सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के AI से याचिकाएं ड्राफ्ट करने के चलन पर चिंता जताई। फर्जी केस जैसे ‘मर्सी vs मैनकाइंड’ साइट किए जा रहे, जो जजों के लिए वेरिफिकेशन का बोझ बढ़ाते हैं।
‘मर्सी vs मैनकाइंड’ केस कभी था ही नहीं! SC ने AI ड्राफ्टिंग पर चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट का अलार्म: वकील AI से याचिकाएं ड्राफ्ट कर रहे, फर्जी केस साइट हो रहे
सुप्रीम कोर्ट ने 16 फरवरी 2026 को एक सुनवाई के दौरान वकीलों द्वारा AI टूल्स का इस्तेमाल कर याचिकाएं तैयार करने के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता जताई। CJI सूर्या कांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जोयमलया बाघची की बेंच ने इसे “अलार्मिंग ट्रेंड” कहा। उन्होंने कहा कि कुछ वकील AI से ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। एक PIL में राजनीतिक भाषणों पर गाइडलाइंस मांगने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई। बेंच ने कहा कि इससे अदालत को गलत जानकारी दी जा रही है। जजों ने साफ चेतावनी दी कि यह प्रथा जारी रही तो गंभीर कदम उठाए जाएंगे।
फर्जी केस उदाहरण: ‘मर्सी vs मैनकाइंड’ का नाम तो कभी सुना ही नहीं
जस्टिस नागरत्ना ने एक चौंकाने वाला उदाहरण दिया कि उनके सामने एक वकील ने “मर्सी vs मैनकाइंड” नाम का केस साइट किया, जो कभी अस्तित्व में ही नहीं था। CJI कांत ने कहा कि जस्टिस दीपांकर दत्ता के केस में भी ऐसा हुआ, जहां साइट किए गए सभी प्रेसिडेंट्स गढ़े हुए थे। जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि कभी असली सुप्रीम कोर्ट केस साइट होते हैं लेकिन कोटेड हिस्से जजमेंट में होते ही नहीं। इससे वेरिफिकेशन बहुत मुश्किल हो जाता है। CJI ने कहा कि हमें बताया गया है कि कुछ वकील AI इस्तेमाल कर रहे हैं। यह ट्रेंड चिंताजनक है।
AI हल्लुसिनेशन का खतरा: जजों पर अतिरिक्त बोझ क्यों पड़ रहा?
AI टूल्स जैसे ChatGPT या अन्य जेनरेटिव मॉडल्स अक्सर “हल्लुसिनेशन” करते हैं, यानी फर्जी जानकारी बना देते हैं। कोर्ट फाइलिंग्स में यह समस्या बढ़ रही है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि फेक कोट्स की वजह से जजों को हर बात वेरिफाई करनी पड़ती है। यह अतिरिक्त बोझ डालता है। बेंच ने कहा कि याचिकाएं जल्दबाजी में AI से ड्राफ्ट हो रही हैं। असली जजमेंट्स में गलत अंश डालना भी धोखा है। SC ने इसे “बिल्कुल अस्वीकार्य” बताया। वकीलों को सावधानी बरतने की नसीहत दी।
जस्टिस दत्ता के केस में भी AI का शक: सिलसिला चल रहा
CJI कांत ने जस्टिस दीपांकर दत्ता के एक केस का जिक्र किया जहां न सिर्फ एक बल्कि सिलसिला था फर्जी प्रेसिडेंट्स का। सभी साइट केस असली नहीं थे। जस्टिस बाघची ने शिकायत की कि कई SLP में ओरिजिनल तर्क कम, लंबे कोट्स ज्यादा। AI की वजह से लीगल ड्राफ्टिंग का कला स्तर गिर रहा। बेंच ने PIL याचिकाकर्ता से कहा कि ड्राफ्ट ठीक से तैयार करें। यह समस्या अब कई कोर्ट्स में दिख रही। SC ने गाइडलाइंस बनाने का संकेत नहीं दिया लेकिन चेतावनी सख्त दी।
AI का कोर्ट में इस्तेमाल: दुनिया भर में चिंता बढ़ रही
यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं। अमेरिका के कई कोर्ट्स में AI से बने फर्जी केस साइट होने लगे। साउथ कैरोलिना SC ने गाइडलाइंस जारी कीं। भारत में SC ने 2025 में AI पॉलिसी पर विचार किया। जजों ने कहा कि AI सहायक हो सकता है लेकिन वेरिफिकेशन जरूरी। बिना चेक के फाइलिंग्स से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती। वकीलों को एथिक्स फॉलो करने को कहा। बार काउंसिल को भी अलर्ट रहना चाहिए।
वकीलों के लिए चेतावनी: क्या होगा आगे?
SC की यह टिप्पणी वकीलों के लिए सख्त चेतावनी है। AI इस्तेमाल ठीक लेकिन फैक्ट चेक अनिवार्य। फर्जी साइटेशन पर कॉन्टेम्प्ट या डिसिप्लिनरी एक्शन हो सकता। PIL सुनवाई आगे जारी रहेगी। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जजों का समय व्यर्थ न हो। यह ट्रेंड रोकना जरूरी। लीगल एजुकेशन में AI एथिक्स शामिल हो। टेक्नोलॉजी का फायदा लें लेकिन विश्वसनीयता न गंवाएं।
क्या AI लीगल प्रोफेशन को बदल देगा?
AI लीगल रिसर्च, ड्राफ्टिंग तेज कर सकता है लेकिन ह्यूमन जजमेंट की जगह नहीं लेगा। SC ने कहा कि क्विक ड्राफ्टिंग अच्छी लेकिन एक्यूरेसी पहले। वकीलों को ट्रेनिंग लें। कोर्ट्स AI डिटेक्शन टूल्स इस्तेमाल कर सकते। ग्लोबल ट्रेंड में गाइडलाइंस आ रही। भारत में भी SC पॉलिसी बना सकता। प्रोफेशनलिज्म बचाना जरूरी।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने AI पर क्या चिंता जताई?
उत्तर: वकीलों द्वारा AI से याचिकाएं ड्राफ्ट करने के चलन को अलार्मिंग बताया, जो फर्जी केस और कोट्स पैदा कर रहा। - प्रश्न: कौन सा फर्जी केस उदाहरण दिया गया?
उत्तर: जस्टिस नागरत्ना ने “मर्सी vs मैनकाइंड” का नाम लिया, जो कभी अस्तित्व में नहीं था। - प्रश्न: जस्टिस दत्ता के केस में क्या हुआ?
उत्तर: वहां साइट किए सभी प्रेसिडेंट्स गढ़े हुए पाए गए, न सिर्फ एक बल्कि सिलसिला था। - प्रश्न: AI की समस्या क्या है?
उत्तर: हल्लुसिनेशन से फेक जानकारी बनती है, असली जजमेंट्स में गलत कोट्स डालता है, वेरिफिकेशन मुश्किल। - प्रश्न: कोर्ट ने क्या कहा वकीलों को?
उत्तर: AI इस्तेमाल बिल्कुल गलत, वेरिफिकेशन अनिवार्य, जजों पर बोझ न डालें।
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