12 फरवरी को किसान संगठन भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ़ देशव्यापी विरोध करेंगे। दूध उत्पाद निर्यात, दालें सब्ज़ियाँ, कृषि सब्सिडी खतरे में। दिल्ली चक्का जाम, ट्रैक्टर मार्च, धरने। संगठनों की मांगें, ट्रेड डील डिटेल्स, सरकार का रुख़ और किसान आंदोलन 2026 का पूरा विश्लेषण।
क्या भारत-अमेरिका ट्रेड समझौता किसानों की कमर तोड़ देगा? 12 फरवरी के धरना का पूरा प्लान
12 फरवरी को देशव्यापी किसान आंदोलन: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे लाखों किसान
किसान आंदोलन की आग अभी बुझी भी नहीं थी कि अब एक नया मोर्चा खुलने वाला है। संयुक्त किसान मोर्चा और कई अन्य किसान संगठनों ने 12 फरवरी 2026 को पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसकी वजह भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील वार्ता है जिसे किसान संगठन अपने अस्तित्व के लिए खतरा बता रहे हैं। संगठनों का दावा है कि ये डील दूध उत्पादों, दालों, सब्ज़ियों और अनाज के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित करेगी जिससे लाखों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। दिल्ली में चक्का जाम, ट्रैक्टर मार्च, धरने और रैलियाँ होंगी जबकि पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में स्थानीय स्तर पर आंदोलन होंगे। सरकार ने अभी चुप्पी साध रखी है लेकिन किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर ट्रेड डील पर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज़ होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: किसानों के लिए क्यों खतरा?
भारत और अमेरिका के बीच मिनी ट्रेड एग्रीमेंट की वार्ता पिछले साल से चल रही है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना है जो अभी 190 बिलियन डॉलर के आसपास है। अमेरिका दूध उत्पादों चीज़ दही आइसक्रीम जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स में भारत के बाज़ार खोलना चाहता है। वर्तमान में भारत के दूध निर्यात पर 30 प्रतिशत तक टैरिफ है जबकि अमेरिका के उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। किसान संगठनों का कहना है कि अमेरिकी डेयरी जायंट्स जैसे अमूल मदर डेयरी नेस्ले को पछाड़ देंगे और लाखों छोटे किसान बर्बाद हो जाएंगे। दालें मूंग उड़द चना और सब्ज़ियाँ जैसे आलू प्याज़ टमाटर पर भी अमेरिकी आयात बढ़ेगा। भारत में दूध उत्पादन दुनिया में नंबर 1 है लेकिन निर्यात बहुत कम। ट्रेड डील से आयात बढ़ेगा और स्थानीय बाज़ार डूब जाएगा। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा ये किसानों की कमर तोड़ने वाली डील है।
किसान संगठनों की मुख्य मांगें और 12 फरवरी का प्लान
संगठनों ने स्पष्ट मांगें रखी हैं। पहली ट्रेड डील में कृषि उत्पादों को पूरी तरह बाहर रखा जाए। दूसरी दूध दालें सब्ज़ी अनाज के आयात पर टैरिफ न घटाया जाए। तीसरी MSP की कानूनी गारंटी दी जाए। चौथी APMC और ई-नाम को मज़बूत किया जाए। 12 फरवरी को दिल्ली बॉर्डर पर ट्रैक्टर मार्च होंगे। चक्का जाम दोपहर 12 से 3 बजे तक। पंजाब में अमृतसर लुधियाना जालंधर में धरने। हरियाणा में करनाल अंबाला में रैलियाँ। यूपी में लखनऊ कानपुर में विरोध। महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश में स्थानीय स्तर पर। किसान नेता ने कहा अगर सरकार नहीं मानी तो आंदोलन लंबा चलेगा।
2020-21 किसान आंदोलन से तुलना: क्या दोहराया जाएगा?
2020-21 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ़ दिल्ली बॉर्डर पर 13 महीने धरना रहा। किसानों ने कानून वापस करवा लिए। अब ट्रेड डील को नया कानून बताया जा रहा। लेकिन तब केंद्र सरकार थी अब भी। संगठनों ने कहा हम फिर सड़कों पर उतरेंगे। सरकार ने MSP समिति बनाई लेकिन प्रगति धीमी। ट्रेड डील किसानों को अस्वीकार्य। राकेश टिकैत जगजीत सिंह दल्लेवाल ने एकजुटता दिखाई। युवा किसान भी शामिल। सरकार ट्रेड डील को आर्थिक विकास बताया लेकिन किसान रोज़गार और आय पर असर बता रहे।
सरकार का रुख़ और ट्रेड डील की डिटेल्स
सरकार ने कहा ट्रेड डील कृषि को प्रभावित नहीं करेगी। लेकिन किसान दस्तावेज़ देख रहे। अमेरिका दूध पर 30% टैरिफ शून्य करना चाहता। दालें पर कोटा बढ़ाना। सब्सिडी पर WTO डिस्प्यूट। भारत ने कहा संवेदनशील उत्पाद बचाएंगे। लेकिन किसान भरोसा नहीं कर रहे। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा वार्ता जारी। किसान चेतावनी – 12 फरवरी को लाखों उतरेंगे। सरकार ने शांति बनाए रखने की अपील की।
ट्रेड डील का किसानों पर आर्थिक असर: आंकड़े बताते हैं
भारत में 14 करोड़ किसान परिवार। दूध क्षेत्र 8 करोड़ रोज़गार। अमेरिकी दूध उत्पाद सस्ते। आयात बढ़ा तो दाम गिरेंगे। दालें में भारत आत्मनिर्भर लेकिन निर्यात प्रभावित। सब्ज़ी किसानों को नुकसान। MSP खतरे में। WTO नियम सब्सिडी सीमित। ट्रेड डील से विदेशी निवेश लेकिन किसान हारेंगे। अर्थशास्त्री कहते हैं छोटे किसान प्रभावित। बड़े कॉर्पोरेट्स को फायदा।
आंदोलन की तैयारी: संगठनों का रोडमैप
SKM ने 10 राज्य समितियाँ बनाईं। दिल्ली में सिंघू टीकरी गाड़ी थाने बॉर्डर। ट्रैक्टर 5000। धरने 24 घंटे। ट्रेन बस रोकना। सोशल मीडिया कैंपेन। युवा महिला किसान शामिल। सरकार से 5 सूत्री मांग। ट्रेड डील रोकना। MSP गारंटी। कॉर्पोरेट लैंड बैंकिंग बंद।
क्या सरकार झुकेगी या आंदोलन लंबा चलेगा
सरकार ने MSP पर काम जारी बताया। ट्रेड डील पर किसान हित सुरक्षित। लेकिन किसान भरोसा नहीं। 2020 जैसा दोहराव? संगठन तैयार। सरकार डिप्लोमेसी प्राथमिकता। लेकिन किसान वोट बैंक। 12 फरवरी टेस्ट केस।
5 FAQs
प्रश्न 1: 12 फरवरी को किसान क्यों सड़कों पर उतरेंगे?
उत्तर: किसान संगठन भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ़ विरोध करेंगे। दावा है डील दूध दालें सब्ज़ी निर्यात खत्म कर देगी। लाखों किसान बर्बाद। दिल्ली चक्का जाम ट्रैक्टर मार्च।
प्रश्न 2: ट्रेड डील में दूध उत्पादों पर क्या असर?
उत्तर: अमेरिका 30% टैरिफ हटवाना चाहता। सस्ते दूध उत्पाद आयात। भारतीय किसान बाज़ार हारेंगे। 8 करोड़ रोज़गार खतरे में।
प्रश्न 3: किसान संगठनों की मुख्य मांगें क्या?
उत्तर: ट्रेड डील में कृषि बाहर। MSP कानूनी गारंटी। सब्सिडी बचाओ। APMC मज़बूत। कॉर्पोरेट लैंड बैंकिंग बंद।
प्रश्न 4: 12 फरवरी का विरोध प्लान क्या?
उत्तर: दिल्ली बॉर्डर चक्का जाम ट्रैक्टर मार्च। पंजाब हरियाणा UP महाराष्ट्र धरने रैलियाँ। दोपहर 12-3 बजे ट्रैफिक रोक।
प्रश्न 5: सरकार का रुख़ क्या?
उत्तर: सरकार ने कहा ट्रेड डील किसान हित सुरक्षित। MSP समिति काम जारी। शांति बनाए रखने अपील। लेकिन किसान भरोसा नहीं।
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