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क्या युमनम खेमचंद सिंह मणिपुर में शांति लौटा पाएंगे?

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new chief minister Manipur 2026
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मणिपुर में एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद BJP नेता युमनम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है और वे नए CM बनने वाले हैं। 2023 की कुकी–जो बनाम मैतेई हिंसा, बीरेन सिंह के इस्तीफे, 60 सदस्यीय निलंबित विधानसभा के समीकरण और नई सरकार की चुनौतियों का पूरा विश्लेषण।

तीन साल की हिंसा, एक साल राष्ट्रपति शासन: अब युमनम खेमचंद की सरकार से क्या उम्मीदें?

युमनम खेमचंद सिंह: राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर के नए CM से क्या बदलेगा?

मणिपुर पिछले तीन साल से जातीय हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और गहरी अविश्वास की राजनीति से जूझ रहा है। 2023 में कुकी–जो और मैतेई समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसा ने राज्य को लगभग गृहयुद्ध जैसी स्थिति में धकेल दिया। 2025 में हालात इतने बिगड़े कि BJP के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा और 13 फरवरी 2025 से राज्य पर राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।

अब लगभग एक साल बाद तस्वीर बदल रही है। दिल्ली में हुई बैठक में BJP विधायकों ने युमनम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुन लिया है और वे मणिपुर के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, ठीक उस समय जब राष्ट्रपति शासन की मियाद 12 फरवरी 2026 को खत्म होने वाली है।

सवाल सिर्फ़ इतना नहीं कि नया CM कौन है, असली सवाल यह है कि क्या नई सरकार इस गहराई तक टूट चुके समाज में फिर से भरोसा, कानून–व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया वापस ला पाएगी या नहीं।

कौन हैं युमनम खेमचंद सिंह?

युमनम खेमचंद सिंह मणिपुर के एक सीनियर BJP नेता हैं। वे दो बार के विधायक हैं और पहले N. बीरेन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री, साथ ही मणिपुर विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं।

वे इम्फाल वेस्ट जिले की सीट से आते हैं और मैतेई समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो घाटी में बहुसंख्यक है और मणिपुर की राजनीति में लंबे समय से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।

दिल्ली में हुई बैठक में, जहां BJP के राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में मणिपुर के सभी BJP विधायक बुलाए गए थे, उन्हें सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसी के साथ यह लगभग तय हो गया कि राष्ट्रपति शासन हटते ही वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि: हिंसा, इस्तीफा और निलंबित विधानसभा

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि एक गहरे प्रशासनिक और सामाजिक संकट का नतीजा थी।

  • 3 मई 2023 को ‘Tribal Solidarity March’ के बाद कुकी–जो और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा भड़की। 200 से अधिक लोगों की मौत, 60,000 से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए, चर्च और घर जलाए गए, हथियार लूटे गए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को “complete breakdown of law and order” कहा और केंद्र–राज्य सरकार से कड़ी टिप्पणी की।
  • आरोप लगा कि तब की BJP सरकार और CM बीरेन सिंह प्रशासन ने मैतेई मिलिटेंट समूहों – जैसे Arambai Tenggol और Meitei Leepun – के प्रति नरमी दिखाई और कुकी–जो समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा। बीरेन सिंह ने इन आरोपों से इंकार किया, लेकिन भरोसा कमजोर हो चुका था।
  • 9 फरवरी 2025 को बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया। 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया और 60 सदस्यीय विधानसभा को ‘सस्पेंडेड एनीमेशन’ में रख दिया गया – यानी वह तकनीकी रूप से अस्तित्व में है, लेकिन उसके अधिकार राष्ट्रपति के अधीन हैं।
  • जुलाई 2025 में संसद ने राष्ट्रपति शासन को छह महीने और बढ़ा दिया, जिसकी मियाद अब 12 फरवरी 2026 को खत्म होने वाली है।

इस दौरान न तो नई राज्य सरकार बनी, न ही राजनीतिक नेतृत्व के स्तर पर ऐसा चेहरा सामने आया जो दोनों समुदायों के बीच भरोसे की कड़ी बन सके।

जांच आयोग और लंबा खिंचता न्याय

हिंसा की जांच के लिए केंद्र ने एक Commission of Inquiry नियुक्त किया, जिसे हिंसा के कारणों, प्रशासन की भूमिका और जिम्मेदारियों की पड़ताल करनी है। दिसंबर 2025 में गृह मंत्रालय ने आयोग की डेडलाइन बढ़ाकर 20 मई 2026 कर दी।

जब तक यह रिपोर्ट नहीं आती, तब तक कई बड़े सवाल – जैसे प्रशासन की विफलता, पुलिस और मिलिटेंट समूहों की भूमिका, पीड़ितों के पुनर्वास और न्याय का रोडमैप – अधूरे ही रहेंगे। युमनम खेमचंद की सरकार को उसी अंतरिम स्पेस में काम करना होगा, जहां सच्चाई आधी–अधूरी सामने है और आरोप–प्रत्यारोप पूरे जोर पर।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1: युमनम खेमचंद सिंह कौन हैं और उनका राजनीतिक बैकग्राउंड क्या है?
उत्तर: युमनम खेमचंद सिंह मणिपुर के सीनियर BJP नेता हैं, दो बार के MLA हैं और पहले N. बीरेन सिंह सरकार में मंत्री तथा मणिपुर विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं। वे मैतेई समुदाय से आते हैं और इम्फाल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रश्न 2: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन कब और क्यों लागू हुआ था?
उत्तर: N. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दिया, उसके बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। वजह 2023 से जारी कुकी–जो और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा, प्रशासनिक विफलता और कानून–व्यवस्था का भारी संकट था।

प्रश्न 3: मणिपुर विधानसभा में अभी किस पार्टी के कितने विधायक हैं?
उत्तर: 60 सदस्यीय विधानसभा में BJP के 37, NPP के 6, NPF के 5, कांग्रेस के 5, Kuki People’s Alliance के 2, JD(U) के 1 और 3 निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट विधायक की मृत्यु के कारण खाली है।

प्रश्न 4: जातीय हिंसा की जांच के लिए बनी Commission of Inquiry की स्थिति क्या है?
उत्तर: केंद्र सरकार ने हिंसा की जांच के लिए आयोग बनाया है, जो 3 मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के कारणों और प्रशासन की भूमिका की जांच कर रहा है। गृह मंत्रालय ने इसकी डेडलाइन बढ़ाकर 20 मई 2026 कर दी है, यानी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।

प्रश्न 5: नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां कौन सी होंगी?
उत्तर: प्रमुख चुनौतियां हैं – हिंसा पूरी तरह रोकना, विस्थापितों की सुरक्षित वापसी, कुकी–जो और मैतेई समुदायों के बीच भरोसा बहाल करना, Commission of Inquiry की रिपोर्ट पर निष्पक्ष कार्रवाई, और आर्थिक–सामाजिक पुनर्निर्माण को गति देना, ताकि मणिपुर सामान्य जीवन की ओर लौट सके।

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