AI इंडिया इम्पैक्ट समिट में मुकेश अंबानी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत दुनिया की सबसे बड़ी AI शक्तियों में उभरेगा। उन्होंने बताया कि Jio–RIL अगले 7 साल में ₹10 लाख करोड़ निवेश करेंगे, “इंटेलिजेंस किराये पर नहीं ले सकते”, और डेटा की तरह AI की लागत भी घटाने का लक्ष्य है।
मुकेश अंबानी का बड़ा दावा: “21वीं सदी में भारत दुनिया की सबसे बड़ी AI शक्तियों में होगा”—Jio का ‘इंटेलिजेंस एरा’ प्लान
मुकेश अंबानी की बड़ी भविष्यवाणी: “21वीं सदी में भारत दुनिया की महान AI शक्तियों में से एक बनेगा”
AI इंडिया इम्पैक्ट समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने दावा किया कि 21वीं सदी में भारत दुनिया की सबसे बड़ी AI शक्तियों में से एक बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसे दौर की शुरुआत कर सकता है जिसे वे “सुपर-अबंडेंस” यानी अभूतपूर्व समृद्धि और अवसरों का युग मानते हैं। अंबानी के मुताबिक AI ज्ञान, दक्षता और उत्पादकता में “लिमिटलेस ग्रोथ” दे सकता है और “AI का सबसे अच्छा हिस्सा अभी आना बाकी है।”
उन्होंने भारत की स्टार्टअप ताकत का भी जिक्र किया और कहा कि भारत पहले से ही दुनिया के “टॉप तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम” में है। इसी संदर्भ में उन्होंने जियो के पुराने रोल को याद करते हुए कहा कि जियो ने भारत को इंटरनेट युग से जोड़ा था और अब जियो देश को “इंटेलिजेंस एरा” यानी AI के युग से जोड़ेगा।
Jio का अगला मिशन: हर नागरिक तक “इंटेलिजेंस”
अंबानी ने कहा कि जियो भारत के AI ट्रांसफॉर्मेशन में और “बड़ी भूमिका” निभाएगा। उनका दावा है कि जियो “हर नागरिक, अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर, सामाजिक विकास के हर हिस्से और सरकारी सेवाओं” तक इंटेलिजेंस पहुंचाने का काम करेगा। इसका मतलब यह है कि AI को सिर्फ बड़ी कंपनियों या चुनिंदा शहरों तक सीमित रखने के बजाय, उसे व्यापक स्तर पर डिलीवर करने की योजना सामने रखी गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे टेक कंपनियों के साथ साझेदारी “इंटेलिजेंस के इम्पोर्टर” बनकर नहीं, बल्कि “अगली सदी के को-आर्किटेक्ट” बनकर करना चाहते हैं। यानी भारत सिर्फ तैयार AI सिस्टम खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि उन्हें बनाने और दिशा तय करने वाला भागीदार बने—यह नैरेटिव उन्होंने अपने बयान में साफ रखा।
₹10 लाख करोड़ का ऐलान: 7 साल में AI क्षमताओं को तेज करने का प्लान
इस भाषण का सबसे बड़ा हाईलाइट अंबानी का “लैंडमार्क” निवेश ऐलान रहा। उन्होंने कहा कि जियो, रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ पार्टनरशिप में, अगले 7 साल में ₹10 लाख करोड़ का निवेश करेगा ताकि भारत की AI क्षमताओं को तेज गति से आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निवेश “स्पेक्युलेटिव” नहीं है और न ही “वैल्यूएशन खरीदने” के लिए है।
अंबानी ने इसे “पेशेंट, डिसिप्लिंड, नेशन-बिल्डिंग कैपिटल” बताया—यानी ऐसा पूंजी निवेश जो लंबे समय में टिकाऊ आर्थिक मूल्य बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उनका संदेश यह था कि AI केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की संरचना बदलने वाला इंजन बन सकता है, इसलिए निवेश को लंबी दौड़ का मानकर किया जा रहा है।
“इंडिया इंटेलिजेंस किराये पर नहीं ले सकता”: Cost of Intelligence घटाने का लक्ष्य
अंबानी ने एक लाइन बहुत स्पष्ट कही—“India cannot afford to rent intelligence.” उनका कहना था कि भारत को AI इंटेलिजेंस “किराये” पर लेकर चलने की स्थिति से बाहर निकलना होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने यह लक्ष्य रखा कि वे “इंटेलिजेंस की लागत” उतनी ही नाटकीय तरीके से घटाएंगे, जितनी जियो ने “डेटा की लागत” कम की थी।
यह बयान एक बड़े रणनीतिक इरादे की तरफ इशारा करता है—AI को सस्ता, सुलभ और बड़े पैमाने पर उपयोगी बनाना। खासकर भारत जैसे देश में, जहां AI का फायदा तभी बड़े स्तर पर दिखेगा जब छोटे व्यवसाय, स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालय भी कम लागत पर AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकें।
AI से नौकरियां जाएंगी या बनेंगी? अंबानी का जवाब
AI और नौकरियों को लेकर चल रही बहस पर अंबानी ने स्पष्ट पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि AI नौकरियां “लेकर नहीं जाएगा”, बल्कि अलग-अलग सेक्टर्स में नई रोजगार संभावनाएं बना सकता है। यह उस डर के उलट है जो अक्सर ऑटोमेशन और AI के साथ जुड़ा रहता है।
उनका तर्क यह भी है कि टेक्नोलॉजी आम तौर पर काम करने के तरीके बदलती है—कुछ पुराने रोल कम होते हैं, लेकिन नए रोल पैदा होते हैं। इस संदर्भ में भारत का फायदा यह हो सकता है कि यहां बड़ी युवा आबादी है, जो सही स्किलिंग के साथ नई तरह की नौकरियों के लिए तेजी से तैयार हो सकती है।
AI का सबसे बड़ा “कंस्ट्रेंट” क्या है? अंबानी ने कंप्यूटिंग कॉस्ट पर जोर दिया
अंबानी ने कहा कि आज AI की सबसे बड़ी बाधा टैलेंट या इमैजिनेशन नहीं है, बल्कि कंप्यूटिंग पावर की कमी और उसकी ऊंची लागत है। उनका मतलब साफ है—AI मॉडल्स को ट्रेन करने और बड़े पैमाने पर चलाने के लिए हाई-एंड कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए, जो महंगा है और हर किसी की पहुंच में नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार इंसान “ह्यूमन-लाइक सिस्टम्स” बना रहा है, जो सीख सकते हैं, बोल सकते हैं, विश्लेषण कर सकते हैं, मूव कर सकते हैं और ऑटोनॉमस तरीके से आउटपुट भी बना सकते हैं। ऐसे सिस्टम्स के लिए स्केल पर कंप्यूटिंग उपलब्ध कराना किसी भी देश के AI लक्ष्य का आधार बन जाता है।
AI को “अक्षय पात्र” कहने का मतलब क्या है?
अंबानी ने अपने भाषण में भारतीय मिथक-परंपरा से एक दिलचस्प तुलना की। उन्होंने AI को आधुनिक “अक्षय पात्र” बताया—महाभारत की उस पौराणिक थाली/पात्र की तरह जो अनंत भोजन उपलब्ध कराती थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अक्षय पात्र जरूरतमंदों को लगातार पोषण देता था, उसी तरह AI “लिमिटलेस वैल्यू और अवसर” पैदा करने में सक्षम है।
यह तुलना उनके उस बड़े संदेश से जुड़ती है कि AI को सिर्फ एक कॉर्पोरेट टूल नहीं बल्कि समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन और अर्थव्यवस्था के लिए “असीम अवसर” देने वाला इंजन माना जाना चाहिए।
इस बयान का महत्व: भारत की AI कहानी का नैरेटिव बदल रहा है
मुकेश अंबानी का यह बयान भारत में AI को लेकर बढ़ती महत्वाकांक्षा और बड़े पूंजी निवेश की दिशा को मजबूत करता है। एक तरफ ग्लोबल कंपनियां भारत के टैलेंट और मार्केट को देखकर यहां अवसर देख रही हैं, दूसरी तरफ देश की बड़ी कॉर्पोरेट ताकत “AI-first” इंफ्रास्ट्रक्चर और स्केल पर डिलीवरी की बात कर रही है।
अगर ₹10 लाख करोड़ का निवेश वास्तव में कंप्यूट, नेटवर्क, डेटा सेंटर, AI प्लेटफॉर्म्स और स्किलिंग जैसी चीजों में सही तरीके से उतरता है, तो यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जा सकता है। हालांकि, ऐसी घोषणाओं के साथ असली कसौटी यही होती है कि अगले 12–24 महीनों में कितनी परियोजनाएं जमीन पर दिखती हैं और कितनी व्यापक जनता तक उनका लाभ पहुंचता है।
FAQs (5)
- मुकेश अंबानी ने भारत के AI भविष्य को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत दुनिया की सबसे बड़ी AI शक्तियों में से एक बनकर उभरेगा और AI “सुपर-अबंडेंस” का नया दौर ला सकता है। - अंबानी ने AI के लिए कितना निवेश घोषित किया है?
अंबानी ने कहा कि जियो, RIL के साथ पार्टनरशिप में, अगले 7 साल में ₹10 लाख करोड़ का निवेश करेगा ताकि भारत की AI क्षमताओं को तेज किया जा सके। - “India cannot afford to rent intelligence” का क्या मतलब है?
उनका मतलब है कि भारत को दूसरों से AI इंटेलिजेंस किराये पर लेकर (यानी सिर्फ आयात/सब्सक्रिप्शन पर निर्भर रहकर) नहीं चलना चाहिए; देश को खुद क्षमता बनानी होगी और “इंटेलिजेंस की लागत” को डेटा की तरह कम करना होगा। - क्या अंबानी के मुताबिक AI नौकरियां छीन लेगा?
नहीं। अंबानी ने कहा कि AI नौकरियां नहीं लेगा, बल्कि अलग-अलग सेक्टर्स में नई रोजगार संभावनाएं पैदा कर सकता है। - अंबानी ने AI की सबसे बड़ी बाधा क्या बताई?
उन्होंने कहा कि AI की सबसे बड़ी बाधा टैलेंट या इमैजिनेशन नहीं, बल्कि कंप्यूटिंग पावर की कमी और उसकी ऊंची लागत है।
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