल करने से उसका पाचन आसान हो जाता है और कई लोगों को लगता है कि इससे भारीपन कम महसूस होता है।
  • बादाम का स्मूद पेस्ट बनाकर धीमी आँच पर घी, थोड़े दूध या पानी और नैचुरल स्वीटनर के साथ पकाया गया हलवा ठंडी रातों में एक रिच लेकिन सैटिस्फाइंग डेज़र्ट है।
  • ऊपर से पिस्ता, बादाम और थोड़ा केसर या इलायची डालने से खुशबू और टेस्ट दोनों बेहतर हो जाते हैं, और सर्विंग भी रिच लगती है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि बादाम और घी दोनों एनर्जी‑डेंस हैं, इसलिए छोटी कटोरी ही पर्याप्त होती है, खासकर अगर दिन भर में और भी फुल‑मील्स लिए जा रहे हों।

गाजर का हलवा: विंटर क्लासिक, विटामिन A का खज़ाना

गाजर का हलवा सर्दियों का सबसे पॉपुलर हलवा है और इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका बीटा‑कैरोॉटीन कंटेंट, जो शरीर में विटामिन A में बदल सकता है। यह आँखों की सेहत, स्किन और इम्यून फंक्शन के लिए उपयोगी माना जाता है।

  • ताज़ी, लाल या ऑरेंज गाजर को कद्दूकस करके दूध में धीमी आँच पर पकाने से गाजर अच्छी तरह नरम हो जाती है और उसका फ्लेवर गाढ़ा हो जाता है।
  • अगर फुल‑फैट दूध की जगह टोंड मिल्क या बादाम दूध का इस्तेमाल किया जाए और शुगर को थोड़ा कम करके या गुड़/खजूर से बैलेंस किया जाए, तो हलवा हल्का और फिर भी स्वादिष्ट रह सकता है।
  • इलायची, दालचीनी, केसर और ऊपर से रोस्टेड काजू, बादाम डालने से न सिर्फ स्वाद बढ़ता है, बल्कि हलवे की प्रेज़ेंटेशन भी बेहतर लगती है।

गाजर का हलवा अक्सर लोग ज़्यादा मात्रा में खा लेते हैं, क्योंकि यह हल्का महसूस होता है। लेकिन इसमें भी दूध, घी और मीठा मौजूद होता है, इसलिए पोर्शन कंट्रोल यहाँ भी उतना ही ज़रूरी है।

मूंग दाल हलवा: प्रोटीन से भरपूर, लेकिन बनाएं हल्का

मूंग दाल हलवा बहुत रिच और शादी‑वाले टेस्ट के लिए जाना जाता है, लेकिन सही तरह से बनाया जाए तो यह सर्दियों में काफी पौष्टिक, प्रोटीन‑रिच विकल्प है। पीली मूंग दाल में अच्छी मात्रा में प्रोटीन और कुछ फाइबर होता है, जो मसल रिकवरी और लंबे समय तक एनर्जी कायम रखने में मदद कर सकता है।

  • कई घरों में लोग पूरी दाल की जगह धुली पीली मूंग दाल का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, क्योंकि इसे पकाना और डाइजेस्ट करना थोड़ा आसान होता है।
  • दाल को भिगोकर, पीसकर और फिर धीमी आँच पर समय लेकर घी के साथ भूनना ज़रूरी है, ताकि कच्चेपन की स्मेल खत्म हो जाए और टेक्सचर दानेदार और सुगंधित बने।
  • दूध या पानी के साथ पकाकर और बाद में मीठा मिलाने पर आप घी की मात्रा को थोड़ा कम रख सकते हैं, फिर भी हलवा स्वादिष्ट रहता है।

बहुत भारी भोजन के तुरंत बाद मूंग दाल हलवा खाना कुछ लोगों के लिए भारी पड़ सकता है। बेहतर है कि इसे हल्के डिनर के बाद या दोपहर में छोटी सर्विंग के रूप में लिया जाए।

आटा (गेहूँ) का हलवा: जोड़ों और ताकत के लिए

कई भारतीय घरों में आटे का हलवा प्रसाद के रूप में भी बनता है और सर्दियों में तो यह ताकत और गर्माहट के लिए खास पसंद किया जाता है। गेहूँ का आटा कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और थोड़े फाइबर से भरपूर होता है, जो लगातार ऊर्जा देने में मदद करता है।

  • सही टेक्सचर के लिए आटे को तेज़ आँच पर नहीं, बल्कि मध्यम से धीमी आँच पर लगातार चलाते हुए भूनना ज़रूरी है, ताकि उसमें नट्टी सुगंध आए और कच्चापन पूरी तरह चला जाए।
  • गुड़ से मीठा करने पर, हलवे में थोड़ा‑बहुत आयरन और कुछ मिनरल्स भी मिल सकते हैं, जो खासकर ठंड के मौसम में फायदेमंद हो सकते हैं।
  • सूखे मेवे, खासकर बादाम, काजू और कुछ कद्दू के बीज जोड़ने से हलवे की पौष्टिकता बढ़ जाती है और यह ठंड में जोड़ों और मसल्स के लिए अच्छा कॉम्बो बन सकता है।

आटे का हलवा भी एनर्जी‑डेंस होता है, इसलिए इसे रोज़ बड़े बाउल की जगह हफ्ते में कुछ बार छोटी‑सी सर्विंग के रूप में लेना बेहतर होता है।

मिलेट हलवा: रागी, ज्वार, बाजरा – फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट का पावरहाउस

आजकल मिलेट यानी बाजरा, ज्वार, रागी आदि को फिर से ‘सुपरफूड’ के रूप में देखा जा रहा है। इनका हलवा सर्दियों के लिए शानदार विकल्प है, क्योंकि इसमें फाइबर, कुछ प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिल सकते हैं।

  • रागी हलवा बच्चों और बुज़ुर्गों दोनों के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह पेट भरने वाला और अपेक्षाकृत आसानी से डाइजेस्ट होने वाला हो सकता है, अगर इसे सही तरह पकाया जाए।
  • बाजरा और ज्वार से बना हलवा भी ठंडी रातों में अच्छा विकल्प है, खासकर जब इसे घी, गुड़ और मेवे के साथ बैलेंस में इस्तेमाल किया जाए।
  • मिलेट का हलवा उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो ग्लूटेन कम लेना चाहते हैं (हालाँकि हर व्यक्ति की टॉलरेंस अलग होती है, इसलिए व्यक्तिगत ज़रूरतों के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए)।

फाइबर से भरपूर होने की वजह से मिलेट‑आधारित हलवा अचानक भूख लगने को कम करने और ब्लड शुगर में तेजी से उतार‑चढ़ाव की संभावना घटाने में मदद कर सकता है, बशर्ते कि इसमें मीठा ज्यादा न हो।

शकरकंद, कद्दू और चुकंदर हलवा: सब्जियों को मीठे रूप में शामिल करने का तरीका

सर्दियों में मिलने वाली कई सब्जियाँ हलवे के रूप में भी मज़ेदार और पौष्टिक बन सकती हैं। शकरकंद, कद्दू और चुकंदर इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।

  • शकरकंद में कॉम्प्लेक्स कार्ब्स, बीटा‑कैरोॉटीन और कुछ मात्रा में फाइबर होता है, जो इसे धीरे‑धीरे ऊर्जा देने वाला और पेट के लिए आरामदायक बनाता है। हलवे में इसका नैचुरल मिठास भी काम आता है, जिससे अतिरिक्त चीनी थोड़ा कम रखी जा सकती है।
  • कद्दू का हलवा हल्के स्वाद और सुंदर नारंगी रंग के लिए जाना जाता है। इसमें बीटा‑कैरोॉटीन और कुछ विटामिन्स होते हैं, और जब इसे घी और थोड़े मेवों के साथ मिलाया जाता है, तो यह एक बैलेंस्ड डेज़र्ट बन सकता है।
  • चुकंदर हलवा रंग और पोषण दोनों के लिए दिलचस्प विकल्प है। चुकंदर में नैचुरल पिगमेंट और कुछ मिनरल्स होते हैं, जो हलवे को आकर्षक और पोषण से भरपूर बनाते हैं।

इन सब्जी‑आधारित हलवों में मीठा अक्सर पहले से थोड़ा मौजूद होता है, इसलिए अलग से चीनी या गुड़ की मात्रा पर ध्यान देना अच्छा रहता है।

अखरोट (वालनट) हलवा: ब्रेन हेल्थ और हेल्दी फैट्स

अखरोट हलवा ठंड के दिनों में ब्रेन हेल्थ और अच्छी फैट प्रोफ़ाइल के लिए जाना जाता है। अखरोट में ओमेगा‑3 फैटी एसिड्स, कुछ प्रोटीन और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो दिमाग और दिल की सेहत के लिए उपयोगी माने जाते हैं।

  • अखरोट को हल्का भूनकर, पीसकर या क्रश करके हलवे में इस्तेमाल किया जाए तो फ्लेवर भी गहरा आता है और टेक्सचर भी अच्छा बनता है।
  • इसे बहुत ज्यादा घी और शुगर के साथ भारी बनाने की ज़रूरत नहीं, बल्कि मध्यम मात्रा में घी और गुड़/खजूर के साथ पकाकर भी स्वाद और पोषण दोनों मिल सकते हैं।
  • दिन भर में पहले से ही अगर बहुत मेवे या हाई‑कैलोरी फूड लिए जा रहे हों, तो अखरोट हलवे की मात्रा और फ्रीक्वेंसी थोड़ी कंट्रोल में रखना समझदारी होती है।

सूजी हलवा: क्विक कम्फर्ट, अगर सही तरह से बनाएं

सूजी का हलवा भारत में सबसे जल्दी बन जाने वाले हलवों में से एक है। नाश्ते, प्रसाद या अचानक मेहमानों के लिए यह क्लासिक ऑप्शन है।

  • सूजी (रवा) को घी में अच्छी तरह से भूनने से उसका कच्चापन और भारीपन कम होता है और हलवा हल्का‑सा नट्टी स्वाद लेने लगता है।
  • अगर इसमें घी की मात्रा थोड़ी कम रखी जाए और पानी या दूध की मात्रा थोड़ी ज्यादा, तो टेक्सचर भी अच्छा रहता है और डिश बहुत तैलीय भी नहीं लगती।
  • ड्राई फ्रूट्स, किशमिश और थोड़ी इलायची से सूजी का हलवा एक सैटिस्फाइंग, क्विक कम्फर्ट फूड बन जाता है, जिसे सर्द सुबह या ठंडी शाम में छोटी सर्विंग के रूप में लिया जा सकता है।

कुछ लोग सूजी को ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण सीमित रखना पसंद करते हैं, ऐसे में मीठा कम रखना और इसे प्रोटीन‑सोर्स (जैसे दही, पनीर या नट्स) के साथ बैलेंस करना अच्छा विचार होता है।

डेट (खजूर) हलवा: बिना चीनी का एनर्जी बूस्ट

जो लोग रिफाइंड शुगर से बचना चाहते हैं, उनके लिए डेट हलवा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। खजूर में नैचुरल शुगर के साथ फाइबर और कुछ विटामिन्स‑मिनरल्स भी होते हैं।

  • खजूर को बीज निकालकर गर्म पानी या दूध में थोड़ी देर भिगोकर पीस लेने से उसका स्मूद पेस्ट तैयार हो जाता है, जो हलवे के लिए नैचुरल स्वीटनर और बॉडी दोनों देता है।
  • इस पेस्ट को थोड़े घी, बादाम, काजू या मिलेट/सूजी के साथ मिलाकर पकाया जाए तो हलवा बिना रिफाइंड शुगर के भी अच्छा स्वाद देता है।
  • डेट हलवा खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें फटाफट एनर्जी की ज़रूरत हो, लेकिन फिर भी पोर्शन साइज पर ध्यान देना ज़रूरी है, क्योंकि नैचुरल शुगर भी ज़्यादा मात्रा में लेने से कैलोरी बढ़ ही जाती है।

हलवे को और हल्का और डाइजेस्टेबल बनाने के टिप्स

  • दाल, अनाज या मिलेट को भिगोकर और अच्छी तरह पकाकर इस्तेमाल करने से पाचन आसान होता है और गैस‑फुलनेस की संभावना कम हो सकती है।
  • घी की मात्रा को शुरुआत से ही ज़्यादा रखने की जगह, थोड़ा‑थोड़ा करके डालें और सिर्फ उतना ही इस्तेमाल करें जितना टेक्सचर और स्वाद के लिए ज़रूरी हो।
  • बहुत भारी रात के भोजन के तुरंत बाद बड़ी कटोरी हलवा खाने से बचें। बेहतर है कि हल्का डिनर लें और उसके बाद छोटी सर्विंग हलवे की लें।
  • हलवे के साथ सौंफ, अदरक या पुदीना वाली हर्बल चाय लेना कई लोगों को सूट करता है, क्योंकि यह पाचन को सपोर्ट कर सकता है और भारीपन कम महसूस होता है।

सर्विंग और गार्निशिंग: आँखों और मन दोनों के लिए

हलवे का मज़ा सिर्फ स्वाद में नहीं, उसकी प्रेज़ेंटेशन में भी छुपा होता है।

  • सर्व करने से पहले हलवे के ऊपर हल्का रोस्ट किए हुए बादाम, काजू, पिस्ता और किशमिश डालें, इससे टेक्सचर और क्रंचिंग का मज़ा बढ़ता है।
  • सूखे गुलाब की पंखुड़ियाँ, थोड़ा केसर या सिल्वर वर्क (जहाँ आपको भरोसेमंद क्वालिटी मिले) हलवे को त्योहार जैसा लुक दे सकते हैं।
  • सर्दियों में हलवा हमेशा गर्म या हल्का गुनगुना सर्व करें, इससे घी की खुशबू और फ्लेवर दोनों ज्यादा महसूस होते हैं।

हलवा कब और कैसे खाएँ? कुछ प्रैक्टिकल सुझाव

  • नाश्ते में: सूजी या मिलेट हलवा थोड़ी मात्रा में, साथ में उबला अंडा, पनीर या नट्स जैसा प्रोटीन सोर्स जोड़कर लिया जाए, तो यह एक कंप्लीट मील के करीब आ सकता है।
  • दोपहर या शाम को: गाजर, मूंग दाल, मिलेट या सब्जी‑आधारित हलवा छोटी सर्विंग में सूप या हल्की सब्जी‑रोटी के साथ ले सकते हैं, ताकि कुल कैलोरी और शुगर संतुलित रहे।
  • रात को: अगर रात को हलवा खाना ही हो, तो डिनर हल्का रखें और हलवे की मात्रा सीमित रखें, साथ ही बहुत देर रात तक खाने से बचें, ताकि पाचन पर ज़्यादा दबाव न पड़े।

जो लोग डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल या किसी मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे हैं, उन्हें अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेकर ही हलवा कितनी मात्रा और कितनी बार खाना चाहिए, यह तय करना बेहतर है।

ट्रेडिशन और मॉडर्न साइंस का संतुलन

हमारी दादी‑नानी जो सर्दियों में गाजर, आटा, मूंग दाल, बाजरा और मेवों से हलवा बनाती थीं, उसके पीछे सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि मौसम, शरीर की ज़रूरत और पाचन को ध्यान में रखने की समझ भी थी। आज न्यूट्रिशन साइंस भी यह मानती है कि सीज़नल, होल‑फूड‑आधारित, सही फैट और फाइबर से भरपूर डिशेज़, अगर संतुलित मात्रा में ली जाएँ, तो हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।

हलवा उसी परंपरा का हिस्सा है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज हमें चीनी और घी की मात्रा, कुल कैलोरी, लाइफस्टाइल और मेडिकल कंडीशन्स को ध्यान में रखते हुए इसे थोड़ा मॉडिफाई करना पड़ता है। कम घी, कम रिफाइंड शुगर और ज़्यादा नैचुरल इंग्रेडिएंट्स के साथ हलवा सर्दियों की ठंड में भी एक ऐसा कम्फर्ट फूड बन सकता है, जो जीभ को भी खुश रखे और शरीर को भी सपोर्ट करे।

FAQs

प्रश्न 1: क्या रोज़ हलवा खाना ठीक है?
अगर हलवा घी और चीनी से भरपूर है, तो रोज़ बड़ी मात्रा में खाना ज़्यादातर लोगों के लिए ज़रूरी नहीं और वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है। बेहतर है कि हफ्ते में कुछ बार, वो भी छोटी सर्विंग में और बैलेंस्ड डाइट के साथ हलवा शामिल किया जाए।

प्रश्न 2: डायबिटीज़ वाले लोग कौन सा हलवा खा सकते हैं?
डायबिटीज़ में किसी भी तरह का हलवा लेने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह ज़रूरी है। आम तौर पर कम मीठा, गुड़ या खजूर की सीमित मात्रा से बना, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर हलवा (जैसे थोड़ा मिलेट या दाल‑आधारित) छोटी सर्विंग में कुछ लोगों के लिए विकल्प हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

प्रश्न 3: घी कम करने से हलवे का स्वाद खराब नहीं होगा?
घी हलवे के स्वाद और टेक्सचर के लिए ज़रूरी है, लेकिन बहुत ज़्यादा घी डालना ही स्वाद का एकमात्र तरीका नहीं है। अगर अनाज/दाल को अच्छे से भूनकर पकाया जाए और घी को शुरुआत और अंत में बैलेंस करके डाला जाए, तो कम घी में भी हलवा स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।

प्रश्न 4: बच्चों के लिए कौन सा हलवा बेहतर है?
बच्चों के लिए गाजर हलवा, सूजी हलवा, रागी या मिलेट हलवा और कभी‑कभार बादाम हलवा अच्छे विकल्प हो सकते हैं, बशर्ते मीठा और घी ज्यादा न हो और पोर्शन साइज उनकी उम्र और एक्टिविटी के हिसाब से रखा जाए। बहुत छोटे बच्चों के लिए मेवों को हमेशा बारीक पिसकर या पेस्ट के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रश्न 5: क्या डेयरी‑फ्री या वीगन हलवा भी बन सकता है?
हाँ, कई हलवे बिना दूध के भी बन सकते हैं। दूध की जगह आप पानी, नारियल दूध या बादाम दूध जैसी प्लांट‑बेस्ड ड्रिंक्स इस्तेमाल कर सकते हैं और घी की जगह कुछ मात्रा में कोकोनट ऑयल या न्यूट्रल ऑयल से काम चला सकते हैं। स्वाद थोड़ा अलग होगा, लेकिन सही मसाले और नट्स से डिश फिर भी काफी स्वादिष्ट बन सकती है।

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