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AI समिट विवाद: प्रियंक खड़गे का आरोप—“दक्षिणी राज्यों को जानबूझकर साइडलाइन किया गया

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Priyank Kharge AI Summit sidelined southern states
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कर्नाटक के IT-BT मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया कि दिल्ली के AI समिट में दक्षिणी राज्यों—कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु—के IT मंत्रियों को आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि टेक और इनोवेशन की असली ग्रोथ इन्हीं राज्यों से आती है। उन्होंने कहा कि “कंक्रीट इनवेस्टमेंट” को नजरअंदाज कर “हाइपोथेटिकल नुकसान” पर राजनीति हो रही है।

“टेक ग्रोथ हम चला रहे, मंच पर जगह नहीं”: दिल्ली AI समिट में तेलंगाना-तमिलनाडु-कर्नाटक के मंत्री बाहर? खड़गे का हमला

AI समिट विवाद: प्रियंक खड़गे बोले—“दक्षिणी राज्यों को जानबूझकर साइडलाइन किया गया”

दिल्ली में हुए India AI Impact Summit 2026 को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कर्नाटक के IT-BT मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया कि भारत की टेक ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभाने वाले दक्षिणी राज्यों को इस राष्ट्रीय मंच पर “जानबूझकर साइडलाइन” किया गया। उन्होंने खास तौर पर कहा कि तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक के IT मंत्रियों को AI समिट के लिए आमंत्रित ही नहीं किया गया।

प्रियंक खड़गे ने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए कही। उन्होंने लिखा कि कर्नाटक राज्य ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर केंद्र सरकार की हर पहल में सहयोग किया है, लेकिन जब राष्ट्रीय मंचों की बात आती है तो उन राज्यों को बाहर कर दिया जाता है जो वास्तव में भारत की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन स्टोरी को आगे बढ़ा रहे हैं।

“कोई इनविटेशन नहीं”—खड़गे के आरोप की मुख्य बातें

खड़गे के अनुसार, AI समिट जैसे बड़े राष्ट्रीय इवेंट में दक्षिणी राज्यों के IT मंत्रियों को न बुलाना कोई संयोग नहीं बल्कि “डिलिबरेट” यानी जानबूझकर किया गया कदम है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु देश के टेक इकोसिस्टम के बड़े स्तंभ हैं, तो फिर इन राज्यों के मंत्रियों को इनविटेशन क्यों नहीं मिला।

उन्होंने यह भी कहा कि “मोदी सरकार की पेटीनेस” (छोटी राजनीति/संकुचित सोच) के बावजूद कर्नाटक प्रदर्शन करना जारी रखेगा—इनवेस्टमेंट आएंगे, स्केलिंग होती रहेगी और राज्य भारत के बड़े विजन के साथ एलाइन रहेगा।

Mohandas Pai से बहस: विवाद कैसे शुरू हुआ?

यह पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब उद्योगपति मोहनदास पई (Mohandas Pai) ने कर्नाटक सरकार की आलोचना की। पई ने लिखा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मंत्री प्रियंक खड़गे आलोचना कर रहे हैं, जबकि कर्नाटक और बेंगलुरु के इनोवेटर्स और AI एंटरप्रेन्योर्स AI समिट में “डॉमिनेट” करते दिखे। पई ने यह भी कहा कि राज्य के नेताओं को राजनीतिक मजबूरियों से ऊपर उठकर इनोवेटर्स का समर्थन करना चाहिए।

प्रियंक खड़गे ने पई की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि कुछ लोग कथित “missed opportunities” पर जोर देते हैं, लेकिन कर्नाटक को मिले वास्तविक लाभों और निवेश प्रतिबद्धताओं को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने सवाल किया—“लोग सिर्फ ईंटें (brickbats) लेकर क्यों आते हैं, गुलदस्ता (bouquets) लेकर कभी क्यों नहीं, जब काम अच्छा हुआ हो?”

“हाइपोथेटिकल नुकसान” बनाम “कंक्रीट गेंस”—खड़गे का नैरेटिव

खड़गे ने अपने बयान में एक बड़ा तर्क रखा कि कर्नाटक को लेकर एक “सेलेक्टिव नैरेटिव” चलाया जा रहा है। उनके मुताबिक, “काल्पनिक नुकसान” (hypothetical losses) को हथियार बनाकर outrage पैदा किया जाता है, जबकि “ठोस फायदे” (concrete gains) को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने इसे “accidental नहीं, बल्कि political” बताया।

उन्होंने कर्नाटक में कुछ ग्लोबल खिलाड़ियों के निवेश/कमिटमेंट्स का भी जिक्र किया—जैसे Mistral AI, Google, Harvey, ElevenLabs, Disney और Anthropic—और कहा कि ये “रियल, टैंजिबल कमिटमेंट्स” हैं, सिर्फ हेडलाइन नहीं।

(महत्वपूर्ण नोट: ये निवेश/कमिटमेंट्स मंत्री द्वारा बताए गए उदाहरण हैं; किसी भी कंपनी के निवेश का सटीक स्कोप, वैल्यू और टाइमलाइन अलग-अलग घोषणाओं/दस्तावेजों पर निर्भर हो सकती है।)

दक्षिणी राज्यों का सवाल: “जहां ग्रोथ हो रही, वहीं पहचान क्यों नहीं?”

प्रियंक खड़गे ने यह भी पूछा कि जिन राज्यों ने दशकों से IT/स्टार्टअप इकोसिस्टम खड़ा किया और लगातार टेक टैलेंट व निवेश आकर्षित किया, उनकी भूमिका को राष्ट्रीय मंच पर औपचारिक मान्यता क्यों नहीं मिलती। उनके अनुसार, अगर देश को AI और डीप-टेक में आगे बढ़ना है तो केंद्र–राज्य समन्वय जरूरी है, न कि राज्यों को अलग-थलग करना।

खड़गे ने हितधारकों से यह भी कहा कि AI समिट के नतीजों को समझने के लिए स्टार्टअप्स, प्रदर्शकों (exhibitors) और विदेशी डेलीगेट्स की बात सुनी जाए, ताकि “आउटकम” का स्वतंत्र आकलन हो सके। उन्होंने संकेत दिया कि वे आगे चलकर यह भी बताएंगे कि केंद्र स्तर पर “mismanagement” के कारण कर्नाटक ने कौन-कौन से अवसर गंवाए हो सकते हैं।

इस बहस का बड़ा मतलब: टेक फेडरलिज़्म बनाम सेंट्रलाइज्ड मंच

AI जैसी टेक्नोलॉजी में नीति, टैलेंट और इनोवेशन का बड़ा हिस्सा राज्यों की जमीन पर बनता है—यूनिवर्सिटी, स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स, इंडस्ट्री क्लस्टर्स और स्किलिंग प्रोग्राम अक्सर राज्य सरकारों के साथ ही चलते हैं। इसीलिए खड़गे का “इनविटेशन नहीं मिला” वाला आरोप सिर्फ एक इवेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में टेक फेडरलिज़्म की बड़ी बहस को छूता है।

यदि दक्षिणी राज्यों का यह आरोप राजनीतिक रूप से पकड़ बनाता है, तो आने वाले समय में केंद्र को राष्ट्रीय टेक मंचों पर राज्यों की भागीदारी को लेकर अधिक पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया दिखानी पड़ सकती है। वहीं, केंद्र समर्थक खेमे का तर्क यह हो सकता है कि समिट में कंपनियों/स्टार्टअप्स की भागीदारी ज्यादा अहम थी और राज्य सरकारों की उपस्थिति से ज्यादा, “डिलिवरेबल्स” मायने रखते हैं। इसीलिए विवाद का केंद्र अब “प्रतिनिधित्व” बनाम “आउटकम” की बहस बनता जा रहा है।

FAQs (5)

  1. प्रियंक खड़गे ने AI समिट को लेकर क्या आरोप लगाया?
    उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के AI समिट में दक्षिणी राज्यों—कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु—के IT मंत्रियों को आमंत्रित नहीं किया गया और उन्हें जानबूझकर साइडलाइन किया गया।
  2. खड़गे ने किस प्लेटफॉर्म पर यह बात कही?
    प्रियंक खड़गे ने यह आरोप X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के जरिए लगाया।
  3. Mohandas Pai ने कर्नाटक सरकार पर क्या कहा था?
    पई ने लिखा कि कर्नाटक सरकार आलोचना कर रही है जबकि कर्नाटक/बेंगलुरु के इनोवेटर्स और AI एंटरप्रेन्योर्स AI समिट में प्रमुखता से दिखे; नेताओं को इनोवेटर्स का समर्थन करना चाहिए।
  4. खड़गे ने ‘कंक्रीट गेंस’ में किन कंपनियों का नाम लिया?
    खड़गे ने Mistral AI, Google, Harvey, ElevenLabs, Disney और Anthropic जैसी कंपनियों के कर्नाटक में निवेश/कमिटमेंट्स का जिक्र किया और कहा कि ये वास्तविक प्रतिबद्धताएं हैं।
  5. इस विवाद का टेक पॉलिसी के लिहाज से क्या महत्व है?
    यह बहस राष्ट्रीय टेक मंचों पर राज्यों की भागीदारी, पहचान और केंद्र–राज्य समन्वय (tech federalism) से जुड़ी है, खासकर तब जब देश की टेक ग्रोथ का बड़ा हिस्सा कुछ राज्यों से आता है।

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